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Meerut: ओवैसी की पतंग ने पंक्चर की सपा की साइकिल, वोट की ताकत दिखाने के लिए मुस्लिम हुए लामबंद

Sun, 14 May 2023 02:50 PM IST
Dimple Sirohi अरीश रिजवी/वाहिद अली, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी/वाहिद अली, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 14 May 2023 02:50 PM IST
सार

मेरठ में सपा को न तो गठबंधन का फायदा हुआ, न ही मुस्लिमों और दलितों का पूरा साथ नहीं मिला। अब विधायकों और सपा नेताओं का कहना है कि शहर का मिजाज भांपना मुश्किल रहा है, हार की समीक्षा होनी चाहिए। उधर, शहर के मुस्लिम वोटरों ने एक तरफा होकर एआईएमआईएम को वोट देकर बड़ा संदेश दिया है।

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Meerut: SP's cycle punctured by Owaisi kite, Muslims rally to show power of vote
सीमा प्रधान, अतुल प्रधान व शाहिद मंजूर

विस्तार

मेरठ महापौर प्रत्याशी पद के लिए ओवैसी की पतंग ने सपा की साइकिल को पंक्चर कर दिया। मुस्लिम बहुल इलाकों में पतंग ऐसी उड़ी कि आखिर तक साइकिल रफ्तार ही नहीं पकड़ सकी। मुस्लिमों के अलावा दलितों का भी सपा को ज्यादा साथ नहीं मिला। रालोद और आजाद समाज पार्टी से गठबंधन का भी खास फायदा नहीं हुआ। इसकी वजह यह भी रही कि रालोद मुखिया चौधरी जयंत और आसपा प्रमुख चंद्रशेखर आजाद प्रचार करने नहीं आए। 

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महापौर सीट पर मेरठ में सपा का पलड़ा हमेशा कमजोर ही रहा है। कभी भी सपा का महापौर नहीं बना। पूर्व महापौर पिछली बार जब चुनाव जीती थीं तो वह बसपा में थीं। बाद में उन्होंने सपा का दामन थामा था। तब मुस्लिमों ने हाथी की सवारी की थी। साल 2006 में महापौर पद पर सपा समर्थित लीलावती की जमानत जब्त हुई थी। साल 2012 में सपा समर्थित महापौर प्रत्याशी रफीक अंसारी (शहर विधायक) हारे थे। साल 2017 में महापौर प्रत्याशी दीपू मनोठिया हारीं। इस बार महापौर में फिर इतिहास दोहराया गया है। 
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इस बार नगर निगम चुनाव में अपनी अहमियत दिखाने के लिए सपा के महापौर प्रत्याशी पद पर साइकिल छोड़ मुस्लिमों ने एआईएमआईएम को जमकर वोट किया। नतीजतन, अधिकांश मुस्लिम इलाकों में साइकिल रेंगती नजर आई। 
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यह भी पढ़ें: Muzaffarnagar News: गठबंधन रहा असरदार, बिखराव से खिसका भाजपा का जनाधार

कहीं चूक रह गई : जयवीर सिंह  
सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह का कहना है कि हमसे कहीं चूक हुई है। मुस्लिम वोटों का रुझान ओवैसी की पार्टी की तरफ रहा। समीक्षा की जाएगी कि चूक कहां रही और इसे कैसे दूर किया जा सकता है। 

मजबूती से चुनाव लड़ा, हार स्वीकार
हार के बाद विधायक अतुल प्रधान का कहना है कि वे अकेले दम पर मजबूती से चुनाव लड़े। जनता का फैसला उन्हें स्वीकार है। उम्मीद से कम वोट मिला। अभी तक जनता के बीच रहे हैं, आगे भी जनता के बीच ही रहेंगे। बड़ी हार का कारण यह भी रहा कि सपा का मुख्य वोट बैंक बिखराव में है। कहीं उन्होंने सपा को वोट किया तो कहीं बसपा को। यहां एआईएमआईएम को। हमें सभी वर्गों और समाज का वोट मिला, मगर कम रह गया। इसके अलावा भाजपा के लोगों ने गुंडई की। बूथ कैप्चरिंग की, जिस कारण इतनी बड़ी जीत उन्हें मिली। 

शहर का मिजाज भांप नहीं पाए टिकट की पैरोकारी करने वाले : शाहिद मंजूर 
पूर्व कैबिनेट मंत्री और किठौर विधायक शाहिद मंजूर का कहना है कि जो लोग महापौर प्रत्याशी को टिकट दिलाकर लाए, वे शहर का मिजाज भांप नहीं सके। उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष तक को सही बात नहीं बताई, उन्हें गुमराह किया। जिले में पार्टी की कमान ऐसे लोगों को दे दी गई, जो आरएसएस की मानसिकता वाले हैं। इससे फर्क पड़ा। पार्टी को अगर मजबूत करना है तो नेताजी मुलायम सिंह के नीतियों पर चलना होगा, नहीं तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा। 

सपा : चार से बढ़कर 13 हुई पार्षदों की संख्या
मेरठ महापौर सीट पर भले ही सपा की तगड़ी हार हुई हो, लेकिन पार्षदों में सपा ने पिछली बार के मुकाबले बाजी मारी है। साल 2017 में चार पार्षद जीते थे, जबकि नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी। इस बार पार्षदों की संख्या 13 हो गई है। सरधना नगर पालिका और परीक्षितगढ़ नगर पंचायत में जीत मिली है। इससे पहले 2006 में 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी। साल 2012 में चार पार्षद जीते थे। 

