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कोरोना का असर: पहली बार दिवाली की खुशियों पर अवसाद की छाया, पढ़िए खास रिपोर्ट

Fri, 13 Nov 2020 05:54 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 13 Nov 2020 05:54 PM IST
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Meerut News: Corona effect is seen on Diwali festival in this year
दिवाली - फोटो : Pixabay

रोशनी के पर्व दिवाली पर पिछले साल तक हर ओर खुशी का माहौल होता था। इस बार भी बाजार में भीड़भाड़ और हलचल है मगर खुशी की लहरें मद्धिम हैं। कोरोना के कारण आठ महीनों से नकारात्मकता में गुजरती जिंदगी इसकी सबसे बड़ी वजह है। महामारी ने जनमानस के उत्साह में जंग लगा दी है। तनाव और अवसाद से जूझ रहे हर व्यक्ति के मन में उदासी है। लगता है कि इसकी रस्म अदायगी भर ही की जा रही है। सामाजिक दूरी के लिए पहले जैसे मेले और आयोजन भी नहीं हुए हैं। 

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करवाचौथ से ही झालरों से जगमगाने वाली कॉलोनियों में इस बार चुनिंदा घर ही रोशनी है। यही नहीं, दिवाली के एक माह पहले शुरू होने वाला साफ-सफाई और रंगाई-पुताई का काम भी इस बार कामचलाऊ है। आशियाने को पेंट के नए रंगों से सजाने के लिए सालभर जिस दिवाली का इंतजार होता था, तो इस बार कई ने इसकी योजना ही नहीं बनाई। कोरोना ने लोगों को अदृश्य अवसाद और आशंकाओं से भर दिया है। 
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दरअसल, या तो किसी के किसी प्रियजन के चले जाने का बिछोह सता रहा है या फिर लंबे इलाज और जद्दोजहद के बाद वह इसके संत्रास से अभी तक मुक्त ही नहीं हो सका है।
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दुकानों पर उमड़ने वाली भीड़ डरे-सहमे भाव से खरीदारी कर रही है। त्योहार पर खरीदारी तो करनी है लेकिन भीड़ के बीच हर आदमी दूसरे को आशंका के भाव से ही देख रहा है। दुकानदार भी लॉकडाउन में स्टाक किया हुआ माल बेच रहे हैं। त्योहार के लिए खास तैयारी ज्यादातर दुकानों ने नहीं की है। खरीदारों से लेकर दुकानदारों को भय है कि कहीं इस त्योहार के बाद संक्रमण और न बढ़ जाए। ऐसे में जिंदगी को दांव पर लगाना ठीक नहीं होगा।
  
घरों के रंग-रोगन के बारे में उप्र व उत्तराखंड पेंट व्यापार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता कहते हैं कि इस बार पेंट, डिस्टेंपर का कारोबार पिछले सालों के मुकाबले पचास फीसद रहा। जिन लोगों ने प्री बुकिंग कराई थी, उन्होंने भी पैसा न होने या दूसरे कारणों से पुताई कराने का प्लान कैंसिल कर दिया। रोशनी को लेकर भी उत्साह हर साल जैसा नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक लड़ियों के विक्रेता श्याम कुमार कहते हैं कि हर साल दिवाली से डेढ़ महीने पहले झालर-लाइटिंग की बुकिंग और बिक्री शुरू हो जाती थी। इस साल दिवाली के 10 दिन पहले दुकान सजाई है। ग्राहक भी कम आए हैं।  

अप्रिय घटनाओं ने बढ़ाई नकारात्मकता: डॉ. लता 
समाजशास्त्री डॉ. लता कुमार कहती हैं कि हर इंसान दुखी है। त्योहार की औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। मार्च से अब तक हर कॉलोनी, गली-मोहल्ले में लोग कोरोना पॉजिटिव हुए। परिवार स्वयं नहीं तो पड़ोस में कोई कोरोना पॉजिटिव है। कहीं रिश्तेदार, दोस्त और बहुत नजदीक में कोरोना पॉजिटिव आए। कई अपने दुनिया को छोड़कर चले गए। आर्थिक स्थिति बहुत खराब हुई तो ये सारी नकारात्मकता हर इंसान के मन में है। हर इंसान अपने और अपनों के दुख से दुखी है। मार्च से अब तक हर किसी को बहुत कम ऐसे अवसर मिले जब लोग बाहर घूमने गए हों। साथ मिलकर त्योहार मनाए हों और आपस में मिलना-जुलना हुआ है। केवल अप्रिय घटनाएं हुई। यही घटनाएं अवसाद बन गई हैं, जिसका असर त्योहार और इससे जुड़े हर सेगमेंट पर है।

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