EXCLUSIVE: चौंका देगी कैलाश प्रकाश स्टेडियम की सच्चाई, ये है खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था
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वैसे तो कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रदेश स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिताएं होती रहती हैं। जिसमें छह सौ से ज्यादा खिलाड़ियों का जमावड़ा स्टेडियम में होता है। लेकिन प्रदेश स्तर के इस स्टेडियम में मेहमान खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था से खुद यहां के अधिकारी परेशान हैं। स्टेडियम में कुल चार कमरे हैं। जिनमें सिर्फ 80 खिलाड़ियों के रहने की व्यवस्था है। ऐसे में प्रदेश स्तर प्रतियोगिता के दौरान खिलाड़ी मैदान पर और स्टेडियम के परिसर में सोते हैं।
कैलाश प्रकाश स्टेडियम में विभिन्न खेलों के राष्ट्रीय स्तरीय खिलाड़ियों को तैयार किया जा रहा है। 1957 में खेल विभाग द्वारा कैलाश प्रकाश स्टेडियम का निर्माण हुआ। सालों पहले स्टेडियम निर्माण के दौरान मेहमान खिलाड़ियों के ठहरने के लिए चार कमरे तैयार कराए गए। उस समय खिलाड़ियों की संख्या को देखते हुए चार कमरे उचित थे। लेकिन साल दर साल मेरठ मंडल में बढ़ती रुचि के चलते खिलाड़ियों की संख्या में बढ़ोतरी होती गई।
648 खिलाड़ी आते हैं
प्रदेश स्तर पर एथलेटिक्स प्रतियोगिता के दौरान 18 मंडल टीमों के करीब 648 खिलाड़ी प्रतिभाग करते हैं। छह सौ से ज्यादा खिलाड़ियों के ठहरने को लेकर स्टेडियम में उचित व्यवस्था नहीं है। जिसको लेकर मेहमान खिलाड़ियों के साथ स्टेडियम के अधिकारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्टेडियम में मात्र चार कमरे जिनमें सिर्फ 80 खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था है। जबकि अन्य 568 खिलाड़ियों को स्टेडियम परिसर या शहर का धर्मशालाओं में शरण लेनी पड़ती है। साल में तीन से चार बार प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता आयोजित होती है।
बाहर रुकने के लिए 60 रुपये प्रतिदिन खिलाड़ी
कमरे कम होने के कारण शहर की विभिन्न धर्मशालाओं में ठहरने की व्यवस्था की जाती है। जबकि खेल विभाग द्वारा खिलाड़ियों को बाहर ठहराने के लिए एक खिलाड़ी को मात्र 60 रुपये प्रतिदिन दिया जाता है। जिससे स्टेडियम अधिकारियों के सामने समस्या और भी विचित्र हो जाती है। जिसको लेकर स्टेडियम अधिकारी कई बार मामले को लेकर खेल विभाग को पत्र भी लिख चुके हैं। जबकि क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी आले हैदर स्टेडियम में राष्ट्रीय स्तरीय खेलों को शुरू करने की तैयारी में हैं।
बाहर ठहरे खिलाड़ियों को खाना वितरण में भी समस्या
प्रदेश स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्टेडियम के बाहर ठहरने वाले खिलाड़ियों को खाना वितरण करने में भी समस्या होती है। अधिकारियों के अनुसार बाहर ठहरने वाले खिलाड़ियों को खाने के समय स्टेडियम में आने को कहा जाता है। जबकि अधिकतर खिलाड़ी समय पर नहीं आ पाते हैं। ऐसे में खिलाड़ियों को खाना भेजना भी चुनौती से कम नहीं होता।
खेल मंत्रालय और खेल विभाग को स्टेडियम में मेहमान खिलाड़ियों के ठहरने को लेकर कई बार पत्र लिखा जा चुका है। जिसके बारे में उप्र खेल मंत्री चेतन चौहान से वार्ता हुई है। जल्द मेहमान खिलाड़ियों के ठहरने को लेकर स्टेडियम में अतिरिक्त कमरों का निर्माण होगा। - आले हैदर, क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी
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