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सपा बसपा गठबंधन: रालोद को वेस्ट यूपी में दरकिनार करना नहीं आसान, अभी अटकी है बात

Sun, 13 Jan 2019 12:18 PM IST
Dimple Sirohi मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत
मदन बालियान, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 13 Jan 2019 12:18 PM IST
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Mission 2019: it is not easy to ignore Ralod in west up election
चौधरी अजित सिंह - फोटो : अमर उजाला

सपा और बसपा ने लखनऊ में गठबंधन के एलान में फिलहाल पश्चिम यूपी में खासा वजूद रखने वाले रालोद का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन सियासत में अभी कई दांव बाकी हैं। 

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फिलहाल रालोद को हाशिए पर छोड़ दिए जाने से सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। बात कहां और क्यों बिगड़ी या फिर से बात बन जाएगी। ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब तो वक्त के साथ मिलेंगे, लेकिन वर्तमान की बात करें तो रालोद के गढ़ बागपत में बसपा और सपा का गठबंधन नया गुल खिलाने की ताकत रखता है।

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एक या दो नहीं बल्कि पिछले 23 साल के नतीजे बताते हैं कि कभी बसपा तो कभी सपा ने रालोद के लिए लोकसभा चुनाव में चुनौती पेश की। लोकसभा चुनाव 2014 के आंकडे़ ही रालोद पर भारी पड़ रहे हैं। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद भाजपा और मोदी लहर में बागपत सीट से सपा के उम्मीदवार गुलाम मोहम्मद 213609 लाख  वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे थे।
 
जबकि बसपा के प्रशांत चौधरी ने 141743 लाख वोट हासिल किए थे। बसपा और बसपा के वोट जोड़ दें तो यह 355352 लाख होंगे। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह को मिले थे 199516 लाख वोट। इस गणित को ही अगर आधार बनाए तो बागपत में बसपा और सपा का गठबंधन नया गुल खिलाने की ताकत रखता है। 

रालोद के किले में यूं लगती रही सेंध
रालोद के गढ़ में बसपा और सपा के बढ़ते रसूख को देखने के लिए सियासत के गणित में 23 साल पीछे जाना पड़ेगा। वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में बागपत से जीते तो चौधरी अजित सिंह ही थे, लेकिन सपा के मुखिया गुर्जर ने 1,49,709 वोट हासिल कर सबको चौंका दिया था। साल 1998 में भाजपा के सोमपाल शास्त्री जीते और अजित सिंह दूसरे स्थान पर रहे। 

वर्ष 1999 में फिर रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह जीत गए, लेकिन साल 2004 से बसपा ने रालोद के गढ़ में दमदारी दिखानी शुरू की।  जीते अजित सिंह ही थे, लेकिन बसपा के औलाद अली ने 1,32,543 लाख वोट हासिल कर दूसरा स्थान पाया। 2009 में फिर अजित सिंह जीते, लेकिन बसपा के मुकेश शर्मा को मिले थे 1,75,611 वोट। आंकड़ों से जाहिर है कि बसपा और सपा की दस्तक वोटरों की बीच पड़ती रही है। 

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अभी बंद नहीं हुए रालोद के लिए दरवाजे
मेरठ (राजकुमार सैनी)। शनिवार को सपा और बसपा की बराबरी की तस्वीर साफ हो गई है। रालोद का जिक्र भले ही फिलहाल नहीं किया गया हो, लेकिन बागपत और मथुरा की सीट इस गठबंधन में रालोद के लिए रिजर्व रखे जाने की बात मानी जा रही है। रालोद को अभी उम्मीद है कि 15 जनवरी के बाद अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद तीन से चार सीटें मिल सकती हैं।

 

 

रालोद अभी बागपत और मथुरा को अपना मानकर चल रही है, लेकिन बताया जा रहा है कि जयंत चौधरी मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और अमरोहा सीट मांग रहे हैं। यह भी जानकारी मिल रही है कि रालोद गठबंधन से अलग नहीं होना चाह रहा है। पश्चिम उप्र में रालोद का कई सीटों पर बड़ा वोट बैंक हैं। दो सीट की बात सामने आने पर रालोद समर्थकों कुछ मायूस हैं।

हालांकि पार्टी सूत्रों से जानकारी मिल रही है कि रालोद महासचिव जयंत चौधरी लगातार सपा मुखिया अखिलेश यादव के संपर्क में हैं। जयंत चौधरी ने अपने पिता अजित सिंह के लिए मुजफ्फरनगर की सीट और बुलंदशहर या अमरोहा में से एक सीट का प्रस्ताव भी रखा है। 

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