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Exclusive रिपोर्ट: अंग्रेजी की असली बोतल में नकली शराब, ऐसे चल रहा पूरा 'खेल'

Wed, 13 Feb 2019 05:38 PM IST
दुष्यंत शर्मा अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ
अनुज मित्तल, अमर उजाला, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 13 Feb 2019 05:38 PM IST
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Meerut: In the original bottles of English, fake alcohol is being sold
सांकेतिक तस्वीर

मेरठ में नकली शराब को रोकना आबकारी और पुलिस विभाग के लिए बड़ी चुनौती है। शराब माफिया इतने शातिर हो चुके हैं कि देशी और कच्ची ही नहीं, बल्कि अंग्रेजी शराब में भी व्हिस्की, रम से लेकर स्कॉच तक तैयार कर रहे हैं। इसके लिए पुरानी बोतलों के ऊपर नया लेबल लगाकर उसमें नकली शराब भरकर बेचा जा रहा है। 

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ऐसे होता है पूरा खेल 
अंग्रेजी शराब की प्रयोग की गई बोतलें कबाड़ी के यहां बिकती हैं, जहां से इन्हें कुछ लोग अलग से छंटनी कराकर ले जाते हैं। मेरठ के रजबन सहित शहर में कई ऐसे स्थान हैं, जहां पर शराब की खाली बोतलों का स्टॉक रहता है। नकली शराब के माफिया जिस ब्रांड की बिक्री ज्यादा होती है, उसकी बोतलों का स्टॉक यहां से खरीदकर ले जाते हैं। 
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उबलते पानी में बोतल डालकर निकालते हैं कार्क 
अंग्रेजी शराब की अधिकांश बोतलों में प्लास्टिक की कार्क लगी होती है। इसमें से शराब बाहर तो आ सकती है, लेकिन भीतर नहीं जा सकती। खाली बोतल से इस कार्क को निकलने के लिए बोतल के कार्क वाले हिस्से को उबलते हुए पानी में थोड़ी देर रखा जाता है। उसके बाद कार्क को बाहर की तरफ खींच लेते हैं।

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अल्कोहल और एसेंस से बनती है शराब
कुछ माफिया सरकारी शराब की दुकान पर बिकने वाली बोतलों को लेकर उसकी आधी शराब निकालकर दूसरी बोतल तैयार कर बेचते हैं। इसमें वह थोड़ी स्प्रिट और पानी के साथ एसेंस मिलाते हैं। वहीं कुछ माफिया अल्कोहल में पानी और एसेंस मिलाकर शराब तैयार करते हैं। इसके साथ ही खाने वाले रंग से शराब को रंग दिया जाता है। 

रम के लिए लौंग का प्रयोग 
सूत्रों के अनुसार, रम बनाने के लिए लौंग का प्रयोग होता है। लौंग को भूनकर, पीसकर पानी में उबाला जाता है।  

लगा देते हैं मुहर
शराब के हर ब्रांड का लेबल प्रिंटिंग प्रेस पर छप जाता है। इसके पैकिंग बॉक्स भी तैयार कराये जाते हैं। कुछ लोग इसके ऊपर ‘ओनली सेल फोर हरियाणा’ या ‘ओनली सेल फॉर डिफेंस’ की मुहर लगा देते हैं, जिससे इसके असली होने का आभास होता है।

जरा सी चूक से खतरा 
इस शराब को तैयार करने में जो अल्कोहल प्रयोग होता है, उसकी मात्रा जरा सी ज्यादा होना पीने वाले के लिए हानिकारक बन जाता है। शराब माफिया कभी-कभी इथाइल की जगह मिथाइल का भी प्रयोग कर जाते हैं, जो जानलेवा होता है। अगले माह होली के साथ ही लोकसभा चुनाव का माहौल बनेगा। ऐसे में शराब की बिक्री पर जोर होगा। तैयारी में शराब माफिया जुटे हैं। 
 
बहुत खतरनाक है
वरिष्ठ फिजीशियन डा. तनुराज सिरोही
का कहना है कि अंग्रेजी शराब बनाने में इथाइल अल्कोहल का प्रयोग होता है। डिस्टलरी की लैब में टेस्टिंग के बाद मानक तय होता है और उसकी तीव्रता आदि कम की जाती है। नकली शराब का कोई पैमाना नहीं है। 

सील करना नहीं आसान
हरियाणा की शराब यहां सस्ती होने के कारण तो बिकती है। लेकिन नकली अंग्रेजी शराब बनाने का यहां कोई काम चल रहा है, ऐसा जानकारी में नहीं है। खाली बोतल तो शराब बनाने वाली कंपनियां भी खरीदती हैं, इसलिए कबाड़ी इन्हें अपने पास रखते हैं। यह बात सही है कि बोतल की कार्क आसानी से निकाली जा सकती है और नकली शराब भी बन सकती है। लेकिन बोतल को सील करना आसान नहीं है। क्योंकि ढक्कन पर भी अब ब्रांड की मुहर होती है। फिर भी यदि कहीं ऐसा हो रहा है, तो गंभीरता से जांच कराई जाएगी। - आलोक कुमार, जिला आबकारी अधिकारी

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