मेरठ : नगर निगम नहीं चलाएगा कमेला, हाउस टैक्स और सीवर में भ्रष्टाचार, 730 करोड़ के बजट प्रस्ताव पर हुई चर्चा
निगम के रिकॉर्ड के मुताबिक शहर के विकास, स्वच्छता और कर्मचारियों के वेतन पर सरकारी खजाने से सात माह में 515 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
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मेरठ नगर निगम कार्यकारिणी के पुनरीक्षित बजट बैठक में बुधवार को 730 करोड़ का बजट प्रस्ताव रखा गया। नगर निगम की कार्यकारिणी पुनरीक्षित बजट बैठक में कमेला, हाउस टैक्स और सीवर सफाई के मुद्दों पर कार्यकारिणी सदस्य और निगम अधिकारी आमने-सामने आ गए। कार्यकारिणी सदस्यों ने हाउस टैक्स के नाम पर जनता से अवैध वसूली करने और भ्रष्टाचार करने के आरोप लगाए। सीवर लाइन की सफाई न होने और फर्जी तरीके से कंपनी के बिल पास करने के भी आरोप जड़ दिए, जिस पर नगर आयुक्त ने जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया। साथ ही मेरठ में नगर निगम द्वारा किसी भी कीमत पर कमेला चलाए जाने की भी बात कही। वहीं निगम एक्ट में संशोधन का भी हवाला दिया।
नगर निगम की तरफ से मुख्य वित्त एवं लेखाधिकारी संतोष शर्मा द्वारा 730 करोड़ 46 लाख के पुनरीक्षित बजट का प्रस्ताव रखा गया। जिस को सभी कार्यकारिणी सदस्यों ने सर्वसम्मति से पास कर दिया।
निगम कार्यकारिणी को लिखित बजट की बैठक टाउन हॉल के तिलक भवन में महापौर सुनीता वर्मा की अध्यक्षता और नगर आयुक्त मनीष बंसल के संचालन में शुरू हुई। जिसमें सबसे पहले कार्यकारिणी सदस्य गफ्फार अहमद ने शहर में हो रही मीट की आपूर्ति और नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। जिस पर नगर आयुक्त मनीष बंसल ने बताया कि निगम एक्ट में संशोधन करके स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगम किसी भी कीमत पर अब शहर में पशु वधशाला नहीं चलाएगा।
नगर आयुक्त के इस बयान पर भाजपा के कार्यकारिणी सदस्यों ने भी सहमति जताई। हालांकि गफ्फार ने कहा कि शहर में जिस प्रकार से दुकानों पर मीट बिक रहा है, इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायकों के निधि से शहर में कोई पैसा विकास कार्यों में खर्च नहीं किया जा रहा है फिर भी नगर निगम में सांसद और विधायकों के प्रस्तावों पर प्राथमिकता पर कार्य कराए जा रहे हैं। जो सीधे-सीधे पार्षदों के अधिकारों का हनन है। गफ्फार ने बस्तियों में भी विकास कार्य को नजरअंदाज करने के भीआरोप लगाए।
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इकरामुद्दीन वालिया ने कहा कि वार्ड 27 में 3 करोड़ रुपए से आरसीसी का नाला बनाया गया, जो बनते ही गिर गया है। उसकी जांच रिपोर्ट नगर निगम के अधिकारी सार्वजनिक करने को तैयार नहीं है। इस पर नगर आयुक्त ने चीफ इंजीनियर जसवंत कुमार को निर्देश दिया कि तत्काल जांच रिपोर्ट सामने लाई जाए, जो भी लापरवाही सामने आएगी उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अंशुल गुप्ता ने कहा कि सुभाष नगर नाले की सफाई बीच में ही छोड़ दी गई थी जिसके कारण आसपास घरों में नाले का गंदा पानी पहुंच रहा है।
