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एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: मिलों के लिए फायदे का सौदा बना एथनॉल उत्पादन

Thu, 31 Jan 2019 02:22 PM IST
कपिल kapil राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Thu, 31 Jan 2019 02:22 PM IST
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Meerut, Sugar mills will benefit from ethanol production in Uttar Pradesh
सांकेतिक

देश में चीनी के बंपर उत्पादन को संतुलित करने और किसानों के बढ़ते गन्ना बकाया भुगतान से चिंतित सरकार की गन्ना रस और बी हैवी शीरे से एथनॉल बनाने की नीति रंग लाने लगी है। एथनॉल उत्पादन करने वाली मिलों को एथनॉल के साथ चीनी उत्पादन करने पर प्रति क्विंटल गन्ने से करीब 60 रुपये का फायदा हो रहा है। मंडल की बृजनाथपुर शुगर मिल अब तक डेढ़ लाख लीटर एथनॉल की बिक्री इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन को कर चुकी है। साबितगढ़ मिल में एथनॉल प्लांट का कार्य जारी है।

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यह है स्थिति
देश में लगातार बढ़ रहे गन्ना रकबे और अच्छी उपज के चलते चीनी का उत्पादन लगातार सरप्लस हो रहा है। पिछले साल 315 लाख टन पहुंचा देश में चीनी का उत्पादन इस साल भी 300 टन से ऊपर होने का अनुमान लगाया जा रहा है। जरूरत और एक्सपोर्ट के बाद भी 50 हजार टन से ज्यादा चीनी का स्टॉक लगातार बच रहा है। चीनी की बिक्री नहीं होने के चलते शुगर मिलें किसानों का गन्ना बकाया भुगतान भी नहीं कर पा रही है। देश में वर्तमान पेराई सत्र का 20 हजार करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। इसमें यूपी का 10 हजार करोड़ रुपये बकाया है। मेरठ मंडल की मिलों पर भी 1324 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है। सरकार ने देश में चीनी उत्पादन का संतुलन बनाने के लिए गन्ने के रस से एथनॉल उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके लिए सरकार ने नीति में परिवर्तन के साथ ही पेट्रोल में एथनॉल के मिश्रण की प्रतिशतता बढ़ाई है।

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ये है गणित  
100 क्विंटल गन्ने से 6 क्विंटल 25 किलो बी हैवी शीरा और 9 क्विंटल 60 किलो चीनी प्राप्त होती है। शीरे से 162 लीटर एथनॉल प्राप्त होता है जो 50 रुपये प्रतिलीटर से 8463 रुपये का 3100 रुपये क्विंटल के हिसाब से चीनी 29698 रुपये की बैठती है। इनसे मिल को कुल 38161 रुपये प्राप्त होते हैं। जबकि 100 क्विंटल गन्ना 325 रुपये की दर से 32500 रुपये का बैठता है। यानी मिल को 100 कुंतल गन्ने से 5661 रुपये शुद्ध आय प्राप्त होगी। 

इन पर निर्भर उत्पादन
विषैला होने के चलते तेल में ही एथनॉल की मिक्सिंग होती है। इसलिए एथनॉल का उत्पादन तेल कंपनियों पर निर्भर है। कंपनियां जिस मात्रा में एथनॉल की मिक्सिंग बढ़ाती जाएगी वैसे ही मांग बढ़ेगी। नई नीति के अंतर्गत यूपी में इस साल 81 करोड़ लीटर एथनॉल के टेंडर हुए हैं। प्रदेश में 37 शुगर मिले एथनॉल का उत्पादन कर रही है।

केवल दो मिलें बनाएंगी 
ढबी हैवी शीरा वह स्टेज है जिसमें शीरे के अंदर चीनी का काफी अंश होता है। प्रदेश में हापुड़ की बृजनाथपुर और बिजनौर की धामपुर मिल इस शीरे से एथनॉल बना रही है। मेरठ की दौराला, किनौनी, नंगलामल और सहारनपुर की गागनौली व त्रिवेणी मिल ही इस सी हैवी शीरे से एथनॉल तैयार कर रही हैं।

तो सुधर जाएगी स्थिति
बंपर चीनी उत्पादन का संतुलन बनाने के लिए एथनॉल बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सरकार की नीति के चलते कुछ मिलों ने एथनॉल बनाना शुरू कर दिया और कुछ प्लांट लगा रही हैं। 10 फीसदी गन्ना एथनॉल बनाने में प्रयोग होने लगे तो स्थिति सुधर सकती है। - हरपाल सिंह, उप गन्ना आयुक्त मेरठ परिक्षेत्र

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