2019 लोकसभा चुनाव का परिणाम बदलने के लिए इज्तमा से निकली कई सौ जमातें
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बुलंदशहर में चल रहे तब्लीगी इज्तमा से निकलीं जमातें वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव का खाका खीचेंगी। इसमें कोई शक नहीं कि जमातों का मुख्य उद्देश्य दीन की बातों का प्रसार करना ही है लेकिन राजनीतिक नजरिए से मुस्लिमों के बेहतर मुस्तकबिल पर भी जमातें गुफ्तगू करेंगी।
पश्चिमी उप्र के जनपद बुलंदशहर में हो रहे तब्लीगी इज्तमा के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। आकलन किया जा रहा कि लोकसभा चुनाव 2019 में इस इज्तमा का कितना असर पड़ेगा। सबसे अहम बिंदू है इज्तमा से जमातों का रवाना होना।
सोमवार को यह इज्तमा समाप्त हो रहा है। इसके बाद देश भर के लिए यहां से लगभग दो हजार जमातें रवाना होंगी। एक जमात में दस या इससे ज्यादा सदस्य भी हो सकते है। दरअसल जमाती पूरे देश में घूमकर दीन का प्रचार तो करेंगे ही लेकिन इस बार निशाना लोकसभा चुनाव भी होगा। जो जमातें चार माह के लिए रवाना होंगी, जब उनके लौटने का समय आएगा तो चुनावी दुदुंभि बज चुकी होगी। पूरे देश में चुनावी माहौल होगा।
इससे पहले ही जमातें इस दृष्टिकोण से भी मुस्लिमों से बात कर चुकी होंगी। चालीस दिन की जमातें तेजी से लोगों के बीच पहुंचेंगी और जल्दी ही अपनी बात को मुस्लिमों के सामने रखेंगी। इज्तमा में जिन राजनीतिक पहलुओं को स्पष्ट रखा नहीं जा सकता, उन्हें जमाते साफ तौर पर मुस्लिमों के सामने रखेंगी। जमात में युवाओं की इस बार खासी भागीदारी होगी। चूंकि हर पार्टी पूरा फोकस युवाओं पर ही कर रही है तो जमातों में भी युवाओं की भागीदारी बढ़ना लाजिमी है।
चूंकि इसमें शामिल होने के लिए फिलहाल गांव-गांव, शहर-शहर से लोग रवाना हुए हैं तो उसका व्यापक असर जाने वाला है। ऐसे में जब जमाती फिर से जाकर बात करेंगे तो लोगों के जेहन पर इसका ज्यादा असर होगा। यह बात राजनीतिक दल भी भांप रहे हैं।
यही कारण है कि बसपा, सपा, कांग्रेस आदि दलों ने इज्तमा में शामिल हो रहे लोगों पर फोकस किया है। कहीं स्वागत हो रहे हैं तो कहीं अपने स्तर से बसों का इंतजाम करने की बात कही जा रही है। कहीं भोजन, मिठाई, फलों आदि का वितरण किया जा रहा है। चूंकि देश के चुनाव में मुस्लिम वोटरों का बड़ा योगदान है और इसी वर्ग पर कई दलों की निगाह है। ऐसे में इस आयोजन को राजनीतिक दल अपने ही नजरिए से देख रहे हैं।
कई पार्टियों का तो मुख्य वोट बैंक ही मुस्लिम है या फिर सोशल इंजीनियरिंग के सहारे मुस्लिम वोटरों पर सेंध लगाई जाती है। ऐसे में राजनीतिक दल भी इस इज्तमा को चुनाव पूर्व का रिहर्सल मान रहे हैं।
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