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मेरठ: पंडित सुनील भराला बोले- वकीलों के साथ नहीं जा सका सीएम से मिलने, मगर मैं हाईकोर्ट बेंच के पक्ष में

Mon, 28 Sep 2026 06:52 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Mohd Mustakim Updated Mon, 28 Sep 2026 06:52 PM IST
सार

श्रम कल्याण परिषद के पूर्व अध्यक्ष पंडित सुनील भराला ने बार एसोसिएशन को पत्र लिखकर सफाई दी है। दरअसल बेंच के मुद्दे पर सरकार की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। वकीलों ने घोषणा कर दी कि भाजपा नेताओं को कचहरी में नहीं घुसने देंगे। 

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Meerut: Pandit Sunil Bharala said—I could not accompany the lawyers to meet the CM, but I am in favor
पंडित सुनील भराला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट बेंच स्थापना को लेकर पूर्व श्रम कल्याण परिषद अध्यक्ष पंडित सुनील भराला ने मेरठ बार एसोसिएशन को पत्र भेजकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। 28 सितंबर को भेजे पत्र में उन्होंने कहा कि 24 सितंबर के नोटिस के संबंध में वह प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री से मिलने नहीं जा सके थे। इसलिए मुख्यमंत्री के समक्ष मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के संबंध में उनकी सहमति मानी जाना उचित नहीं है।
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सुनील भराला ने पत्र में बताया कि 21 सितंबर को वह निजी कारणों से मेरठ से बाहर थे। इसी वजह से अधिवक्ता बंधुओं के साथ प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा गया था। उन्होंने मेरठ बार एसोसिएशन से अनुरोध किया कि मेरठ में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के संबंध में मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए वक्तव्य को उनकी सहमति न माना जाए। 
 
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उन्होंने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बेंच स्थापित होना लंबे समय से अधिवक्ताओं और आम जनता की मांग है। बेंच स्थापित होने से पश्चिमी यूपी के लोगों को न्याय के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आबादी देश के कई राज्यों से अधिक है। प्रयागराज हाईकोर्ट की बेंच पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नहीं होने के कारण आम लोगों को न्याय के लिए परेशानी उठानी पड़ती है।
 
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सुनील भराला ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच होना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मांग को लेकर अधिवक्ताओं की लड़ाई और प्रयास जारी रहने चाहिए। उन्होंने बार एसोसिएशन को भेजे पत्र में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं होने के कारण उनकी ओर से बेंच स्थापना के संबंध में किसी सहमति का उल्लेख नहीं किया जाना चाहिए।

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