मरीजों के साथ बड़ी नाइंसाफी: अस्पताल आते-आते थक गईं शीबा-सोनी, पर नहीं हुआ अल्ट्रासाउंड, पढ़ें लाचारी की कहानी
UP News : यहां मरीजों के साथ बड़ी नाइंसाफी हो रही हैं। शीबा और सोनी अस्पताल आते-आते परेशान हो गईं लेकिन, इनका अल्ट्रासाउंड नहीं हुआ। आपको भी रुला देगी लाचारी की ये कहानी।
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मेरठ में ब्रह्मपुरी की रहने वाली सोनी को अल्ट्रासाउंड कराना है, लेकिन नंबर नहीं आ रहा है। वह कई दिन से परेशान होकर घर लौट जा रही हैं। यही समस्या महताब सिनेमा के पीछे बंगला नंबर 198 में रहने वाली शीबा की है। इनको भी अल्ट्रासाउंड के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
जिला और महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए परेशान होने वालीं यह दोनों महिलाएं ही नहीं हैं। यहां हर रोज 100 से ज्यादा लोगों को इसी तरह बिना जांच कराए लौटना पड़ता है। अब मरीज या तो निजी लैब में महंगी जांच कराए या फिर बार-बार आकर प्रयास करे, शायद नंबर आ जाए।
पीएल शर्मा जिला अस्पताल और महिला जिला अस्पताल दोनों जगह एक ही रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजीव त्यागी की तैनाती है। वह सुबह आठ बजे से 11 बजे तक पीएल शर्मा जिला अस्पताल में एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करते हैं।
इसके बाद महिला जिला अस्पताल चले जाते हैं, वहां दो बजे तक जांच करते हैं। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है। पहले तो अल्ट्रासाउंड के लिए दो से तीन माह की तारीख दी जाती थी। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची तो तारीख देनी तो बंद हो गई, लेकिन अब टोकन दिए जाने लगे। 20 से 25 लोगों को टोकन नंबर दिए जाते हैं।
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इसके बाद वालों का अल्ट्रासाउंड नहीं होता है, उन्हें अगले दिन आने के लिए कहा जाता है। जरूरी नहीं कि अगले दिन भी उनका नंबर आ जाए, क्योंकि फिर इतने ही लोगों की जांच लिखी जाती है। दोनों अस्पताल में हर रोज 150 से 200 अल्ट्रासाउंड लिखे जाते हैं। हालांकि जिला अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति हो गई है, लेकिन अभी तक उन्होंने ज्वॉइन नहीं किया है।
जांच के रेट
जांच जिला व महिला अस्पताल निजी लैब या अस्पताल में
अल्ट्रासाउंड मुफ्त 800-1000 रुपये
डिजिटल एक्सरे मुफ्त 250-600 रुपये
सीटी स्कैन मुफ्त 1500-10,000 रुपये
जांच जितनी जल्दी हो, उतनी बेहतर
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. वीके बिंद्रा का कहना है कि लिवर, गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) या फिर ट्यूमर आदि की जांच और इलाज सही समय पर न हो तो यह मरीज के लिए जानलेवा भी साबित हो सकता है। जांच तो जितनी जल्दी हो, उतना बेहतर है।
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रेडियोलॉजिस्ट के पांच पद हैं खाली
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह का कहना है कि जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट के तीन पद और महिला जिला अस्पताल में दो पद खाली हैं। डॉ. संजीव त्यागी की भी महिला जिला अस्पताल में मूल तैनाती है, जिला अस्पताल में वह अटैच हैं। पूरे प्रदेश में ही रेडियोलॉजिस्ट की कमी है, जिस कारण यह दिक्कत आ रही है।