दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर भविष्य तलाश रहा एमडीए, इस क्षेत्र पर टिकी नजर, किसानों से उम्मीद
निर्माणाधीन मेरठ दिल्ली एक्सप्रेस-वे के आसपास मेरठ विकास प्राधिकरण कालोनियां विकसित करने की दिशा में सार्थक कदम उठा सकता है। इसके लिए 2019 को ध्यान में रखते हुए नियोजन विभाग को लगाने की तैयारी है, जो सर्वे कर रिपोर्ट देगा कि यहां आवासीय योजनाएं कितनी कामयाब हो सकती हैं।
प्राधिकरण ने लंबे समय से नई योजना पर काम नहीं किया है। पुरानी योजनाओं में ही इतने पेंच अटके हैं कि नई योजना पर बात शुरू नहीं हो पाती है। सबसे ज्यादा गंगानगर, लोहियानगर तथा वेदव्यासपुरी योजनाओं के विवादों ने प्राधिकरण की राह रोकी है। हालांकि अब किसानों को अतिरिक्त प्रतिकर देने पर सहमति के बाद इनका विवाद समाप्त हो रहा है।
उधर, शताब्दीनगर योजना सबसे ज्यादा उलझी है। यहां किसान नई भू अधिग्रहण नीति के हिसाब से मुआवजा मांग रहे हैं और पिछले चार साल से धरनारत हैं, लेकिन एमडीए कोई हल नहीं निकाल सका है। किसानों ने शासन मेें प्रत्यावेदन दिए थे कि उनकी जमीन वापस लौटा दी जाए, जो शासन ने खारिज कर दिए। ऐसे में यहां स्थिति विकट है।
एक्सप्रेस-वे पर भविष्य का दांव
एमडीए की निगाह अब एक्सप्रेस-वे पर है। दिल्ली से मेरठ के बीच एक्सप्रेस-वे का निर्माण पूरा करने के लिए मार्च 2019 तक का लक्ष्य तय कर दिया गया है। इसके आसपास एमडीए आवासीय क्षेत्र विकसित कर सकता है। सारा दारोमदार संभावनाओं पर टिका है। सर्वे में सकारात्मक रिपोर्ट आई तो एमडीए 2019 में यहां कालोनी विकसित करने की प्लानिंग कर सकता है। पहला फोकस आवासीय योजनाओं पर रही रहेगा।
मुआवजा के बजाए समझौता
नई योजनाओं में जमीन अधिग्रहण के लिए एमडीए को सबसे ज्यादा मुआवजा दर को लेकर मशक्कत करनी पड़ रही है। नई भू अधिग्रहण नीति के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट का चार गुना तथा शहरी क्षेत्र में दोगुना मुआवजे का प्रावधान है, जो कई जगह एमडीए को काफी महंगा लगता है और इसी कारण एमडीए का जोर समझौते पर है। किसानों से समझौता कर रेट तय कर लिए जाएं और उसी के हिसाब से मुआवजा दिया जाए। नई योजनाओं में भी इसी को प्राथमिकता देने की मंशा है।
सांकरपुर, घोसीपुर, चंदसारा, ढिकौली, हाजीपुर, खानपुर, नंगला पत्तू, नरहेड़ा, सलेमपुर, अमीनगर अच्छरौंडा बराल और परतापुर आदि गांवों से होकर एक्सप्रेस-वे गुजरेगा। एमडीए की निगाह परतापुर आसपास पर सबसे ज्यादा है। यहां अवैध कालोनियों का भी जाल फैल रहा है। पहले इन पर भी कार्रवाई करनी होगी।
कनेक्टिवटी बड़ी चुनौती
एक्सप्रेस-वे जमीन से लगभग दस फुट ऊंचाई पर बन रहा है। ऐसे में यहां गांवों से कनेक्टिवटी नहीं दी जा रही है। एमडीए को ऐसी जगह अपनी प्लानिंग करनी होगी, जहां से इंटरचेंज या अन्य कनेक्टिड रोड पास हो ताकि एक्सप्रेस वे तक लोग आसानी से पहुंच सकें।
पहले कार्रवाई करेंगे
परतापुर और आसपास के क्षेत्र में कालोनी की अपार संभावनाएं हैं। यहीं कारण है कि यहां अवैध कालोनी भी विकसित हो रही हैं। हम पहले इन पर कार्रवाई करेंगे। सेकेंड चरण में यहां आवासीय योजना की प्लानिंग पर काम होगा। -राजकुमार, सचिव एमडीए