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Meerut News: एक महीने से सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रही मोबाइल लैब
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एक महीने से सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रही मोबाइल लैब
-खून की जांच कराने के लिए पावर ग्रिड ने विभाग को उपलब्ध कराई थी 50 लाख रुपये की दो माोबाइल लैब
फोटो - 2
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। गांवों में ही लोगों को खून की जांच की सुविधा मिले, इसके लिए पावर ग्रिड ने स्वास्थ्य विभाग को दो मोबाइल लैब वाहन जरूर उपलब्ध कराए। लेकिन एक माह बीतने के बाद भी मोबाइल लैब का पंजीकरण नहीं हो सका और दोनों मोबाइल लैब एक महीने से सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रही है।
गांवों में खून की जांच की सुविधा न होने के कारण लोगों को बीमारी का पता नहीं चल पाता है। ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश महिलाएं अस्पताल दूर होने के कारण जांच कराने के लिए आने से कतराती है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों के साथ-साथ लोगों को गांव में ही खून की जांच की सुविधा मिले। इसके लिए ही एक महीने पहले पावर ग्रिड की ओर से स्वास्थ्य विभाग को 50 लाख रुपये की दो मोबाइल लैब दी थी।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोनों मोबाइल लैब का पंजीकरण कराने के बाद इनमें एक-एक चालक और एक-एक एलटी की नियुक्ति करनी थी। मोबाइल लैब मिलने के एक महीना बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अभी तक मोबाइल लैब का पंजीकरण तक नहीं करा पाया है। पंजीकरण न होने के कारण जिले में गांव-गांव और घर-घर खून की जांच की सुविधा भी शुरु नहीं हो पाई है।
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वर्जन -
मोबाइल लैब का पंजीकरण नहीं हुआ है। पंजीकरण होने के बाद लैब में चालक और एलटी को नियुक्त कर गांवों में खून की जांच कराई जाएगी। - डॉ दिनेश कुमार, सीएमओ
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-खून की जांच कराने के लिए पावर ग्रिड ने विभाग को उपलब्ध कराई थी 50 लाख रुपये की दो माोबाइल लैब
फोटो - 2
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। गांवों में ही लोगों को खून की जांच की सुविधा मिले, इसके लिए पावर ग्रिड ने स्वास्थ्य विभाग को दो मोबाइल लैब वाहन जरूर उपलब्ध कराए। लेकिन एक माह बीतने के बाद भी मोबाइल लैब का पंजीकरण नहीं हो सका और दोनों मोबाइल लैब एक महीने से सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रही है।
गांवों में खून की जांच की सुविधा न होने के कारण लोगों को बीमारी का पता नहीं चल पाता है। ग्रामीण क्षेत्र की अधिकांश महिलाएं अस्पताल दूर होने के कारण जांच कराने के लिए आने से कतराती है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं और लड़कियों के साथ-साथ लोगों को गांव में ही खून की जांच की सुविधा मिले। इसके लिए ही एक महीने पहले पावर ग्रिड की ओर से स्वास्थ्य विभाग को 50 लाख रुपये की दो मोबाइल लैब दी थी।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से दोनों मोबाइल लैब का पंजीकरण कराने के बाद इनमें एक-एक चालक और एक-एक एलटी की नियुक्ति करनी थी। मोबाइल लैब मिलने के एक महीना बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अभी तक मोबाइल लैब का पंजीकरण तक नहीं करा पाया है। पंजीकरण न होने के कारण जिले में गांव-गांव और घर-घर खून की जांच की सुविधा भी शुरु नहीं हो पाई है।
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मोबाइल लैब का पंजीकरण नहीं हुआ है। पंजीकरण होने के बाद लैब में चालक और एलटी को नियुक्त कर गांवों में खून की जांच कराई जाएगी। - डॉ दिनेश कुमार, सीएमओ