Meerut: शहर में आज ठप रहेगा न्यायिक कामकाज, अधिवक्ताओं का बहिष्कार, हाईकोर्ट के आदेश पर विरोध
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को न्यायिक कार्य के बहिष्कार का निर्णय लिया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के विरोध में ऑनलाइन बैठक में यह फैसला लिया गया।
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अधिवक्ताओं ने शुक्रवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यह फैसला उच्च न्यायालय बेंच स्थापना केंद्रीय संघर्ष समिति पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ऑनलाइन बैठक में लिया गया। अधिवक्ताओं ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तीन जून 2026 के आदेश का विरोध करते हुए इसे अपनी स्वतंत्रता पर कुठाराघात बताया है।
ऑनलाइन बैठक में सर्वसम्मति से पारित हुए प्रस्ताव
बृहस्पतिवार को आयोजित ऑनलाइन बैठक की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष अनुज कुमार शर्मा ने की, जबकि संचालन संयोजक परवेज आलम ने किया। बैठक में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की विभिन्न बार संस्थाओं के पदाधिकारी शामिल हुए। सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से कई प्रस्ताव पारित किए और उच्च न्यायालय के आदेश की कड़ी निंदा की।
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मुख्य न्यायाधीश से मिलेगा प्रतिनिधिमंडल
बैठक में निर्णय लिया गया कि उच्च न्यायालय के आदेश के संबंध में समिति का एक प्रतिनिधिमंडल उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात करेगा। साथ ही प्रदेश स्तर पर अधिवक्ताओं के सम्मान और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर एक बड़े सम्मेलन के आयोजन की भी घोषणा की गई।
20 जून को तय होगी आगे की रणनीति
केंद्रीय संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश की आपात बैठक 20 जून 2026 को आयोजित की जाएगी। इस बैठक में आंदोलन की आगामी रणनीति पर चर्चा की जाएगी। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।
कई बार संस्थाओं के पदाधिकारी रहे मौजूद
बैठक में बिजनौर, गाजियाबाद, नोएडा, रामपुर, अमरोहा, सहारनपुर, मेरठ और बागपत सहित विभिन्न जनपदों की बार संस्थाओं के अध्यक्ष और महामंत्री शामिल हुए। सभी ने अधिवक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने की बात कही।