सबको साथ लेकर नहीं चले महापौर प्रत्याशी : योगेश वर्मा 
पूर्व विधायक योगेश वर्मा का कहा है कि चुनाव सही तरीके से नहीं लड़ सके, जिस कारण यह रिजल्ट आया। महापौर प्रत्याशी पार्टी के नेताओं को साथ लेकर नहीं चले। साथ लेकर चलते तो नतीजा कुछ और हो सकता था। 

यह भी पढ़ें:  मेरठ निकाय चुनाव के नतीजे: पिछली बार महापौर, इस बार हाशिये पर पहुंची बसपा, घट गए सभासद

हार की होनी चाहिए समीक्षा : रफीक अंसारी
शहर विधायक रफीक अंसारी का कहना है कि हार क्यों हुई, इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। इस संबंध में राष्ट्रीय अध्यक्ष को अवगत कराया जाएगा और उनसे अनुरोध किया जाएगा कि वे इसकी समीक्षा कराएं, कि मेरठ में महापौर सीट पर सपा तीसरे स्थान पर क्यों रही?

सपा : चार से बढ़कर 13 हुई पार्षदों की संख्या
महापौर सीट पर भले ही सपा की तगड़ी हार हुई हो, लेकिन पार्षदों में सपा ने पिछली बार के मुकाबले बाजी मारी है। साल 2017 में चार पार्षद जीते थे, जबकि नगर पालिका सरधना पर जीत हुई थी। इस बार पार्षदों की संख्या 13 हो गई है। सरधना नगर पालिका और परीक्षितगढ़ नगर पंचायत में जीत मिली है। इससे पहले 2006 में 10 पार्षद बने थे। नगर पंचायत लावड़ पर जीत हुई थी। साल 2012 में चार पार्षद जीते थे। 

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वोट की ताकत दिखाने के लिए मुस्लिम हुए लामबंद
मेरठ शहर के मुस्लिम वोटरों ने जिस तरह एक तरफा होकर एआईएमआईएम को वोट दिया है, उसमें एक बड़ा मेसेज छिपा है। सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुस्लिमों के विभिन्न मुद्दों पर उदासीनता और प्रदेश में लगातार मुस्लिमों पर कार्रवाई से लोग नाराज थे। ऐसे में मुस्लिमों ने 2017 और 2022 में सपा को जबरदस्त वोट किया था, लेकिन दोनों बार सरकार न बनने से मुस्लिम असमंजस में आ गया। ऐसे में सपा द्वारा गैर मुस्लिम प्रत्याशी उतारने से मुस्लिमाें एक प्रयोग करने का मौका मिल गया।   

एआईएमआईएम के महापौर प्रत्याशी को 128547 वोट मिले है, जो मुस्लिमों वोटरों के इशारे को समझाने के लिए काफी है। समाजवादी पार्टी के शहर के कद्दावर मुस्लिम नेताओं का चुनाव से दूरी बनाने के कारण मुस्लिम वोट स्वतंत्र हो गया। जिसके बाद उन्हाेंने एआईएमआईएम के साथ जाने का मन बना लिया। 

चुनाव के दौरान लिसाडीगेट थाना क्षेत्र के कुछ युवाओं ने इस मुस्लिम वोटरों की ताकत दिखाने की बात कही थी। क्योंकि वो सपा पर शहर में मुस्लिमों की अधिक संख्या होने के बावजूद गैर मुस्लिम को टिकट देने से भी नाराज थे। जिसमें कुछ सपा के मुस्लिम नेताओं ने भी टिकट का विरोध जताने के लिए मुस्लिम वोटरों को एआईएमआईएम पर ट्रांसफर कराने पर मेहनत की। 

पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर और शहर विधायक रफीक अंसारी ने चुनाव से दूरी तो बनाई थी, साथ ही उनके साथ चुनाव में कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले कार्यकर्ता भी चुनाव में विरोध करते नजर आ रहे थे। ऐसे में मुस्लिमों ने भी मन बनाया और एआईएमआईएम के चुनाव निशान पंतग पर जमकर वोटिंग कर डाली। 

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वोट हमारा, राज तुम्हारा नहीं चलेगा
19 अप्रैल को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट अपलोड की गई, जिसमें अतुल प्रधान की पत्नी सीमा प्रधान के प्रत्याशी बनाने का विरोध किया गया। जिसमें लिखा था - वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा। ये पोस्ट सपा नेता बदर अली के पेज से सोशल मीडिया पर पोस्ट हुई थी।

मामले में बदर अली ने कहा महापौर चुनाव के लिए मुस्लिमों की हिस्सेदारी के लिए टिकट बनता था। जिसके लिए वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा नारा दिया गया। ढवाई नगर निवासी शाहिद   अहमद ने बताया गैर मुस्लिम को टिकट दिया, जिसके लिए अखिलेश यादव को ताकत भी दिखानी थी। क्योंकि मुस्लिमों को लीडरशिप चाहिए, सिर्फ वोट बैंक बनकर नहीं रहना है।

मुस्लिमों की बदली हुई चाल, सपा के लिए बनेगी चुनौती 
नगर निकाय चुनाव में मुस्लिमों की बदली हुई चाल सपा के लिए भविष्य में चुनौती बन सकती है। अगले साल 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। औवेसी की पार्टी के इस प्रदर्शन के बाद पार्टी की नजरें लोकसभा चुनाव पर भी हैं। संभल में भी एआईएमआईएम प्रत्याशी ने जीत दर्ज की, जबकि अन्य सीटों पर भी एआईएमआईएम पर मुस्लिम वोट पड़ा है। एआईएमआईएम भविष्य में सपा के लिए चुनौती बन सकती है। 

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