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परीक्षा सिर पर, कक्ष निरीक्षक तय नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Tue, 09 Feb 2016 02:09 AM IST
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यूपी बोर्ड परीक्षाएं सिर पर हैं, लेकिन अभी तक कक्ष निरीक्षक और केंद्र व्यवस्थापक फाइनल नहीं हुए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने केंद्र व्यवस्थापक के तौर पर शिक्षक उपलब्ध कराने से हाथ खड़ा कर दिए हैं। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही हैं कि इस बार चपरासी से लेकर क्लर्क तक को कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी निभानी पड़ सकती है। ऐसे में नकल विहीन परीक्षा कराने की कोई गारंटी नहीं है।
18 फरवरी से शुरू होने वाले परीक्षाओं के लिए जिले में 140 केंद्र बनाए गए हैं। एक लाख चार हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। करीब छह हजार कक्ष निरीक्षकों की जरूरत है। बीते सालों में ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षकों की संख्या माध्यमिक शिक्षा विभाग में चार से साढ़े चार हजार के बीच में ही बैठ रही है।
अब बाकी शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए डीआईओएस ने बीएसए को पत्र लिखकर शिक्षक मांगे हैं, लेकिन वहां पर भी 14 मार्च से बेसिक स्कूलों में परीक्षाएं शुरू होनी हैं। उधर शासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यूपी बोर्ड परीक्षाओं में बेसिक के शिक्षकों को न लगाया जाए।
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क्योंकि उससे बेसिक के विद्यालयों का शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। डीआईओएस के सामने दिक्कत खड़ी हो गई है कि आखिरकार कक्ष निरीक्षकों की कमी को कहां से पूरा किया जाए। वित्त विहीन विद्यालयों से शिक्षक लेने पर भी विचार किया जा रहा है।
बड़ी ड्यूटी के लिए मांगे शिक्षक
बेसिक शिक्षा विभाग के सख्त रुख के बीच डीआईओएस ने मांग रखी है कि बेसिक के शिक्षकों की ड्यूटी चुनिंदा परीक्षाओं में ही लगाई जाए। बड़े एग्जाम में बेसिक के शिक्षक उपलब्ध करा जाएं। हाईस्कूल में पांच प्रश्न पत्र और इंटरमीडिएट में नौ प्रश्न पत्रों के लिए कक्ष निरीक्षक मांगे गए हैं।
आठ सचल दल और 23 सेक्टर मजिस्ट्रेट
डीआईओएस ने निगरानी के लिए आठ सचल दल व 23 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए हैं, जो परीक्षा के दौरान निगरानी रखेंगे।
बुधवार को दी जाएगी ट्रेनिंग
कक्ष निरीक्षक फाइनल हुए बिना है डीआईओएस ने बुधवार को हावर्ड प्लस्टर्ड में सुबह 11 बजे ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया है। इसमें प्रत्येक केंद्र व्यवस्थापक को बीएसएनएल का सिम दिया जाएगा। सिम के माध्यम से एंड्रायड फोन पर माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी एप डाउन लोड करना होगा।
परीक्षा में उपस्थित व अनुपस्थित रहने वाले छात्रों का ब्योरा प्रतिदिन बोर्ड को भेजना होगा। डीआईओएस श्रवण कुमार यादव ने कहा कि जल्द ही कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी फाइनल कर ली जाएगी। इसकी तैयारियां चल रही हैं।
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18 फरवरी से शुरू होने वाले परीक्षाओं के लिए जिले में 140 केंद्र बनाए गए हैं। एक लाख चार हजार से अधिक छात्र परीक्षा देंगे। करीब छह हजार कक्ष निरीक्षकों की जरूरत है। बीते सालों में ड्यूटी पर लगाए गए शिक्षकों की संख्या माध्यमिक शिक्षा विभाग में चार से साढ़े चार हजार के बीच में ही बैठ रही है।
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अब बाकी शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए डीआईओएस ने बीएसए को पत्र लिखकर शिक्षक मांगे हैं, लेकिन वहां पर भी 14 मार्च से बेसिक स्कूलों में परीक्षाएं शुरू होनी हैं। उधर शासन पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि यूपी बोर्ड परीक्षाओं में बेसिक के शिक्षकों को न लगाया जाए।
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क्योंकि उससे बेसिक के विद्यालयों का शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। डीआईओएस के सामने दिक्कत खड़ी हो गई है कि आखिरकार कक्ष निरीक्षकों की कमी को कहां से पूरा किया जाए। वित्त विहीन विद्यालयों से शिक्षक लेने पर भी विचार किया जा रहा है।
बड़ी ड्यूटी के लिए मांगे शिक्षक
बेसिक शिक्षा विभाग के सख्त रुख के बीच डीआईओएस ने मांग रखी है कि बेसिक के शिक्षकों की ड्यूटी चुनिंदा परीक्षाओं में ही लगाई जाए। बड़े एग्जाम में बेसिक के शिक्षक उपलब्ध करा जाएं। हाईस्कूल में पांच प्रश्न पत्र और इंटरमीडिएट में नौ प्रश्न पत्रों के लिए कक्ष निरीक्षक मांगे गए हैं।
आठ सचल दल और 23 सेक्टर मजिस्ट्रेट
डीआईओएस ने निगरानी के लिए आठ सचल दल व 23 सेक्टर मजिस्ट्रेट तैनात किए हैं, जो परीक्षा के दौरान निगरानी रखेंगे।
बुधवार को दी जाएगी ट्रेनिंग
कक्ष निरीक्षक फाइनल हुए बिना है डीआईओएस ने बुधवार को हावर्ड प्लस्टर्ड में सुबह 11 बजे ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया है। इसमें प्रत्येक केंद्र व्यवस्थापक को बीएसएनएल का सिम दिया जाएगा। सिम के माध्यम से एंड्रायड फोन पर माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी एप डाउन लोड करना होगा।
परीक्षा में उपस्थित व अनुपस्थित रहने वाले छात्रों का ब्योरा प्रतिदिन बोर्ड को भेजना होगा। डीआईओएस श्रवण कुमार यादव ने कहा कि जल्द ही कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी फाइनल कर ली जाएगी। इसकी तैयारियां चल रही हैं।