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मिशन रफ्तार: मेरठ में 130 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेंगी ट्रेनें , 20 मिनट में पहुंचेंगे गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर
Tue, 29 Mar 2022 01:58 PM IST
Dimple Sirohi
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
दीपक भारद्वाज, अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 29 Mar 2022 01:58 PM IST
सार
मेरठ से अगले एक वर्ष में दिल्ली से सहारनपुर तक का सफर आसान हो जाएगा।, ट्रेनें 130 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ती नजर आएंगी। रेलवे के विभागों ने शुरू की तैयारियां।
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- फोटो : Pixabay
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विस्तार
अगले एक वर्ष में मेरठ से गुजरने वाली ट्रेनें 130 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ती नजर आएंगी। मिशन रफ्तार के तहत रेलवे के कई विभागों ने तैयारी शुरू कर दी है। अभी नई दिल्ली से सहारनपुर तक 110 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलती हैं। रफ्तार बढ़ने के बाद आप मेरठ से गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर तक मात्र 20 मिनट में पहुंच जाएंगे। रेलवे के सीनियर सेक्शन इंजीनियर (कार्य) विभाग ने ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। गाजियाबाद और मेरठ क्षेत्र में रेलवे ट्रैक के किनारे अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं।
दो किलोमीटर पहले लोको पायलट जान सकेंगे सिग्नल
स्टेशन आने से दो किमी पहले ही लोको पायलट को सिग्नल की स्थिति पता लग सकेगी। इसके लिए डबल डिस्टेंट सिग्नल सिस्टम पर भी कार्य होगा। अभी स्टेशन के आउटर से एक किमी पहले तक एक डिस्टेंट सिग्नल लगा होता है। जिससे पता लग जाता है कि क्या स्टेशन के बाहर (आउटर) ट्रेन को रोकना है। अब डबल डिस्टेंट सिग्नल लग जाने के बाद दो किमी पहले ही सिग्नल पता लग सकेगा।
यह भी पढ़ें: राकेश टिकैत धरने पर बैठे: भाकियू प्रवक्ता ने मुजफ्फरनगर पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, जानें पूरा मामला
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शताब्दी - नई दिल्ली से देहरादून, जनशताब्दी - नई दिल्ली से देहरादून, गोल्डन टेंपल - मुंबई से अमृतसर, शालीमार एक्सप्रेस- दिल्ली से जम्मू, इंदौर-अमृतसर एक्सप्रेस, छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस, देहरादून एक्सप्रेस- बांद्रा से देहरादून, योगा एक्सप्रेस- अहमदाबाद से ऋषिकेश।
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दो किलोमीटर पहले लोको पायलट जान सकेंगे सिग्नल
स्टेशन आने से दो किमी पहले ही लोको पायलट को सिग्नल की स्थिति पता लग सकेगी। इसके लिए डबल डिस्टेंट सिग्नल सिस्टम पर भी कार्य होगा। अभी स्टेशन के आउटर से एक किमी पहले तक एक डिस्टेंट सिग्नल लगा होता है। जिससे पता लग जाता है कि क्या स्टेशन के बाहर (आउटर) ट्रेन को रोकना है। अब डबल डिस्टेंट सिग्नल लग जाने के बाद दो किमी पहले ही सिग्नल पता लग सकेगा।
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