फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   meerut clean drinking water is not available even after spending twenty crores

यूपी: 20 करोड़ खर्च होने के बावजूद इस शहर में लोगों को उपलब्ध नहीं स्वच्छ पेयजल

Mon, 12 Nov 2018 12:49 PM IST
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 12 Nov 2018 12:49 PM IST
विज्ञापन
meerut clean drinking water is not available even after spending twenty crores
नल से पानी पीता बच्चा - फोटो : अमर उजाला
सरकार भले ही जनता को स्वच्छ पानी देने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही हो, लेकिन सरकारी मशीनरी सरकार की योजनाओं पर पलीता लगा रही है। आठ साल पहले गांव खडौली में लगाए गए ट्यूबवेल और पाइप लाइन से जनता को पीने का पानी आज तक नहीं मिल पाया है। योजना में हुए भ्रष्टाचार पर कई बार उंगली उठ चुकी है। डीएम, कमिश्नर से शिकायत के बाद भी संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। 
विज्ञापन


सरकार ने बीएसयूपी योजना के तहत 2010 में नगर निगम क्षेत्र के गांव खड़ौली में पेयजल के लिए दो ट्यूबवेल, एक ओवरहेड टैंक और गांव में पानी की पाइप लाइन डलवायी थी। पूरा काम राजकीय निर्माण निगम ने कराया। लेकिन जनता को पीने का पानी आज तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। 
विज्ञापन


खड़ौली की आबादी करीब 20 हजार है। जवाहर नगर की आबादी भी पांच हजार के आसपास है। कुल 25 हजार की जनता को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने करीब 20 करोड़ खर्च किए। जिसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

पानी मिला नहीं, खोद डाली सड़कें 
ट्यूबवेल से लाइन में पानी छोड़ते ही पाइप फट जाते हैं। इसके कारण गांव में सड़कों को कई स्थानों से खोदा जा चुका है। इससे सड़कें भी खराब हो गई हैं। अधिकारियों के दबाव में राजकीय निर्माण निगम ने कई बार पाइप लाइन में पानी छोड़ने का प्रयास किया, लेकिन घटिया पाइप लाइन पानी के प्रेशर को झेल नहीं पा रही हैं। इससे 

निगम को जलकर का नुकसान 
खड़ौली में जल संसाधनों पर सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च किए। इसका लाभ न तो जनता को मिला और न ही नगर निगम को। निगम की पिछली बोर्ड बैठक में पूर्व पार्षद प्रमोद ने ट्यूबवेल चालू न होने की बात कहकर ग्रामवासियों को जलकर से मुक्त करा दिया था।

फोन भी नहीं उठाते अधिकारी 
जलापूर्ति और भवन निर्माण के भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी किसी का फोन तक नहीं उठाते हैं। इस संबंध में विभाग के जेई प्रमोद कुमार को कई बार फोन मिलाया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारी सरकारी योजनाओं को लेकर कितने गंभीर हैं।

पानी मिले तो दें जलकर 
आठ साल पहले सुना था कि अब पीने का पानी टंकी से मिलेगा। अभी तक तो मिला नहीं। बार-बार सड़कों को खोदा जाता है। पानी तो मिले जलकर तो देंगे ही।- अनीता सैनी 

काम में हुआ भ्रष्टाचार
ट्यूबवेल लगाने से लेकर पाइप लाइन डालने में खुला भ्रष्टाचार हुआ है। भ्रष्टाचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। अधिकारी एक दूसरे को बचाने में जुटे हैं।  - गुलशन पाल

सड़कें भी कर रहे बर्बाद
पानी की पाइप लाइन चालू करने के लिए सड़कों को अनेकों बार खोदा जा चुका है। विभागीय अधिकारियों ने पहले पाइप लाइन में चूना लगाया और अब सड़कों को खोदकर बर्बाद कर रहे हैं। - डाॅ. विनय कुमार

अधिकारी गंभीर नहीं
राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों के आश्वासनों से तंग आ चुके हैं। अब तो विभागीय अधिकारियों को घेरने की तैयारी है। पानी को लेकर भी सरकारी अधिकारी गंभीर नहीं हैं। कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। - फौजी राजेन्द्र सैनी

कई बार की शिकायत
कई बार नगर निगम, जल निगम, डीएम और कमिश्नर से शिकायत कर चुके हैं। राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों ने गांव में घटिया पाइप लाइन डलवायी है। जो पानी छोड़ते ही फट जाती है। अधिकारियों की शिकायत मुख्यमंत्री से की जाएगी। -रेनू सैनी, पार्षद, वार्ड 38

पाइप लाइन में परेशानी नहीं
जल निगम ने केवल एक ट्यूबवेल लगायी है। हमारी ट्यूबवेल और पाइप लाइन में कोई दिक्कत नहीं है। डूडा एवं राजकीय निर्माण निगम ने जो आठ साल पहले पाइप लाइन डाली थी, वह नहीं चल पा रही है। 
-मुन्ना सिंह, परियोजना प्रबंधक जल निगम। 

शहर से लेकर देश तक की ताजा खबरें व वीडियो देखने लिए हमारे इस फेसबुक पेज को लाइक करें

https://www.facebook.com/AuNewsMeerut/

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed