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वीरों के शौर्य की गाथा: कई गोलियां लगीं... फिर भी योगेंद्र सिंह ने दुश्मन को किया नेस्तनाबूद

Fri, 22 Nov 2019 06:36 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 22 Nov 2019 06:36 PM IST
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Meerut News, Despite being injured, the army officers Yogendra and Chetan killed the terrorists
योगेंद्र सिंह यादव और चेतन चीता - फोटो : अमर उजाला

ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव (वर्तमान सूबेदार मेजर) का जन्म 10 मई 1980 को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद अहिर गांव में हुआ था। उनके पिता करण सिंह यादव ने 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्धों में भाग लेकर कुमाऊं रेजिमेंट में सेवा की थी। यादव 16 साल और 5 महीने की उम्र में ही भारतीय सेना में शामिल हो गए थे। 

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बता दें कि ग्रेनेडियर यादव 18 ग्रेनेडियर्स के साथ कार्यरत कमांडो प्लाटून घातक का हिस्सा थे। इसको चार जुलाई 1999 के शुरुआती घंटों में टाइगर हिल पर तीन बंकरों पर कब्जा करने के लिए भेजा गया था। बंकर बर्फ से ढकी हुई 1000 फीट ऊंची चट्टान के शीर्ष पर थे। योगेंद्र यादव प्लाटून के साथ रस्सियों के सहारे चट्टान की तरफ बढ़ रहे थे कि आधे रस्ते में एक दुश्मन ने बंकर से मशीन गन और रॉकेट फायर खोल दिया। जिसमे प्लाटून कमांडर और दो अन्य शहीद हो गए।
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अपने गले और कंधे में तीन गोलियों के लगने के बावजूद वे 60 फीट चढ़कर ऊपर पहुंच गए। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वह पहले बंकर में घुस गए और ग्रेनेड से चार पाकिस्तानी सैनिकों को उड़ा दिया। उसके बाद उन्होंने अपने दो साथी सैनिकों के साथ दूसरे बंकर पर हमला किया और चार पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। प्लाटून टाइगर हिल पर कब्जा करने में सफल रही।

नौ गोलियां खाकर भी चेतन ने आतंकियों को नहीं छोड़ा
कीर्ति चक्र विजेता चेतन चीता केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के कमांडिंग ऑफिसर हैं। चेतन चीता कोटा के रहने वाले हैं। सीआरपीएफ के 45 वर्षीय कमांडिंग ऑफिसर की टीम की 14 फरवरी 2018 को उत्तर-कश्मीर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ हो गई। नौ गोलियां लगने के बाद बुरी तरह से घायल चेतन ने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकवादी कमांडर अबू हारिस को ढेर कर दिया। वे काफी समय तक कोमा में रहे, लेकिन एक साल के अंदर ही उन्होंने ड्यूटी ज्वॉइन कर ली।

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