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Meerut: घर में ही बना रही 'लुटेरों की फौज', 45 करोड़ की जीएसटी चोरी में पांच पकड़े, चौंकाने वाला खुलासा

Thu, 03 Jul 2025 08:16 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 03 Jul 2025 08:16 PM IST
सार

मेरठ एसटीएफ ने जाल बिछाकर कर्नाटक से आरोपियों को गिरफ्तार कया। सरगना समेत दो आरोपी फरार हैं। ये लोग फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल को चोरी का जरिया बनाते थे। 

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Meerut: GST theft of Rs 45 crore, defrauded through fake invoices of 100 companies; Five arrested
पकड़े गए आरोपी, पांचों आपस में रिश्तेदार हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की मेरठ यूनिट ने 100 से ज्यादा कंपनियों की फर्जी इनवॉइस और ई-वे बिल के जरिए करोड़ों की जीएसटी चोरी करने वाले पांच लोगों को कैपेगोड़ा नगर बंगलुरू (कनार्टक) से गिरफ्तार किया है। गिरोह के दो सरगना अभी हाथ नहीं आए हैं। मुजफ्फरनगर में दर्ज 45 करोड़ की जीएसटी चोरी के मामले में एसटीएफ ने यह कार्रवाई की है। राजस्थान के बाड़मेर के रहने वाले सभी आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर मुजफ्फरनगर लाया गया है।
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मुजफ्फरनगर जिले में खतौली क्षेत्र के गांव बड़सू निवासी अश्वनी गुप्ता ने दो सितंबर 2024 को साइबर क्राइम थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उनके पास अनजान नंबर से एक महिला की कॉल आई थी। महिला ने एयरपोर्ट पर नौकरी लगवाने के नाम पर उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली का बिल, हाईस्कूल की मार्कशीट आदि प्रमाण पत्र मांगे। अश्वनी ने व्हाट्सएप पर प्रमाण पत्र भेज दिए और मोबाइल पर आए ओटीपी भी बता दिए। रजिस्ट्रेशन के नाम पर जाहिद के नाम अकाउंट में 1750 रुपये भी ट्रांसफर करा लिए थे।
 
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कुछ दिन बाद अश्वनी गुप्ता के घर पहुंचे जीएसटी विभाग के अफसरों ने बताया कि उनके नाम पर एके ट्रेडर्स नाम से फर्म रजिस्टर्ड है। इस फर्म के नाम पर मार्च 2024 से अब तक 248 करोड़ के बिलों को जीएसटी पोर्टल पर अपलोड किया गया है। इन पर 45 करोड़ रुपये का टैक्स बन रहा है। इस मामले की विवेचना अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था ने एसटीएफ को स्थानांतरित की थी।
 
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एक-दूसरे के रिश्तेदार हैं आरोपी
एसटीएफ ने बंगलुरु के थाना वायदराहल्ली से राजस्थान के जिला बाड़मेर के थाना आजीटी गांव गोलिया गरवा निवासी रतना राम, ओमप्रकाश, हनुमान राम और थाना गुडामालानी के गांव दबड़ निवासी बुद्धाराम और गांव डाबड निवासी संतोष कुमार को गिरफ्तार किया। सभी आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं। इनके पास से एसटीएफ ने 13 मोबाइल, एक प्रिंटर, विभिन्न कंपनियों की 8 बिल बुक, चार रबड़ की मुहर, एक नंबरिंग मशीन, चार चेक बुक और तीन कार बरामद की।
 

इस तरह फर्जीवाड़ा कर रहे थे आरोपी
एसटीएफ के एएसपी बृजेश कुमार सिंह के मुताबिक सभी आरोपी बंगलुरु में किराये के मकान में रह रहे थे। इनके परिचित लाभूराम निवासी कोटडा थाना करडा, जिला जालोट (राजस्थान) व सुरेश निवासी बाड़मेर सीधे-सादे लोगों से नौकरी लगवाने का लालच देकर उनके कागजात ले लेते थे। किसी फर्जी आईडी पर सिम निकलवाकर उनके नाम पर जीएसटी पोर्टल पर ऑनलाइन फर्जी फर्म रजिस्टर्ड करते थे। 
इसका इस्तेमाल फर्जी ई-वे बिल बनाकर करीब दो साल से करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी कर रहे थे। लाभूराम व सुरेश ने पकड़े गए आरोपियों को मोबाइल, फर्जी आईडी के सिम, प्रिंटर, चेक बुक, बिल बुक, रबड़ की मोहर, स्टांप आदि उपलब्ध कराए थे।
 

तीन हजार रुपये प्रति बिल देते थे
जीएसटी बिल काटने की एवज में सुरेश व लाभूराम पकड़े गए आरोपियों को प्रति बिल पर तीन हजार रुपये देते थे। किस कंपनी के नाम पर कितने का बिल काटना है, इसकी डिटेल लाभूराम व सुरेश बताते थे। जिस कंपनी के नाम पर बिल काटा जाता था, उस कंपनी से सुरेश व लाभूराम अपनी बनाई गई फर्जी फर्म के बैंक खातों में रुपये लेते थे। अपना 10 से 20 प्रतिशत कमीशन काटकर पैसा कंपनी के बताए किसी अन्य खाते में या नकद वापस कर देते थे। फर्जी फर्म को कुछ समय बाद बिना जीएसटी जमा किए बंद कर देते थे। इस तरह ये लोग जीएसटी की चोरी कर केंद्र सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा चुके हैं। टीम लाभूराम और सुरेश को तलाश कर रही है।



 
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