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यूपी पुलिस से बड़ी चूक, ऐसे फरार हुआ 135 किलो का बंदी, एम्स से चल रहा था इलाज

Mon, 12 Aug 2019 06:46 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Mon, 12 Aug 2019 06:46 PM IST
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Meerut news: Investigation start by SSP Ajay Sahani after captive escaped from Police custody
एसएसपी अजय साहनी - फोटो : अमर उजाला

मेरठ पुलिस की कस्टडी से शनिवार को फरार हुए बंदी मनोज अरोड़ा के शरीर के वजन से पुलिस गच्चा खा गई। दावा किया गया कि जेल जाते वक्त मनोज अरोड़ा का वजन करीब 178 किलो था, जबकि फरारी के वक्त वह 135 किलो का था। जिस इनोवा से मनोज फरार हुआ, वह हरियाणा के सिरसा से बरामद की गई है। वहीं, इस मामले में जेल प्रशासन की भूमिका भी संदिग्ध है। पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच चल रही है। जिसमें एम्स के लिए रेफर करने वाले डॉक्टर पर भी एसएसपी ने जांच की बात कही है। 

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नोएडा निवासी मनोज अरोड़ा मेरठ जेल में बंद था। टैक्स चोरी के मामले में आरोपी है। मनोज की तबीयत खराब होने के चलते मेरठ पुलिस लाइन में तैनात हेड कांस्टेबल ज्वाला सिंह, कांस्टेबल अरुण कुमार और संदीप कुमार उसे एम्स दिल्ली लेकर गए थे। लेकिन मनोज अरोड़ा तीनों पुलिसकर्मियों को झांसा देकर इनोवा गाड़ी से फरार हो गया था। 
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एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि मनोज अरोड़ा शातिर किस्म का है, जिसे शुगर, हार्ट की बीमारी है। सितंबर 2017 में मनोज अरोड़ा की शराब पार्टी की एक वीडियो भी वायरल हुई थी। बाद में नोएडा में वीडियो वायरल होने के प्रकरण में तीन सिपाही भी निलंबित हुए थे। मनोज जब जेल गया था तो उसका वजन 178 किलो था।

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जेल प्रशासन ने मौजूद समय में उसका जवन 135 किलो बताया। पुलिस की जांच में सामने आया कि अधिक वजन होने के चलते वह डॉक्टर, जेल प्रशासन और सिपाहियों के सामने बिलखकर खुद को बीमार बताता था। एसएसपी का कहना है कि जो इनोवा साल 2017 में जांच में सामने आई थी, इसी इनोवा से वह दिल्ली में एम्स के बाहर से शनिवार को फरार हुआ है। इनोवा को सिरसा से बरामद कर जांच शुरू कर दी गई है।

ऐसी कौन सी बीमारी जो इलाज नहीं हुआ
एसएसपी ने बताया कि बंदी को ऐसी कौन सी बीमारी है, जो दो साल से एम्स का इलाज चल रहा था। बंदी मनोज को स्टेंट पड़ने थे। एम्स में स्टेंट पड़ने में 12 घंटे लगते हैं। लेकिन डॉक्टर से सेटिंग कर एम्स में इलाज कराने के बहाने मौज मस्ती करता था। एसएसपी का कहना है कि इस मामले में जेल के कई कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है। तीनों पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की रिपोर्ट जहां भेजी जा रही है। वहीं डॉक्टर व जेल कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ट्रेन से नहीं इनोवा से लेकर जाती थी पुलिस
एसएसपी का कहना है कि पुलिसकर्मी जहां बताते थे कि उसे जेल से ट्रेन से एम्स में लाया ले जाता था। लेकिन पुलिस की जांच में सामने आया कि पुलिसकर्मी ट्रेन की बात कहकर उसी की इनोवा में लाते ले जाते थे। जेल से निकलने के बाद मनोज पुलिस कस्टडी में मोबाइल से भी बात करता था। इसमें भी पुलिस की लापरवाही सामने आई है। 

गिरी थी गाज 
इसी बंदी की नोएडा में शराब पार्टी की वीडियो वायरल होने पर मेरठ जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक संतलाल यादव पर भी गाज गिर चुकी है। जो एम्स में भी मोबाइल से बात करता था।

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