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Meerut News: मेरठ की पारुल ने एशियन गेम्स में दिलाया दूसरा कांस्य पदक

Mon, 28 Sep 2026 08:01 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 28 Sep 2026 08:01 PM IST
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Meerut's Parul secures second bronze medal at the Asian Games.
पारुल के पदक जीतने पर खुशी मनाते परिजन
5000 मीटर दौड़ में दिखाया दम, रविवार को 3000 मीटर स्टीपल चेज में भी जीता था पदक
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लगातार दूसरे एशियाड में दो पदक जीतने वाली इकलौती महिला एथलीट बनी
फोटो समाचार
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। मेरठ के इकलौता गांव की रहने वाली पारुल चौधरी ने एशियन गेम्स में सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी कांस्य पदक जीता। उन्होंने सोमवार को हुई 5000 मीटर दौड़ में भी कांस्य पदक जीता। इससे पहले रविवार को उन्होंने 3000 मीटर स्टीपल चेज में कांस्य पदक जीता था। उन्होंने 5000 मीटर दौड़ 15 मिनट 14.61 सेकंड का समय लेकर पूरी की और तीसरा स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि पर यहां मेरठ में भी खुशी मनाई गई। उनके पिता कृष्णपाल सिंह और भाई राहुल ने गांव में मिठाई बांटी।
वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में दो पदक और अब 2026 के एशियन गेम्स में दो पदक प्राप्त करने वाली पारुल चौधरी इकलौती एथलीट बन गई है। उन्होंने 3000 मीटर स्टीपल चेज और 5000 मीटर दौड़ दोनों इवेंट में लगातार दूसरी बार पदक जीतकर मेरठ का नाम रोशन किया है। उन्होंने 9 मिनट 8.67 सेकंड का समय लेकर यह पदक जीता और नेशनल रिकॉर्ड भी बनाया। सोमवार को पारुल चौधरी ने 5000 मीटर दौड़ में प्रतिभाग किया और इसमें भी उन्होंने 15 मिनट 14.61 सेकंड का समय लेकर तीसरा स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक जीता। हालांकि इस इवेंट में राष्ट्रीय रिकॉर्ड भी पारुल के नाम ही है। जून 2026 में ही उन्होंने 5000 मीटर दौड़ में 15:04.26 का समय निकालकर अपना और देश का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर किया था।
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बेटी की उपलब्धि पर परिवार ने मनाई खुशी
पारुल चौधरी ने वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में भी 5000 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक और 3000 मीटर स्टीपल चेज में रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से अर्जुन अवाॅर्ड भी दिया जा चुका है। इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड भी दिया जा चुका है। उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें डीएसपी का पद भी दिया। परिवार में भी खुशी का माहौल है। उनके पिता कृष्णपाल और भाई राहुल ने सोमवार को भी गांव में लोगों को मिठाई बांटकर खुशी मनाई।
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बेटियों के लिए मिसाल बन गई है पारुल : कृष्णपाल सिंह
पारुल चौधरी का गांव से यहां तक का सफर आसान नहीं रहा है। उन्होंने इस कामयाबी तक पहुंचने के लिए कड़ा संघर्ष किया। इसी का नतीजा है कि आज उन्हें देशभर में जाना जाता है। उनके पिता कृष्णपाल सिंह ने कहा कि उनकी बेटी उन लड़कियों के लिए मिसाल बन गईं हैं जो खेलों में आगे जाना चाहती हैं। उन्होंने ऐसे माता-पिता से भी अपील की जिनकी बेटियां खेलों में जाना चाहती हैं वह अपनी बेटियों को आगे बढ़ाएं और तैयारी कराएं। जहां वह जाना चाहती हैं उन्हें लेकर जाएं और खेल की तैयारी कराएं। खेल पूरा जीवन तक बदल देता है।


उपलब्धियां और उपाधियां
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ
1500 मीटर : 4:18.80 ( गुवाहाटी 2018)
3000 मीटर : 8:57.19 एनआर ( लॉस एंजिलिस 2022)

3000 स्टीपल चेज : 9:12.46 एनआर ( एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप)
5000 मीटर : फ्रांस में ही 2026 में 15 मिनट 4.26 सेकंड के साथ नेशनल रिकॉर्ड
अर्जुन अवार्ड- 2023
रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड-2023
पारुल के नाम पर सिंथेटिक ट्रैक का नाम रखने की मांग
पारुल के लगातार एशियन गेम्स में पदक जीतने के बाद यहां मेरठ में खुशी का माहौल है। जिला एथलेटिक संघ की ओर से भी इसे लेकर खुशी जताई गई है। उत्तर प्रदेश एथलेटिक संघ के अध्यक्ष आशुतोष भल्ला ने भी पारुल को बधाई दी। जिला एथलेटिक संघ के सचिव अनु कुमार ने कहा कि कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में बने सिंथेटिक ट्रैक का नाम पारुल चौधरी के नाम पर रखने की मांग की। उनकी इस मांग का सभी खिलाड़ियों व खेल प्रेमियों ने समर्थन किया है।

पारुल के पदक जीतने पर खुशी मनाते परिजन

पारुल के पदक जीतने पर खुशी मनाते परिजन

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