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Meerut: निगम बोर्ड बैठक में मल्टीलेवल पार्किंग पर लगी मुहर, ट्रेड लाइसेंस प्रस्ताव रद्द, पार्षद ने किया हंगामा

Sat, 19 Nov 2022 01:26 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 19 Nov 2022 01:26 PM IST
सार

नगर निगम की बोर्ड बैठक में शनिवार को टाउन हॉल में आयोजित बैठक में मल्टीलेवल पार्किंग पर तो मुहर लगी।बोर्ड बैठक शनिवार को टाउन हॉल में आयोजित की जा रहै है। 

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Meerut: Seal on multilevel parking in corporation board meeting, trade license proposal cancelled
तैनात पुलिस फोर्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नगर निगम की बोर्ड बैठक शनिवार को टाउन हॉल में आयोजित की जा रहै है। यह मीटिंग एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ सकती है। इसे लेकर यहां सुबह से ही पुलिस फोर्स तैनात किया गया है। बैठक से एक दिन महापौर सुनीता वर्मा ने अपने समर्थित पार्षदों के साथ बैठक कर बोर्ड बैठक की रणनीति तैयार की। उधर नगर निगम कर्मचारी संघ ने भी नगरायुक्त कार्यालय के सामने बैठक कर महापौर का विरोध किया। नगरायुक्त अमित पाल शर्मा ने फिर से 67 कर्मचारियों की ड्यूटी बोर्ड बैठक में लगाई है। 

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मल्टीलेवल पार्किंग पर लगी मुहर
नगर निगम की बोर्ड बैठक में शनिवार को टाउन हॉल में आयोजित बैठक में मल्टीलेवल पार्किंग पर तो मुहर लगी लेकिन  ट्रेड लाइसेंस का प्रस्ताव कैंसिल हो गया। वहीं पार्षदों  ने ठेकेदारों का पिछला भुगतान नहीं करने को लेकर हंगामा कर दिया। पार्षदों ने कहा कि सड़कों के गड्ढे नहीं भरे गए, न ही क्षेत्र में विकास कार्य हुआ है। 
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जनता को बड़ी राहत, नही बढ़ेगा नामांतरण शुल्क
निकाय चुनाव से पहले जनता को बड़ी राहत । एक ओर ट्रेड लाइसेंस शुल्क नही लिया जाएगा तो दूसरी ओर नामांतरण शुल्क नही बढ़ेगा। पहले की तरह 500 रुपये लिया जाएगा शुल्क। इसके अलावा नही जारी होंगे धारा 213 के नोटिस। महापौर सुनीता वर्मा ने कहा जनता ने चुनकर भेजा है जनता के हित में लिए जाएंगे फैसले। नगरायुक्त अमित पाल शर्मा ने भी की घोषणा। मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव भी सदन में पास। पार्षदों ने विकास कार्य न होने और सड़कों के गड्ढामुक्त न होने पर जताई नाराजगी। 

नगर निगम कर्मचारियों ने महापौर के बयानों को लेकर जताई नाराजगी
नगर निगम कर्मचारी संघ के सदस्य संघ के अध्यक्ष अनीस अहमद व महामंत्री आलोक शर्मा के नेतृत्व में शुक्रवार को नगर निगम कार्यालय में एकत्र हुए। अध्यक्ष अनीस अहमद ने कहा कि महापौर सुनीता वर्मा ने कर्मचारियों के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल किया है। महापौर को 24 घंटे में कर्मचारियों के लिए दिए गए गलत बयानों का खंडन करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो कोई भी कर्मचारी सदन की बैठक में व्यवस्था नहीं संभालेगा। कर्मचारियों ने अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन भी नगरायुक्त को सौंपा। उधर संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने भी महापौर द्वारा कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि महापौर को अब से पहले शहर के विकास की चिंता नहीं सताई। अब अंमित समय में विकास की बात कही जा रही है। 


