प्लाज्मा दान करने के लिए योद्धाओं का ‘अकाल’, 725 कोरोना योद्धाओं की सूची की गई थी तैयार, सिर्फ 35 आए देने
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मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में थेरेपी के लिए प्लाज्मा दान करने वालों का ‘अकाल’ है। मेडिकल में इसके लिए 725 कोरोना योद्धाओं की सूची तैयार की गई थी, लेकिन इनमें से सिर्फ 35 लोग ही प्लाज्मा देने के लिए राजी हुए। इनमें से सिर्फ 13 लोगों में पर्याप्त एंटीबाडी मिली। इन्हीं का प्लाज्मा लिया गया।
23 नवंबर 2020 को मेडिकल में खून से प्लाज्मा अलग करने वाली मशीन आ गई थी। मेडिकल की भाषा में इसे एफेरेसिस फैसिलिटी कहते हैं। इसका उद्घाटन चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुरेश खन्ना ने ऑनलाइन किया था। इसके बाद से इस मशीन के जरिए प्लाज्मा निकालने की प्रक्रिया शुरू हो गई।
मेडिकल के कोविड वार्ड के प्रभारी डॉ. सुधीर राठी ने बताया कि अब तक कुल 725 लोग ऐसे थे जो प्लाज्मा डोनेट कर सकते थे। इन लोगों से मेडिकल की टीम ने संपर्क किया और जो प्लाज्मा देने के लिए तैयार हो हुए, उन्हें बुलाया गया। अब 5 यूनिट प्लाज्मा है, बाकी इस्तेमाल हो चुका है।
प्लाज्मा लेकर उसे सुरक्षित रख लिया जाता है। जरूरत पड़ने पर उसका इस्तेमाल किया जाता है। मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन की टीम है जो प्लाज्मा थेरेपी देने के लिए कुशल है। जिस मरीज पर रेमडेसिविर दवा असर नहीं करती है उसे प्लाज्मा थेरेपी दी जा सकती है।
यह है प्लाज्मा थेरेपी
प्लाज्मा थेरेपी को मेडिकल साइंस की भाषा में प्लास्माफेरेसिस नाम से जाना जाता है। प्लाज्मा थेरेपी से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से है, जिसमें खून के तरल पदार्थ या प्लाज्मा को रक्त कोशिकाओं से अलग किया जाता है। इसके बाद अगर किसी व्यक्ति के प्लाज्मा में अस्वस्थ्य टिशू मिलते हैं, तो उसका इलाज समय रहते शुरू किया जाता है।
प्लाज्मा देने वाले बोले, जरूर करें दान
प्लाज्मा दान करना रक्तदान जैसा ही है। इससे कोरोना मरीज की जान बचाई जा सकती है। - अनिल कुमार
प्लाज्मा दान किया था, कोई परेशानी नहीं हुई। बाकी कोरोना योद्धाओं को भी इसके लिए आगे आना चाहिए। - ओमदेव
प्लाज्मा दान किया है। अच्छा अनुभव रहा। मेरे इस प्रयास से किसी की जान बच जाए तो इससे बड़ी खुशी क्या हो सकती है। - आकांक्षा