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अखिलेश की जनसभा से पहले सपा नेताओं में क्यों मचा है घमासान, इस खास रिपोर्ट में पढ़िए

Fri, 19 Mar 2021 03:33 PM IST
कपिल kapil अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 19 Mar 2021 03:33 PM IST
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Meerut News: SP leaders do not have solidarity for Hastinapur seat
अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की रैली को लेकर सपा नेता भले ही एकजुट होकर तैयारी करने की बात कर रहे हों, लेकिन पार्टी की गुटबाजी किसी से छिपी नहीं है। सपा नेता इस समय चार खेमों में बंटे नजर आ रहे हैं। ऐसे में 23 मार्च को मवाना में होने वाली रैली की सफलता और असफलता पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

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समाजवादी पार्टी में इस समय हस्तिनापुर के सिंहासन को लेकर जंग छिड़ी है। गुटबाजी की बात करें तो अतुल प्रधान जब से पूर्व विधायक योगेश वर्मा को सपा में लेकर आए हैं, तब से जंग ज्यादा तेज हो गई है। क्योंकि इससे पहले मात्र दो ही गुट हस्तिनापुर को लेकर सक्रिय थे। 
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सपा सूत्रों के अनुसार जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह जहां विपिन मनोठिया की पैरोकारी मजबूती से कर रहे हैं, वहीं पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर प्रशांत गौतम के पक्ष में हैं। पूर्व जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह और पूर्व विधायक गुलाम मौहम्मद का झुकाव विधायक प्रभुदयाल वाल्मीकि की तरफ है। अब चूंकि अतुल प्रधान ने पूर्व विधायक योगेश वर्मा को सपा ज्वॉइन करा दी है, तो मामला गंभीर हो गया है। योगेश वर्मा के आने से प्रशांत गौतम की पैरवी कमजोर हुई है। क्योंकि प्रशांत गौतम जब बसपा से चुनाव लड़े थे, तो तीसरे नंबर पर रहे थे। योगेश वर्मा वह चुनाव पीस पार्टी से लड़ते हुए बहुत कम अंतर से सपा प्रत्याशी प्रभुदयाल वाल्मीकि से हारे थे। 
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मवाना में 23 मार्च को होने वाली अखिलेश यादव की जनसभा विधानसभा चुनाव की दावेदारी से जोड़कर ही देखी जा रही है। इस जनसभा का जिम्मा भी अतुल प्रधान और योगेश वर्मा पर है। ऐसे में दूसरे गुटों के नेता अपने अपने दावेदारों की स्थिति को लेकर अंदरखाने रैली को स्थगित कराने में लगे थे। तीन दिन पहले जैसे ही रैली स्थगित होने की सूचना हुई तो अतुल प्रधान खेमे को छोड़कर बाकी सबने राहत की सांस ली। सूत्रों की मानें तो अतुल प्रधान और योगेश वर्मा रात में ही लखनऊ रवाना हुए और अखिलेश यादव से मुलाकात कर भारी भीड़ का वादा करते हुए कार्यक्रम पर फिर से मुहर लगवा लाए।

अब सभी गुट रैली में भीड़ जुटाने के लिए जनसंपर्क में लगे हैं। रैली में आने वाली भीड़ पर अतुल और योगेश दोनों का ही भविष्य टिका है। यदि रैली सफल रही तो एक बार फिर से अतुल प्रधान अपनी पार्टी में ही विरोधियों को फिर से चित करने में सफल होंगे। लेकिन यदि रैली सफल नहीं रही, तो यह उनके लिए ही नहीं सपा में हस्तिनापुर से चुनाव लड़ने की चाहत में शामिल हुए योगेश वर्मा के लिए भी झटका होगा।

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