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महिला इंस्पेक्टर नरगिस पर गिरी गाज
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 28 Feb 2016 01:31 AM IST
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तमाम विवादों से घिरी महिला थाना इंस्पेक्टर नरगिस खान पर आखिरकार गाज गिर ही गई। शुक्रवार को हमराह के हाथों जूता पहनने का वीडियो वायरल हुआ तो डीजीपी ने इसका संज्ञान ले लिया। एसएसपी को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दे दिए।
जिस पर एसएसपी ने इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया। एसएसआई बबीता तोमर को कार्यवाहक थानाध्यक्ष बनाया गया है।
एसएसपी ने इंस्पेक्टर नरगिस खान को 25 अगस्त 2015 महिला थाने का चार्ज सौंपा गया। इंस्पेक्टर पर लावारिस बच्ची लक्ष्मी को भीख मंगवाने के आरोपियों को सौंपना, महिला थाने में ‘तारीख’ की बोली के अलावा शिकायत न सुनने के आरोप लगे।
तत्कालीन आईजी जोन आलोक शर्मा और तत्कालीन डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार ने कई बार इंस्पेक्टर को बुलाकर स्पष्टीकरण भी मांगा। उसके बावजूद उनकी कुर्सी नहीं हिली। शुक्रवार को रिटायर इंस्पेक्टर की विवाहिता बेटी शिकायत करने एसएसपी ऑफिस पहुंची थी।
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महिला इंस्पेक्टर पर थाने में धमकाने का आरोप लगाते समय वह एसएसपी के सामने बेहोश हो गई थी।
जिसके बाद एसएसपी ने इंस्पेक्टर नरगिस खान को बुलाया गया। पीड़ित महिला को वहां से ले जाते समय इंस्पेक्टर पैर फिसलने से गिर पड़ी थी।
इस दौरान इंस्पेक्टर पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने हमराह कांस्टेबिल अमन चौधरी से जूता पहनवाया। यह मामला दिन भर टीवी चैनलों पर चला। जिसे देखते ही डीजीपी जावीद अहमद के निर्देश पर एसएसपी डीसी दूबे ने इंस्पेक्टर नरगिस खान को लाइन हाजिर कर दिया।
फरमान पर बदली थ्योरी
एसएसपी डीसी दूबे ने शनिवार दिन में बताया कि जब इंस्पेक्टर नरगिस खान जमीन पर गिरी थी तो आईपीएस प्रशांत वर्मा और सीओ वंदना मिश्रा भी वहां मौजूद थे।
नरगिस दर्द से कराह रही थी। जिस पर सिपाही ने दोनों अफसरों के सामने उसका पैर पकड़कर देखा था। जूता पहनाने की बात गलत है। लेकिन शाम को डीजीपी का फरमान आते ही एसएसपी ने नरगिस को लाइन हाजिर कर दिया।
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जिस पर एसएसपी ने इंस्पेक्टर को लाइन हाजिर कर दिया। एसएसआई बबीता तोमर को कार्यवाहक थानाध्यक्ष बनाया गया है।
एसएसपी ने इंस्पेक्टर नरगिस खान को 25 अगस्त 2015 महिला थाने का चार्ज सौंपा गया। इंस्पेक्टर पर लावारिस बच्ची लक्ष्मी को भीख मंगवाने के आरोपियों को सौंपना, महिला थाने में ‘तारीख’ की बोली के अलावा शिकायत न सुनने के आरोप लगे।
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तत्कालीन आईजी जोन आलोक शर्मा और तत्कालीन डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार ने कई बार इंस्पेक्टर को बुलाकर स्पष्टीकरण भी मांगा। उसके बावजूद उनकी कुर्सी नहीं हिली। शुक्रवार को रिटायर इंस्पेक्टर की विवाहिता बेटी शिकायत करने एसएसपी ऑफिस पहुंची थी।
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महिला इंस्पेक्टर पर थाने में धमकाने का आरोप लगाते समय वह एसएसपी के सामने बेहोश हो गई थी।
जिसके बाद एसएसपी ने इंस्पेक्टर नरगिस खान को बुलाया गया। पीड़ित महिला को वहां से ले जाते समय इंस्पेक्टर पैर फिसलने से गिर पड़ी थी।
इस दौरान इंस्पेक्टर पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने हमराह कांस्टेबिल अमन चौधरी से जूता पहनवाया। यह मामला दिन भर टीवी चैनलों पर चला। जिसे देखते ही डीजीपी जावीद अहमद के निर्देश पर एसएसपी डीसी दूबे ने इंस्पेक्टर नरगिस खान को लाइन हाजिर कर दिया।
फरमान पर बदली थ्योरी
एसएसपी डीसी दूबे ने शनिवार दिन में बताया कि जब इंस्पेक्टर नरगिस खान जमीन पर गिरी थी तो आईपीएस प्रशांत वर्मा और सीओ वंदना मिश्रा भी वहां मौजूद थे।
नरगिस दर्द से कराह रही थी। जिस पर सिपाही ने दोनों अफसरों के सामने उसका पैर पकड़कर देखा था। जूता पहनाने की बात गलत है। लेकिन शाम को डीजीपी का फरमान आते ही एसएसपी ने नरगिस को लाइन हाजिर कर दिया।