मेरठ: 70 वर्ष बाद पुरातत्व विभाग ने शुरू किया उत्खनन, हस्तिनापुर खोल सकता है सिनौली से बड़े राज
हस्तिनापुर से 90 किलोमीटर दूर बागपत जिले के सिनौली गांव में पुरातत्व विभाग ने 2006 में खुदाई की थी। तब वहां महाभारत काल की महत्वपूर्ण वस्तुएं मिली थीं। अब हस्तिनापुर सिनौली से भी बड़े राज खुल सकते हैं।
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महाभारत काल के रहस्यों से पर्दा उठाने के लिए हस्तिनापुर में करीब 70 वर्ष बाद पुरातत्व विभाग ने उत्खनन शुरू किया है। यहां पांडव टीले और उल्टा खेड़ा टीले पर काम शुरू कर दिया है। पुरातत्व विभाग की छह सदस्यीय टीम के साथ नोएडा के पुरातत्व संस्थान के 15 छात्र-छात्राओं की टीम यहां पहुंच गई है।
हस्तिनापुर महाभारतकाल में कुरु वंश की राजधानी रहा है। आजादी के बाद हस्तिनापुर में पहली बार 1952 में पुरातत्व विभाग ने खोदाई की थी। तब पुरातत्व विशेषज्ञ प्रोफेसर बीबी लाल के नेतृत्व में यहां टीम ने शोध कर महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकाले थे। इस खुदाई के बाद ही यह पता चला था कि महाभारत काल ईसा से 900 वर्ष पूर्व था और हस्तिनापुर शहर गंगा की बाढ़ में बह गया था।
हस्तिनापुर खोल सकता है सिनौली से बड़े राज
हस्तिनापुर से 90 किलोमीटर दूर बागपत जिले के सिनौली गांव में पुरातत्व विभाग ने 2006 में खुदाई की थी। तब वहां महाभारत काल की महत्वपूर्ण वस्तुएं मिली थीं। लंबे समय से हस्तिनापुर में खुदाई की मांग चल रही थी। पुरातत्व विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी यहां खुदाई दो महीने चलेगी। हालांकि शुरुआत में कई सामान्य वस्तुएं मिली हैं। इन्हें भी जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
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2020 में हुई थी नेशनल म्यूजियम और दर्शनीय स्थल की घोषणा
हस्तिनापुर की महत्ता को देखते हुए सरकार ने एक फरवरी 2020 को केंद्र के बजट में यहां नेशनल म्यूजियम बनाने की भी घोषणा की थी। हस्तिनापुर को देश के दर्शनीय स्थलों की सूची में शामिल किया गया था। हालांकि अभी इसके लिए कोई बजट जारी नहीं हुआ है। पुरातत्व विभाग अपने वार्षिक बजट से ही यहां पांडव टीले और उल्टा खेड़ा टीले की खुदाई कर रहा है। सरकार से बजट जारी होने के बाद यहां पर्यटकों के लिए काम कराए जाएंगे।
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पर्यटन विभाग के वीडियो में सिर्फ जंबूद्वीप
प्रदेश के पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर दो मिनट चार सेकंड का एक वीडियो अपलोड हुआ है जिसमें प्राचीन स्थलों को दर्शाया गया है। इस वीडियो में जैन धर्म के पावन तीर्थ जंबूद्वीप और अष्टापद के कई फोटो नजर आ रहे हैं। हालांकि इसमें महाभारत से जुड़ी धरोहर शामिल नहीं हैं। हस्तिनापुर में प्राचीन पांडेश्वर महादेव मंदिर, कर्ण मंदिर, प्राचीन जयंती माता शक्तिपीठ मंदिर, द्रौपदी घाट मंदिर, प्राचीन द्रोपदेश्वर महादेव मंदिर, राजा रघुनाथ महल, अमृत कूप आदि कई प्राचीन स्थल आज भी मौजूद हैं। इन्हें देखने के लिए देश के कोने-कोने से सैकड़ों सैलानी हर रोज पहुंचते हैं।