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मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से मेरठ को बड़ी उम्मीदें
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मोदी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार से मेरठ को बड़ी उम्मीदें
मेरठ। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी उम्मीदें हैं। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या 37 वर्ष बाद मेरठ को मंत्रिमंडल में फिर से जगह मिल पाएगी?
पश्चिमी यूपी में गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह और मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान राज्यमंत्री हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीन बार से सांसद हैं। वह केंद्र सरकार की कई समितियों में होने के साथ-साथ लोकसभा पैनल में भी शामिल हैं। लोकसभा में उपस्थिति के मामले में वह हमेशा आगे रहते हैं। इसके बाद भी वह मोदी मंत्रिमंडल से दूर हैं। इस बार मंत्रिमंडल का विस्तार यूपी में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव के लिहाज से अहम है। ऐसे में नजरें इस पर टिकी हैं कि अग्रवाल को कैबिनेट में जगह मिलती है या नहीं।
बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनकी भी दावेदारी बनती है। हालांकि उनके स्थान पर मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान को मंत्री बनाया गया था। वर्तमान में वह पशुपालन एवं मत्स्य राज्यमंत्री हैं। केंद्र में सामाजिक एवं न्याय आधिकारिता मंत्री रहे थावर चंद गहलोत कर्नाटक के राज्यपाल बनाए गए हैं। वह दलित नेताओं में अहम स्थान रखते हैं। ऐसे में मेरठ से राज्यसभा सदस्य कांता कर्दम की दावेदारी बनती है। वह अनुसूचित जाति के जाटव समाज से आती हैं। बसपा का सर्वाधिक प्रभाव इसी समाज में है।
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वहीं, किसान आंदोलन को देखते हुए भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर को भी मंत्रिमंडल में मौका दिया जा सकता है। हालांकि अभी किसी भी सांसद के पास दिल्ली से समारोह में शामिल होने के लिए न्योता नहीं आया है।
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मेरठ। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले मंत्रिमंडल विस्तार से पश्चिमी उत्तर प्रदेश को भी उम्मीदें हैं। सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या 37 वर्ष बाद मेरठ को मंत्रिमंडल में फिर से जगह मिल पाएगी?
पश्चिमी यूपी में गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह और मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान राज्यमंत्री हैं। मेरठ-हापुड़ लोकसभा क्षेत्र से सांसद राजेंद्र अग्रवाल लगातार तीन बार से सांसद हैं। वह केंद्र सरकार की कई समितियों में होने के साथ-साथ लोकसभा पैनल में भी शामिल हैं। लोकसभा में उपस्थिति के मामले में वह हमेशा आगे रहते हैं। इसके बाद भी वह मोदी मंत्रिमंडल से दूर हैं। इस बार मंत्रिमंडल का विस्तार यूपी में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव के लिहाज से अहम है। ऐसे में नजरें इस पर टिकी हैं कि अग्रवाल को कैबिनेट में जगह मिलती है या नहीं।
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बागपत के सांसद सत्यपाल सिंह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री रह चुके हैं। ऐसे में उनकी भी दावेदारी बनती है। हालांकि उनके स्थान पर मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान को मंत्री बनाया गया था। वर्तमान में वह पशुपालन एवं मत्स्य राज्यमंत्री हैं। केंद्र में सामाजिक एवं न्याय आधिकारिता मंत्री रहे थावर चंद गहलोत कर्नाटक के राज्यपाल बनाए गए हैं। वह दलित नेताओं में अहम स्थान रखते हैं। ऐसे में मेरठ से राज्यसभा सदस्य कांता कर्दम की दावेदारी बनती है। वह अनुसूचित जाति के जाटव समाज से आती हैं। बसपा का सर्वाधिक प्रभाव इसी समाज में है।
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वहीं, किसान आंदोलन को देखते हुए भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे वर्तमान में राज्यसभा सदस्य विजयपाल सिंह तोमर को भी मंत्रिमंडल में मौका दिया जा सकता है। हालांकि अभी किसी भी सांसद के पास दिल्ली से समारोह में शामिल होने के लिए न्योता नहीं आया है।