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मेरठ: मेडिकल कॉलेज में एमआरआई मशीन का पाइप फटा, हीलियम गैस लीक; एक महीने तक जांच ठप रहने की आशंका
Fri, 02 Oct 2026 12:04 AM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: Mohd Mustakim
Updated Fri, 02 Oct 2026 12:04 AM IST
सार
मेडिकल कॉलेज में लगी एमआरआई मशीन करीब 10 साल पुरानी है और पहले भी खराब हो चुकी है। अब फिर से इसका पाइप फटने से गरीब और गंभीर रूप से बीमार या घायल मरीजों के सामने समस्या खड़ी हो गई है।
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मेरठ मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लाला लाजपत राय स्मारक मेडिकल कॉलेज में एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging) जांच की सुविधा फिलहाल बंद हो गई है। मशीन के पाइप में पिछले कुछ दिनों से लीकेज की समस्या थी, जिसके चलते यहां एमआरआई नहीं हो पा रही थी। बृहस्पतिवार को अचानक पाइप फट गया और उसमें मौजूद पूरी हीलियम गैस लीक हो गई। तकनीकी खराबी के कारण अब मेडिकल कॉलेज में कम से कम एक महीने तक एमआरआई जांच प्रभावित रहने की आशंका है। मेडिकल कॉलेज में रोजाना 15 से 20 मरीज एमआरआई जांच के लिए पहुंचते हैं। सेवा बंद होने से मेरठ के साथ आसपास के जिलों से आने वाले मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
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10 साल पुरानी है एमआरआई मशीन
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में लगी एमआरआई मशीन करीब 10 साल पुरानी है। मशीन में लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को सुरक्षित तापमान पर बनाए रखने के लिए उसे लगातार ठंडा रखना जरूरी होता है। इसके लिए तरल हीलियम गैस का इस्तेमाल किया जाता है। पिछले कुछ दिनों से मशीन के पाइप में हल्की लीकेज की समस्या सामने आ रही थी। बृहस्पतिवार को पाइप फटने के बाद हीलियम गैस तेजी से बाहर निकल गई और मशीन बंद हो गई। इसके बाद एमआरआई जांच की सुविधा पूरी तरह ठप हो गई।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में लगी एमआरआई मशीन करीब 10 साल पुरानी है। मशीन में लगे सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट को सुरक्षित तापमान पर बनाए रखने के लिए उसे लगातार ठंडा रखना जरूरी होता है। इसके लिए तरल हीलियम गैस का इस्तेमाल किया जाता है। पिछले कुछ दिनों से मशीन के पाइप में हल्की लीकेज की समस्या सामने आ रही थी। बृहस्पतिवार को पाइप फटने के बाद हीलियम गैस तेजी से बाहर निकल गई और मशीन बंद हो गई। इसके बाद एमआरआई जांच की सुविधा पूरी तरह ठप हो गई।
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गरीब और गंभीर मरीजों पर पड़ेगा ज्यादा असर
मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में मेरठ और आसपास के जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें गरीब और गंभीर मरीज भी शामिल होते हैं। एमआरआई सेवा बंद रहने के कारण इन मरीजों को अब जांच के लिए दूसरे सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
वहीं, जिन मरीजों को सरकारी स्तर पर जांच की सुविधा नहीं मिल पाएगी, उन्हें निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में एमआरआई करानी पड़ सकती है। निजी केंद्रों पर जांच कराने में मरीजों को अधिक खर्च उठाना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एमआरआई सेवा को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में बड़ी संख्या में मेरठ और आसपास के जिलों से मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें गरीब और गंभीर मरीज भी शामिल होते हैं। एमआरआई सेवा बंद रहने के कारण इन मरीजों को अब जांच के लिए दूसरे सरकारी अस्पतालों का रुख करना पड़ सकता है।
वहीं, जिन मरीजों को सरकारी स्तर पर जांच की सुविधा नहीं मिल पाएगी, उन्हें निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों में एमआरआई करानी पड़ सकती है। निजी केंद्रों पर जांच कराने में मरीजों को अधिक खर्च उठाना पड़ेगा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि एमआरआई सेवा को जल्द से जल्द बहाल करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मरम्मत और हीलियम गैस की व्यवस्था में लगेगा एक महीना
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.सी. गुप्ता ने बताया कि मशीन को दोबारा शुरू करने के लिए हीलियम गैस की व्यवस्था करनी होगी। इसके साथ ही मशीन की तकनीकी मरम्मत और उसे सुरक्षित तरीके से दोबारा चालू करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें कम से कम एक महीने का समय लग सकता है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने संबंधित रखरखाव कंपनी को पत्र भेजकर हीलियम गैस की जल्द से जल्द उपलब्धता सुनिश्चित करने और मरम्मत का काम तत्काल शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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