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Lockdown: औने-पौने मिल रहे थे साइकिलों के दाम तो प्रवासी श्रमिकों ने निकाली उम्दा तरकीब
Tue, 26 May 2020 07:02 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 26 May 2020 07:02 PM IST
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अपनी साइकिल के पहियों को दिखाते प्रवासी मजदूर
- फोटो : amar ujala
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मेरठ जिला प्रशासन ने दूसरे प्रदेशों से पहुंचे प्रवासी श्रमिकों को भेजे जाने की व्यवस्था में थोड़ा बदलाव किया है। अब कंकरखेड़ा स्थित कोशा रिजॉर्ट से हटाकर भैसाली बस अड्डे से बसें लगाई गई हैं।
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ऐसे में साइकिल पर आने वाले कई मजदूर अपनी साइकिलों को बस में ले जाने के बजाय औने-पौने दाम बेचकर जा रहे हैं। मंगलवार को भैसाली अड्डे पर जाने से पहले कुछ श्रमिकों ने अपनी साइकिलों को बेचने के बजाय उसे साथ ले जाने के लिए अनोखा तरीका अपनाया।
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बेबस श्रमिकों की मजबूरी का फायदा उठा रहे लोग
लाॅकडाउन के बीच मजबूरी में पैदल अपने घरों को निकले प्रवासी श्रमिकों की बेबसी का भी खूब फायदा उठाया जा रहा है। बस में साइकिल नहीं ले जा पाने पर लोग उनकी साइकिलों को औने पौने दामों में खरीद लेते हैं। मजबूरी में श्रमिकों को साइकिल कम दाम में बेचनी पड़ती है।
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ऐसे में श्रमिकों ने इससे बचने के लिए उम्दा तोड़ निकाल लिया। श्रमिकों ने अपनी अपनी साइकिलों को बोरे में भर लिया और अपने साथ बस में रख लिया। श्रमिकों का कहना है कि वे अपने जिलों में पहुंचकर इन्हें फिर से असेम्बल करा लेंगे। लोग मजबूरी का फायदा उठाएं इससे बेहतर है कि इन्हें बोरे में भरकर साथ ले जा रहे हैं।
362 प्रवासी घर भेजे
जिले में फंसे प्रवासी श्रमिकों को घर भेजने का सिलसिला जारी है। भैसाली बस अड्डे से 362 प्रवासियों को झांसी और मध्यप्रदेश बॉर्डर पर भेजा गया। मेरठ डिपो के वरिष्ठ केंद्र प्रभारी देवेंद्र भारद्वाज ने बताया कि प्रवासियों को बस में बैठाने से पहले सभी की थर्मल स्क्रीनिंग कराई गई और सभी को भोजन वितरित किया गया। सोशल डिस्टेंस का अनुपालन भी किया गया।