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3500 करोड़ की फर्जी बिलिंग : मेरठ और गाजियाबाद के 11 ठिकानों पर छापा, मास्टरमाइंड हिरासत में

Sat, 06 Mar 2021 12:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 06 Mar 2021 12:57 AM IST
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Meerut news: Disclosure of fake billing of 3500 crores
जीएसटी

जीएसटी चोरों के खिलाफ चल रहे अभियान में सीजीएसटी मेरठ ने 3500 करोड़ से ज्यादा की फर्जी बिलिंग का खुलासा किया है। विभाग के अनुसार इस मामले में आठ लोगों को गिरफ्तार कर 2.50 करोड़ नकदी बरामद की जा चुकी है। पिछले एक साल में 34.5 करोड़ से अधिक की जीएसटी सरकारी खाते में जमा कराई जा चुकी है।

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प्रधान आयुक्त केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर कार्यालय के अनुसार यह मामला भवन निर्माण सामग्री आदि से संबंधित करीब 200 करोड़ की फर्जी इनवाइस जारी करने से जुड़ा है। इस मामले में मेरठ और गाजियाबाद में 11 जगहों पर छापा मारकर 42 करोड़ रुपये की हेराफेरी पकड़ी गई। 
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इस सिंडिकेट के मास्टर माइंड विकास जैन ने फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) जारी कर भवन निर्माण आदि से संबंधित 200 करोड़ की फर्जी इनवाइस जारी की थी। विकास मेरठ में 30 से ज्यादा रजिस्टर्ड फर्म चला रहा था। छापा मारकर इन फर्मों से संबंधित अहम दस्तावेज, जारी इनवाइस, फर्जी फर्म से संबंधित चेकबुक और करीब 2.23 करोड़ रुपये बरामद किए गए। आरोपी विकास को तीन फरवरी 2021 को आर्थिक अपराध न्यायालय मेरठ में पेश किया गया था। वह अभी तक न्यायिक हिरासत में है।
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फर्मों का नहीं था कोई अस्तित्व
इस केस से संबंधित आगे की कार्रवाई में 30 जाली फार्मों के रजिस्टर्ड पतों पर छापा मारा गया, लेकिन किसी भी फर्म का अस्तित्व नहीं मिला। विकास जैन ने फर्जी फर्म के रजिस्ट्रेशन के लिए लोगों के अहम दस्तावेजों का दुरुपयोग किया था। मेरठ और गाजियाबाद की बहुत सी फर्म ऐसी हैं जिन्होंने फर्जी फर्मोँ के जारी की गई इनवाइसों के आधार पर फर्जी आईटीसी लिया। इन फर्मों की जांच चल रही है।


एमडी ने 25.53 करोड़ जमा कराए
विकास जैन की फर्जी फर्मों की मदद से आईटीसी का सर्वाधिक लाभ लेने वाली एक कंपनी के प्रबंध निदेशक के बयान दर्ज किए गए। इस कंपनी द्वारा 25.53 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी का लाभ लिया गया। उक्त कंपनी के प्रबंध निदेशक को चार मार्च 2021 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। अदालत की कार्यवाही के दौरान प्रबंध निदेशक ने फर्जी आईटीसी का लाभ उठाना स्वीकार कर सरकारी खाते में 25.53 करोड़ रुपये जमा कराए। कोर्ट ने 5-5 लाख के मुचलकों पर, पासपोर्ट जमा कराने और तीन माह में बची हुई ब्याज और जुर्माने की राशि जमा करने की शर्तों पर आरोपी को शुक्रवार को जमानत दी है।

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