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UP: ऐसे जज्बे के आगे सबकुछ संभव, बिना हाथों के तीरंदाजी में पैरालंपिक तक का सफर, ये हैं शीतल की उपलब्धियां

Fri, 25 Aug 2023 06:06 PM IST
कपिल kapil वाहिद अली, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
वाहिद अली, संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 25 Aug 2023 06:06 PM IST
सार

Meerut News : ऐसा जज्बा अगर किसी के अंदर हो तो उसके आगे सबकुछ संभव है। हम बात कर रहे हैं शीतल देवी की, जिन्होंने बिना हाथों के तीरंदाजी में पैरालंपिक तक का सफर तय किया है। इनकी उपलब्धियां जानकर आप भी सलाम करेंगे।

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Meerut: Sheetal Devi of Jammu and Kashmir has traveled till Paralympics in archery without hands
शीतल देवी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहावत है मेहनत इतनी शांति से करो कि कामयाबी शोर मचा दे। जम्मू-कश्मीर के जिला किश्तवाड़ के लोहिधार गांव की 16 वर्षीय पैरा तीरंदाज शीतल देवी के लिए यह कहावत सटीक बैठती है। शांत स्वभाव की शीतल हाल में ही वर्ल्ड पैरा तीरंदाजी में रजत पदक लेकर 2024 पैरालंपिक कोटा हासिल कर चुकी हैं। उनका जज्बा युवा खिलाड़ियों को प्रेरित कर रहा है। सोशल मीडिया पर अब उनके लाखों फैंस हो चुके हैं। 

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बताया गया कि शीतल पिछले कुछ दिन से मेरठ में ही हैं। यहां कंकरखेड़ा सहित अन्य जगहों पर उनका स्वागत किया गया। इस दौरान शीतल ने युवा खिलाड़ियों के लिए कहा कि हिम्मत न हारें, हर हाल में लक्ष्य पर नजर रखें और आगे बढ़ें।

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शीतल के पिता मानसिंह किसान हैं और मां शक्ति देवी गृहिणी हैं। छोटी बहन शिवानी भी साथ रहती हैं और एक राष्ट्रीय स्तरीय तीरंदाज हैं। शीतल ने बताया कि दोनों हाथ न होने के कारण जीवन कठिन लग रहा था। टीवी और अखबारों में पैरालंपिक की खबरें पढ़ीं तो सोचा खेलों में आगे बढ़ना चाहिए।

वह 11 महीने पहले ही श्री माता वैष्णो देवी शाइन बोर्ड आर्चरी एकेडमी कटरा में दंपती कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी से मिलीं। यहां से खेलों में नया सफर शुरू किया और राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। पैरों से धनुष पकड़ना और कांधे की डिवाइस से तीर को छोड़कर शीतल ने प्रतिदिन नए कीर्तिमान स्थापित किए। 

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कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी मूल रूप से धनोरा टिकरी बागपत के हैं और वर्तमान में कंकरखेड़ा के किंग्स पार्क कॉलोनी में रहते हैं। इन दिनों शीतल अपनी बहन शिवानी और साथी खिलाड़ी मनीषा के साथ मेरठ में दंपती कोच के साथ ही आई हैं। यहां वे कांधे की डिवाइस बनवा रहीं हैं। बृहस्पतिवार को कंकरखेड़ा किंग्स पार्क कॉलोनी निवासी मोहित राठी, पंकज चौधरी व सुनील सहित अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया।

शीतल की उपलब्धियां... 
- 11 महीने में नेशनल से पैरालंपिक तक का सफर
- चेक रिपब्लिक वर्ल्ड रैंकिंग टूर्नामेंट - स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक
- चेक रिपब्लिक में वर्ल्ड पैरा आर्चरी चैंपियनशिप में रजत पदक और 2024 पैरालंपिक के लिए क्वालीफाई किया।
- 22 अक्टूबर को चीन में पैरा एशियन गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व करेंगी।

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मेरठ मंडल में नेशनल एक्सीलेंसी सेंटर बनाने की मांग
बृहस्पतिवार को कोच कुलदीप वेदवान और अभिलाषा चौधरी ने आयुक्त सेल्वा कुमारी जे से भी मुलाकात की। उन्होंने मेरठ मंडल में नेशनल एक्सीलेंसी सेंटर बनवाने की मांग की है। इस पर आयुक्त ने प्रस्ताव मांगा है और शासन स्तर पर बात का भरोसा दिलाया। दंपती कोच अब तक पैरालंपियन ज्योति बालियान, वर्ल्ड चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक विजेता राकेश कुमार, स्वर्ण व रजत पदक विजेता सरिता देवी को प्रशिक्षण दे चुके हैं। कुलदीप द्वारा प्रशिक्षित धनोरा टिकरी गांव के 45 तीरंदाज भारतीय सेना में आर्चरी कोटे से देशसेवा कर रहे हैं।

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