टैक्स वसूली के नाम पर हो रही है दलाली
कार्यकारिणी सदस्य अनुज वशिष्ठ ने कहा कि अभी तक सभी वार्डों का जिया यह सर्वे नहीं हुए हैं फिर भी भवन स्वामियों को रिवाइज टैक्स नोटिस भेजने शुरू कर दिए गए हैं। एक तरफ जहां मोदी रबर फैक्ट्री पर करोड़ों रुपया बकाया है, जिसको नगर निगम के अधिकारी ने कहा कि साधारण भवन स्वामी पर निगम हाउस टैक्स भेज रहा है। उसके बाद उसको ठीक कराने के नाम पर मोटी वसूली हो रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि मोटेशन के नाम पर ली जा रही अधिक फीस को खत्म करने के लिए पूर्व की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास हो चुका है, लेकिन अभी भी उस पर कोई अमल नहीं किया जा रहा है। इस पर नगर आयुक्त ने कहा कि पास प्रस्ताव को शासन भेजा गया है। जिओ सर्विस के आधार पर जिन वादों का सर्वे रिपोर्ट आ चुकी है। उन क्षेत्रों के भवन स्वामियों को 213 के नोटिस भेजे जा रहे हैं। इस पर सदस्यों ने कहा कि फिलहाल हाउस टैक्स बढ़ाने का कार्य रूप दिया जाए।
कार्यकारिणी सदस्यों ने मांगे 2-2 करोड़ रुपए
ललित नागदेव ने कहा कि कार्यकारिणी के सभी सदस्य बोर्ड की मुख्य कड़ी हैं। इसलिए सभी सदस्यों को अलग से दो-दो करोड़ रुपए का बजट दिया जाए। जिससे सदस्य अपनी मर्जी के अनुरूप किसी भी विभाग से कार्य करा सकें। इस प्रस्ताव पर सभी कार्यकारिणी सदस्य एकमात्र नजर आए। हालांकि नगर आयुक्त मनीष बंसल ने बजट की कमी बताते हुए इस प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया।
अवस्थापना निधि से हुए कार्यों का भुगतान बोर्ड फंड से होगा
स्थापना विधि से शहर में कराए गए विकास कार्य पर खर्च होने वाली धनराशि अभी शासन से नहीं मिल पाई है, जिसको लेकर कार्यकारिणी सदस्यों ने प्रस्ताव पास किया कि विकास कार्यों की लागत का भुगतान बोर्ड फंड से कर दिया जाए। जिस पर नगर आयुक्त ने भी सहमति जताई।
वन सिटी एक ऑपरेटर योजना लागू फिर भी सीवर सफाई नहीं
मेरठ महानगर में वन सिटी वन ऑपरेटर योजना लागू है। जिसके तहत पूरे शहर की सीवर सफाई के लिए शासन ने कंपनी का चयन किया हुआ है। लेकिन यह कंपनी नगर निगम के कुछ ही वार्ड की सीवर सफाई कर रही है। निगम कार्यकारिणी सदस्य इकरामुद्दीन वालिया ने आरोप लगाया कि कंपनी के कर्मचारी और नगर निगम जलकल विभाग के कर्मचारी सीवर की छोटी लाइन की सफाई करने को तैयार नहीं है।
इस पर नगर आयुक्त मनीष बंसल ने जल निगम के परियोजना प्रबंधक रमेश चंद्र से जवाब मांगा, तो उन्होंने सदन में अवगत कराया कि जल निगम की जिम्मेदारी सीवर लाइन डालना है जबकि मेंटेनेंस करने की पूरी जिम्मेदारी जलकल विभाग की है।
उधर, जलकल विभाग के महाप्रबंधक कुमार गौरव ने अधिकतर जिम्मेदारी जल निगम के खाते में ही डालती है जिस पर कार्यकारिणी उपाध्यक्ष रंजन शर्मा ने आरोप लगाया कि जलकल विभाग के अधिकारी फर्जी दिल लगाकर ठेकेदार को भुगतान कर रहे हैं। जबकि पूरे शहर में सीवर सड़कों पर बह रहे हैं। पार्षदों ने कहा कि शहर में संचालित परियों के खिलाफ नगर निगम कोई कार्यवाही नहीं कर रहा है जबकि दिल्ली से निकलने वाले गोबर से नाले में सीवर लाइन चोक हैं जिससे सड़कें भी टूट रही है।