मेरठी किस्सा: ...जब खैरनगर बाजार से 100 आंदोलनकारी महिलाओं को पहुंचाया था जेल
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घटना 1942 की है। शहर में धारा 144 लागू थी। आंदोलनकारी शकुंतला गोयल ने शहर में फिरंगी सरकार के खिलाफ जुलूस निकालने का साहस पूर्ण कार्य किया। इससे पूर्व लेडीज पार्क में महिलाओं ने बैठक की। उसमें तय हुआ कि शकुंतला गोयल, रेवती देवी, कृष्णा देवी अपने हाथों में तिरंगा लेकर जुलूस का नेतृत्व करेंगी।
इसके बाद सभी महिलाएं एवं छात्राएं मेरठ के बाजार बजाजा स्थित एक मंदिर में इक्ट्ठा हो गईं। कुछ ही पल में जुलूस शुरू हो गया। सड़क पर देश प्रेम के नारों से आसमां गूंज उठा। सड़क पर जुलूस देख प्रशासन परेशान हो उठा।
वहीं पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा पर आंदोलनकारी महिलाएं नहीं रुकी। जुलूस आगे बढ़कर खैरनगर बाजार पहुंचा। महिलाएं बुढ़ाना गेट पर सभा करने की तैयारी में थी। खैरनगर में ही जुलूस को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने उन्हें घेरकर चेतावनी दी। महिलाएं हौसले के साथ आगे बढ़ती रहीं। अंत में पुलिस ने जुलूस को घेर लिया और करीब सौ आंदोलनकारी महिलाओं व छात्राओं को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सभी को धारा 144 के उल्लंघन में एक माह की सजा हुई वहीं कई महिलाओं पर मुकदमे भी चले।
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