सदन में नहीं रखी गई मांग तो करेंगे आंदोलन 
सफाई मजदूर संघ के महामंत्री कैलाश चंदौला ने कहा कि बोर्ड बैठक में अगर सफाई कर्मचारियों के वेतन का मुद्दा नहीं उठा तो वह धरना देंगे। उनकी ओर आंदोलन शुरू किया जाएगा। 
 
शहर को एक मल्टीलेवल पार्किंग नहीं दे पाए 90 पार्षद  
जनता का चुना हुआ नगर निगम बोर्ड पांच साल में शहर को एक मल्टीलेवल पार्किंग नहीं दे सका। आधे से ज्यादा शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था नहीं हो पाई। लोहियानगर और मंगतपुरम में कूड़े के पहाड़ खड़े हो गए। अधिकांश सड़कें गड्ढों में बदल गईं और शहर के करीब 65 फीसदी हिस्से में सीवर लाइन भी नहीं डाली जा सकी। 


12 दिसंबर को नगर निगम बोर्ड के पांच साल पूरे हो जाएंगे। इस हिसाब से शनिवार (आज) को इस बोर्ड की अंतिम मीटिंग हो सकती है। इस बोर्ड के पांच साल दावों, वादों और विवादों में निकल गए। निगम रिकार्ड के मुताबिक शहर में 386794 भवन हैं और सीवर कनेक्शन केवल 96619 में ही बताया जा रहा है। शहर के 90वार्डों में से 13 में पानी की पाइप लाइन नहीं बिछ पाई है। 

आईटीएमएस चौराहों पर भी नहीं सुधरी यातायात व्यवस्था- शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सरकारी खजाने से करोड़ों खर्च हुए। यातायात नियमों का पालन न करने वालों के चालान राशि से भी सरकारी तिजोरी भर रही है, लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था सुधरने की बजाय खराब होती जा रही है। अव्यवस्थित चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। 

जनसंख्या के अनुरूप नहीं रखे गए सफाई कर्मचारी 
 शहर की बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में सफाई कर्मचारी नहीं हैं। सफाई कर्मचारी नेता अपने अधिकार की लड़ाई शासन, प्रशासन में नहीं बल्कि न्यायालय में भी लड़ रहे हैं। ठेका प्रथा से भी छुटकारा नहीं मिल रहा है।
 
ये रहे बड़े विवाद 

  1. टीपीनगर में सड़क घोटाले में फंसे निगम के इंजीनियर।
  2. निगम की दुकानों की नियम विरुद्ध खरीद-फरोख्त हुई। 
  3. मल्टीलेवल कार पार्किंग की डीपीआर के नाम पर धन की बंदरबांट।  
  4. संपत्ति नामांतरण शुल्क 500 रुपये से बढ़ाकर 50 हजार तक किया गया। 
  5. सीएम योगी आदित्यनाथ ने 76 कूड़ा गाडियों को हरी झंडी दिखाई पर ये चलीं नहीं।                      
  6. एनिमलबर्थ कंट्रोल सेंटर खुला, नहीं मिली कुत्तों से राहत। 

 दावा: खूब कराए कार्य 
हमने कूडा निस्तारण प्लांट लगवाया। जनता को गंगाजल उपलब्ध कराया। आईटीएमएस चौराहे विकसित कराए। दलित, मलिन व मुस्लिम बस्तियों में सड़कें बनवाने का काम किया गया। पिंक शौचालय बनवाए। पार्कों का सौंदर्यीकरण कराया। कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के लिए हमने धन जारी किया, लेकिन अधिकारियों ने पूरा काम नहीं किया। निर्धारित समय पर बोर्ड बैठक और कार्यकारिणी न और शहर का विकास ठप होने के पीछे अधिकारियों मंशा खराब रही। दो साल कोराना के कारण प्रभावित हुए। -  सुनीता वर्मा- महापौर।

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