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Meerut: धान की फसल में शीत ब्लास्ट बीमारी की दस्तक, कृषि विशेषज्ञ ने किसानों को किया सतर्क
Wed, 05 Aug 2026 07:40 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Wed, 05 Aug 2026 07:40 PM IST
सार
मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में धान की फसल पर शीत ब्लास्ट बीमारी का खतरा बढ़ने लगा है। कृषि विशेषज्ञ ने खेतों का निरीक्षण कर किसानों को रोग की पहचान, रोकथाम और समय पर फफूंदनाशी के छिड़काव की सलाह दी। लगातार नमी और बारिश के कारण इस बीमारी के तेजी से फैलने की आशंका जताई गई है।
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धान की फसल
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मेरठ के हस्तिनापुर क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश और बढ़ी नमी के बीच धान की फसल में शीत ब्लास्ट बीमारी के लक्षण सामने आने लगे हैं। इसे देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी है।
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लतीफपुर गांव में किया खेत का निरीक्षण
बुधवार को कृषि विशेषज्ञ मुकेश ठाकुर ने हस्तिनापुर क्षेत्र के गांव लतीफपुर में किसान गुरमुख सिंह के खेत का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों को धान की फसल में शीत ब्लास्ट रोग की पहचान, रोकथाम और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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नमी और बारिश से तेजी से फैलता है रोग
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि शीत ब्लास्ट एक फफूंदजनित रोग है, जो लगातार नमी, बादल छाए रहने और अधिक वर्षा की स्थिति में तेजी से फैलता है। इस बीमारी के कारण धान की पत्तियों पर धब्बे बनने लगते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों को दिए बचाव के सुझाव
मुकेश ठाकुर ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही कृषि विभाग की सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशी का छिड़काव करें। साथ ही खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें।
समय पर उपचार से बचाया जा सकता है नुकसान
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार यदि बीमारी की समय रहते पहचान कर उचित उपचार किया जाए तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों से मौसम के बदलते हालात को देखते हुए सतर्क रहने और किसी भी समस्या पर कृषि विभाग से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
कृषि विशेषज्ञ ने बताया कि शीत ब्लास्ट एक फफूंदजनित रोग है, जो लगातार नमी, बादल छाए रहने और अधिक वर्षा की स्थिति में तेजी से फैलता है। इस बीमारी के कारण धान की पत्तियों पर धब्बे बनने लगते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन घटने का खतरा बढ़ जाता है।
किसानों को दिए बचाव के सुझाव
मुकेश ठाकुर ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने की अपील की। उन्होंने कहा कि शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही कृषि विभाग की सलाह के अनुसार अनुशंसित फफूंदनाशी का छिड़काव करें। साथ ही खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था बनाए रखें और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करें।
समय पर उपचार से बचाया जा सकता है नुकसान
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार यदि बीमारी की समय रहते पहचान कर उचित उपचार किया जाए तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। किसानों से मौसम के बदलते हालात को देखते हुए सतर्क रहने और किसी भी समस्या पर कृषि विभाग से संपर्क करने की सलाह दी गई है।