खास खबर: रिटायरमेंट के बाद नहीं किया बेघर, पुलिस बेजुबानों की कर रही पूरी देखभाल
मेरठ से खास खबर : रिटायरमेंट के बाद भी बेजुबानों को बेघर नहीं किया गया। खास बात है कि पुलिस बेजुबानों की पूरी देखभाल कर रही है।
विस्तार
मेरठ जनपद में पुलिस लाइन स्थित घुड़शाला में 16 में से 10 घोड़े रिटायर हो चुके हैं और उनसे ड्यूटी भी नहीं कराई जा रही लेकिन, पुलिस ने उन्हें बेघर नहीं किया, बल्कि दिन-रात उनकी सेवा की जा रही है। उनकी डाइट भी कम नहीं की गई है और उनके स्वास्थ्य की भी पूरी देखभाल की जा रही है।
नियमानुसार, तीन-चार साल के घोड़े के बच्चे को घुड़शाला में लाया जाता है। करीब छह महीने तक ट्रेनिंग के बाद सार्वजनिक स्थानों पर नियमित गश्त से लेकर मेले व वीआईपी कार्यक्रम में घोड़ों की ड्यूटी लगाई जाती है। 20 साल की उम्र होने के बाद दस्तावेजों में घोड़े को रिटायर कर दिया जाता है। लेकिन रिटायरमेंट के बाद भी मेरठ पुलिस लाइन की घुड़शाला में 10 घोड़ों की देखभाल में कोई कमी नहीं रखी जा रही है।
चेतक से लेकर चंपक और जौहरी भी बेड़े में शामिल
जिस तरह से पुलिस के जवान का बेल्ट नंबर होता है। उसी तरीके से घोड़ों की पहचान के लिए उनके नाम और क्रमांक नंबर भी होते हैं। फिलहाल घुड़शाला में 13 घोड़े और तीन घोड़ी हैं। इनके नाम हीरा, उज्ज्वल, रैपिड, चंपक, राजा, अर्जुन, विराट, हंस, चेतक, जौहरी, बेंदला, महम, बिपाशा और जूली आदि हैं।
यह भी पढ़ें: UP: बारिश से फसलों को भारी नुकसान, गांवों में छाया अंधेरा और यातायात भी प्रभावित, अब ओलावृष्टि के आसार
बिपाशा, जूली और महक नहीं कर रही ड्यूटी
हाल ही में पुलिस महकमे ने बेड़े में 75 घोड़े शामिल किए हैं। लखनऊ, कानपुर, सीतापुर में 20-20 और मुरादाबाद को 15 घोड़े मिले हैं। मुरादाबाद और सीतापुर के घोड़ों को ट्रेनिंग देने के लिए मेरठ घुड़शाला से कई जवान गए हैं। ऐसे में स्टाफ की कमी के कारण फिलहाल बिपाशा, जूली और महक ड्यूटी नहीं कर रही।
यह भी पढ़ें: अमेरिका में मौत: BJP नेता के परिवार पर टूटा गमों का पहाड़, इकलौते बेटे के अंतिम दर्शन नहीं कर पांएगे माता-पिता
मेरठ घुड़शाला से ही पश्चिमी यूपी के अन्य जिलों में घोड़े भेजे जाते हैं। कुछ घोड़े बूढ़े हो चुके हैं। जिस घोड़े ने पुलिस महकमे के लिए 20 साल ड्यूटी की उसे उम्र के आखिरी पड़ाव में बेघर नहीं कर सकते। पहले की तरह ही उनकी सेवा की जाती है। - जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी यातायात