Meerut: बिजली बम्बा बाईपास पर सड़क निर्माण कार्य पूरा, 17 घंटे में सुचारू हुआ आवागमन
मेरठ के परतापुर स्थित बिजली बंबा बाईपास स्थित जुरानपुर फाटक के दोनों ओर सड़क निर्माण कार्य को रेलवे द्वारा पूरा कर लिया गया। मात्र 17 घंटे बाद ही इस मार्ग पर वाहनों का आवागमन सुचारू हो गया है।
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मेरठ के परतापुर में बिजली बंबा बाईपास स्थित जुरानपुर फाटक के दोनों ओर सड़क निर्माण कार्य को रेलवे द्वारा पूरा कर लिया गया। 17 घंटे में ही कार्य को पूरा कर लिया गया है। पहले बिजली बंबा बाईपास को आज दोपहर दो बजे खोला जाना था लेकिन रातभर कार्य चलने के दौरान समय से पहले कार्य पूरा हो गया।
अब ट्रैक और सड़क त्योहारों से पहले ही दुरुस्त हो गयी है। लेकिन बाईपास पर काफी वाहनों का दबाव रहता है। इस बाईपास से 24 से 30 टायर ट्रक गुजरते है । जिससे दस महीने में ही सड़क बनानी पड़ती है।
बिजली बंबा बाईपास को बुधवार शाम 5 बजे जुर्रानपुर फाटक के दोनों ओर की सड़क की मरम्मत के लिए बंद कर दिया गया था। इससे दिल्ली रोड़ पर वाहनों का दबाव बढ़ गया और जाम के हालात रहे। रेलवे लाइन की ओर छोटे अंडरपास में से दोपहिया वाहनों को गुजरने में जद्दोजहद करनी पड़ी। यहां बारिश के कारण जंगल के रास्ते में पानी भर जाने से कई वाहन चालक फिसल गए। रेलवे अधिकारियों के अनुसार गुरुवार सुबह दस बजे से बिजली बंबा बाईपास को खोलने दिया गया है।
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दस महीने के अंतराल में ही फाटक के दोनों ओर की सड़क टूट गई। हालांकि, इस बीच एक बार पैचवर्क किया गया लेकिन बात नहीं बन सकी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यातायात दबाव होने के चलते ऐसा हो रहा है। जिससे बार-बार मरम्मत करनी पड़ रही है। इस फाटक पर चार लाख ट्रैफिक मल्टीपल यूनिट (रेलवे का आंकड़ा) है। इतना अधिक यातायात दबाव होने के कारण रेलवे ओवरब्रिज बनाया जाना जरुरी है। लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
तो चाहिए एक महीने का बंद
अगर डामर की सड़क से छुटकारा पाना है तो एक महीने तक बिजली बंबा बाईपास को बंद करना होगा। ऐसा असंभव सा नजर आता है। सीमेंटेड रोड़ बनाने के लिए एक महीने तक बिजली बंबा बाईपास को बंद करना होगा। ऐसा रेलवे अधिकारियों का दावा है। इसके बन जाने के बाद कुछ हद तक कई सालों के लिए बार-बार बिजली बंबा बाईपास बंद करने से छुटकारा मिल जाएगा।
नहीं जाग रहा शासन-प्रशासन
बिजली बंबा बाईपास के चौड़ीकरण और इनर रिंग रोड की कवायद शुरू हुई थी। एक बार फिर फाइल दब गई है। लोक निर्माण विभाग के अनुसार 80 से एक लाख वाहन बाईपास से रोजाना गुजर रहे हैं। इसके बाद भी शासन से बजट नहीं आ रहा है। वहीं, जनप्रतिनिधि भी बाईपास के निस्तारण के लिए मजबूती से सरकार के सामने पक्ष नहीं रख रहे हैं। इसका खामियाजा जनता को उठाना पड़ रहा है।