मेरठ के सौरभ राजपूत की हत्या का कोई चश्मदीद गवाह नहीं था। ऐसे में इस केस को न्यायालय में साबित करना आसान नहीं था। पुलिस की जांच और जुटाए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों अटूट कड़ियों को अभियोजन पक्ष ने पेश किया।
उनकी दलील बचाव पक्ष की चश्मदीद न होने व अन्य दलीलों पर भारी पड़ीं। खुलासे की बात करें तो पुलिस ने 54 दिन बाद आरोप पत्र दाखिल किया। लगभग 125 तारीखें लगीं। 22 गवाहों ने बयान दर्ज कराए। 560 दिन बाद दोनों को दोषी करार दिया।
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मुस्कान और साहिल की फाइल फोटो
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कैब चालक अजब सिंह ने बयान दिया कि वारदात को अंजाम देने के बाद मुस्कान और साहिल ने हिमाचल प्रदेश घूमने जाने के लिए ट्रैवल एजेंसी से चार मार्च 2025 को कैब बुक की थी। सफर के दौरान मुस्कान और साहिल सामान्य तरीके से बातें कर रहे थे।
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डीजी कोर्ट में सजा सुनाने के बाद कोर्ट से बाहर आते अधिवक्ता
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उनके चेहरे पर इतनी जघन्य वारदात को अंजाम देने का कोई डर या पछतावा नहीं था। वह होटल में चले जाते थे और चालक खाना खाकर कैब में सो जाता था।
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साहिल और मुस्कान को डीजी कोर्ट में सजा सुनाने के दौरान तैनात पुलिस
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मनाली, शिमला और कसौल के होटल के मैनेजरों ने सीसीटीवी फुटेज, रजिस्टर एंट्री आदि मुहैया कराते हुए पुष्टि की कि वह वारदात के बाद उनके होटल में ठहरे थे। उस दौरान दोनों के डांस करते हुए वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे।
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कोर्ट से बाहर आकर मीडिया को जानकारी देती मृतक सौरभ की मां व साथ में भाई
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जांच अधिकारी (विवेचक) ने अदालत में मेडिकल स्टोर संचालक, ड्रम व सीमेंट विक्रेता के बयान लेकर उनकी कोर्ट में भी गवाही कराई। टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियों के नोडल अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (सीडीआर) और टावर लोकेशन रिपोर्ट पेश करते हुए गवाही दी।