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सियासी पिच पर मेरठ मेट्रो ‘हिट विकेट’

Sun, 14 Feb 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Sun, 14 Feb 2016 01:00 AM IST
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metro in meerut

सियासी पिच पर मेरठ में मेट्रो ट्रेन के प्रोजेक्ट को ‘हिट विकेट’ कर दिया गया। तीसरे अंपायर के रूप में सीएम अखिलेश यादव ने डीपीआर फाइनल होने के बाद भी बजट में मेरठ को नजरअंदाज कर दिया। वहीं तैयारी में पीछे चल रहे वाराणसी को 50 करोड़ रुपये देने का प्रावधान किया है। यह केवल इसलिए किया गया क्योंकि वाराणसी प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है। चुनाव में यहां से फायदा लेने के लिए सीएम ने गुगली डालकर वहां की जनता को रिझाने की कोशिश की है।

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सूबे के चार शहरों में मेट्रो ट्रेन का संचालन प्रस्तावित है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ तथा वाराणसी में मेट्रो प्रोजेक्ट युवा सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट है। लखनऊ में तो इस प्रस्ताव पर काम भी शुरू हो चुका है। पूरा जोर इस पर है कि अगले साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव तक सभी जगह काम शुरू कराया जा सके। सीएम के निर्देश पर सूबे के मुख्य सचिव आलोक रंजन खुद इसकी समीक्षा कर रहे हैं।
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मेरठ के लिए खजाना खाली
शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने यूपी बजट 2016-2017 पेश किया। सीएम ने मेट्रो परियोजना के लिए भी अपने खजाने का मुंह खोला। लखनऊ मेट्रो पर तेजी से काम के लिए 814 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। कानपुर और वाराणसी पर काम आगे बढ़ाने के लिए पचास पचास करोड़ रुपये जारी करने की घोषणा की गई। मेरठ के लिए इस बाबत एक फूटी कौड़ी तक नहीं दी गई।
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राजनीतिक रस्साकशी में उलझा मेरठ
लखनऊ में काम शुरू हो चुका है, ऐसे में वहां पैसा जारी करने की बात तार्किक है, लेकिन मेरठ से पहले वाराणसी को पैसा जारी करना साफ बता रहा है कि यह राजनीतिक पैंतरेबाजी है। पिछले दिनों लखनऊ में हुई समीक्षा बैठक में सूबे के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने खुद कहा था कि मेट्रो की तैयारियों में कानपुर पहले स्थान पर है। आगरा दूसरे और मेरठ तीसरे स्थान पर है। वाराणसी सबसे पीछे है। बावजूद इसके वाराणसी को धन जारी हो गया। न मेरठ का नंबर आया और न आगरा का। सियासी हलको में चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी है और सपा चाहती है कि यहां मेट्रो के प्रोजेक्ट को जोरशोर से पेश किया जाए। इससे चुनाव में फायदा मिल सके।

मेरठ में फाइनल है डीपीआर
मेरठ में ड्राफ्ट डीपीआर बन चुकी है और इसी माह लखनऊ मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी कुमार केशव इस बाबत यहां दौरा करने वाले हैं। वे मौके पर जाकर ड्राफ्ट डीपीआर का सत्यापन करेंगे। उम्मीद है कि अगले माह तक फाइनल डीपीआर बैठक में पेश कर काम शुरू कर दिया जाएगा। उधर, वाराणसी में अभी इतनी कार्रवाई नहीं हुई है। यहां कॉरिडोर तक फाइनल हो चुके हैं। सभी सर्वे भी हो गए हैं।


कमजोर पैरवी ने किया पीछे
मेरठ में एक यही बड़ा प्रोजेक्ट है जिसके लिए बजट में धन जारी कराया जा सकता था। इसकी स्थानीय सपा नेताओं ने पैरवी ही नहीं की। यदि ऐसा होता तो निश्चित रूप से इस प्रोजेक्ट के लिए धन जारी होता। स्मार्ट सिटी की तरह ही इस प्रोजेक्ट पर भी सपाइयों की राजनीतिक कमी सामने आ रही है।

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