बेटियों पर गर्व: MJMC टॉपर अमीषा को अतुल माहेश्वरी और मुस्कान को मिला मुरारी लाल माहेश्वरी स्वर्ण पदक
Meerut News : अमीषा पटेल को अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक और मुस्कान को मुरारी लाल माहेश्वरी स्वर्ण पदक मिला है। अमीषा ने कहा कि मेरी ख्वाहिश है कि देश के टॉप पांच न्यूज चैनल में एंकरिंग करूं।
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मेरठ में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में वर्ष 2023 के लिए अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक एमजेएमसी की टॉपर रुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी मवाना रोड की अमीषा पटेल को मिला। अतुल माहेश्वरी अमर उजाला के नवोन्मेषक रहे हैं। प्रतिवर्ष इनके नाम पर टॉपर्स को ये स्वर्ण पदक दिया जाता है।
एमकॉम की टॉपर रुद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी रसूलाबाद नानपुर गाजियाबाद की मुस्कान को मुरारी लाल माहेश्वरी स्वर्ण पदक दिया गया। मुरारी लाल माहेश्वरी अमर उजाला के संस्थापक रहे हैं। प्रतिवर्ष इनके नाम पर एमकॉम टॉपर्स को ये स्वर्ण पदक दिया जाता है।
पदक मिला तो बढ़ गया उत्साह : अमीषा
अमीषा पटेल ने कहा कि जब राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मेरे गले में अतुल माहेश्वरी स्वर्ण पदक डाला तो खुशी का ठिकाना नहीं रहा। अब मेरा उत्साह लक्ष्य पाने के लिए दोगुना हो गया है। एमजेएमसी में यूनिवर्सिटी टॉप करने वाली अमीषा बताती हैं कि कड़ी मेहनत से मेडल मिला है। मेरी ख्वाहिश है कि देश के टॉप पांच न्यूज चैनल में एंकरिंग करूं। मेरा मानना है कि एक अच्छा पत्रकार बनने के लिए सरल और प्रचलित शब्दों का प्रयोग करना चाहिए, ताकि हर वर्ग के लोग पढ़ सकें। इसीलिए मैं शुरू से अमर उजाला अखबार पढ़ती हूं। उन्होंने बताया कि मेरे पिता किशन प्रकाश पटेल ट्रांसपोर्टर हैं। मां माया रानी पटेल एसबीआई में कैशियर हैं। दोनों ने ही मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
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पूरे होली मोहल्ले में खुशी का माहौल : मुस्कान
मुरारी लाल माहेश्वरी स्वर्ण पदक पाने वाली मुस्कान का कहना है कि पिता मेहर आलम और मां सलमा परवीन ने हमेशा पढ़ाई के बल पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, इसलिए इस गोल्ड मेडल के सही हकदार वह हैं। किठौर के होली मोहल्ला निवासी मुस्कान ने बताया कि पदक मिलने से पूरा मोहल्ला काफी खुश है। उसके पिता घर में डेयरी चलाते हैं। पांच बहन और एक भाई में दूसरे नंबर की मुस्कान ने बताया उसके पिता कभी बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते, यही वजह है कि सदैव पढ़ाई करके आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि वह ट्यूशन पढ़े, इसलिए खुद पढ़ाई करके स्वर्ण पदक प्राप्त किया है। इसके लिए नियमित छह से सात घंटे तक सेल्फ स्टडी की। बड़ी बहन दो नंबर से यह स्वर्ण पदक पाने से चूक गई थी, तभी मैंने पदक पाने का फैसला किया था।
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