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Meerut: मन-वचन-कर्म से किए आचरण से होती है संस्कृति की रक्षा, हस्तिनापुर आगमन पर बोले आचार्य सुनील सागर महाराज

Sun, 31 Dec 2023 04:13 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 31 Dec 2023 04:13 PM IST
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Meerut: Culture is protected by the conduct of thoughts, words and deeds, Acharya Sunil Sagar Maharaj said on
आचार्य 108 सुनील सागर महाराज - फोटो : Amar Ujala

हस्तिनापुर  कस्बे के श्री दिगम्बर जैन प्राचीन बड़ा मंदिर, में आचार्य 108 सुनील सागर महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर श्री दिगम्बर जैन के मुख्य सिंह द्वार पर अचार्य संघ का पाद प्रक्षालन व आरती की गई। पाद प्रक्षालन का सौभाग्य तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष जीवेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेन्द्र कुमार जैन, सुनील कुमार जैन व मुख्य प्रबंधक मुकेश जैन आदि को प्राप्त हुआ।

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प्रातः कालीन बेला में मुख्य मंदिर में शांतिधारा के बाद आचार्य सुनील सागर महाराज का मंगलमय प्रवचन कैलाश पर्वत के सामने श्री सौरभ सागर निलय में हुआ। इस उपलक्ष में शांतिनाथ भगवान के चित्र का अनावरण करने का सौभाग्य शरद जैन मुम्बई एवं समस्त पदाधिकारीगण को प्राप्त हुआ।

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इस अवसर पर ऐतिहासिक नगरी में पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं को प्रवचन देते हुए आचार्य सुनील सागर महाराज ने मंगल प्रवचन देते हुए कहा कि यह हस्तिनापुर की पावन भूमि प्राचीन संस्कृति का प्रतीक है। यह भूमि बहुत ही पवन है। यहां आने से मन में बड़ी विशुद्धी का संचार हुआ है। इस भूमि से तीन तीर्थंकर भगवानों ने चार-चार कल्याणक प्राप्त किये।

तीर्थंकर भगवान हमें यही शिक्षा देते है कि जीवन में शांति, सुख पाना है तो अपने आप को संसार की परवस्तुओं से हटकर स्वातत्व की और आना होगा। एवं मन, वचन, काय पर वहीं महान पुरूष विजय प्राप्त कर सकता है जो अपने जीवन को सयमंय बनाता है वाणी से मनुष्य उच्च उपलब्धि प्राप्त कर सकता है एवं वाणी से ही नीच गति का बंध कर लेता है हमें अपनी वाणी को विवेक पूर्वक बोलना चाहिए।
 

प्रवचन के मध्य कहा कि हमारा शुद्ध, मन, वचन और कर्म से किया आचरण संस्कृति की रक्षा कर सकता है। श्रमण संस्कृति की रक्षा के लिए अपने पुरातत्व निर्गन्त मुनियों की सुरक्षा रखना आवश्यक है। प्रवचन के पश्चात् सभी मुनि महाराज की आहार चर्या निर्विघ्न रूप से सम्मपन हुई। 

सांयकालीन बेला में संगीतमय गुरूभक्ति की गई एवं 1008 दीपको से भक्तामर दीप अर्चना की गई। जिसमें अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया। जिसमें बाहर से पधारे हुए संगीतकार अक्षत जैन, शुभम जैन, प्रथम जैन ने अपनी भक्ति भजन के माध्यम से जीनेन्द्र भगवान एवं गुरूओं की आराधना करवाई।     

इस अवसर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के अध्यक्ष जीवेन्द्र कुमार जैन, महामंत्री मुकेश जैन, कोषाध्यक्ष राजेंद्र  कमार जैन, मंत्री राजीव जैन, मंत्री राजीव जैन, सुनील जैन, सुशील जैन, विजय कुमार जैन, आदि अनेक स्थानों से महानुभव उपस्थित रहे।

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