राष्ट्रमंडल खेल 2026: प्रियंका गोस्वामी का लक्ष्य देश के लिए पदक जीतना, 10 हजार मीटर पैदल चाल में उतरेंगी
मेरठ की अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रियंका गोस्वामी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में देश के लिए पदक जीतने के लक्ष्य के साथ उतरेंगी। 10 हजार मीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में हिस्सा लेने वाली प्रियंका का कहना है कि उनका लक्ष्य पिछला प्रदर्शन बेहतर कर देश के लिए पदक जीतना है। वह कई महीनों से कड़ी तैयारी में जुटी हैं।
विस्तार
मेरठ के माधवपुरम की रहने वाली अंतरराष्ट्रीय एथलीट प्रियंका गोस्वामी आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। वह देश के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 समेत कई बड़ी प्रतियोगिता में पदक जीत चुकी हैं। अब 23 जुलाई से ग्लासगो स्कॉटलैंड में होने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़कर देश के लिए पदक जीतना ही उनका लक्ष्य है।
प्रियंका गोस्वामी मूलरूप से मुजफ्फरनगर की रहने वाली हैं। अब उनका परिवार शहर के माधवपुरम में रहता है। वह कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 1 अगस्त को 10000 मीटर पैदल चाल प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगी। वह 24 जुलाई को ग्लासगो रवाना होंगी। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए वह बंगलूरू में तैयारी में जुटी हैं।
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प्रियंका की उपलब्धियां
2024 के ओलंपिक खेलों में किया प्रतिभाग
2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में 10,000 मीटर पैदल चाल में रजत
2023 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप बैंकॉक में 20000 मीटर पैदल चाल में रजत
प्रश्न: कॉमनवेल्थ गेम्स आपके लिए क्या मायने रखता है ?
प्रियंका : वर्ष 2022 के कॉमनवेल्थ गेम्स मेरे कॅरिअर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट था। जब मैंने फिनिश लाइन पार की, तो सिर्फ मुझे पदक नहीं मिला, बल्कि वर्षों की मेरी मेहनत सफल हुई। पोडियम पर खड़े होकर तिरंगे के सम्मान के साथ मेडल गले में पहनना मेरे जीवन का सबसे गर्व भरा पल था।
प्रियंका - कई माह से तैयारी में लगी हूं। मैं 10000 मीटर पैदल चाल में भाग ले रही हूं। प्रतिदिन सुबह और शाम में दो-दो घंटे कड़ी तैयारी मेहनत करती हूं। तकनीकी कमियां दूर किया जा रहा है। खुद पर भरोसा है कि इस बार अपना सर्वश्रेष्ठ देकर पदक जीतेंगी।
प्रश्न: एक एथलीट के रूप में आपकी दिनचर्या और अनुशासन क्या है?
प्रियंका: मैं प्रतिदिन कम से कम 4 घंटे अभ्यास करती हूं। शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए दिनचर्या की शुरुआत मेडिटेशन और योग से होती है। न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह के अनुसार खानपान होता है, ताकि मेरे शरीर को वह ऊर्जा मिले जिसकी उसे जरूरत है।
प्रश्न : आप लड़कियों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। इस पर क्या कहना है ?
प्रियंका: जब छोटे शहरों या गांवों के बच्चे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतते हैं, तो युवाओं का खेलों पर भरोसा बढ़ता है। आज मेरठ और मुजफ्फरनगर में कई लड़कियां एथलेटिक्स और रेस वॉकिंग की ओर आकर्षित हो रही हैं।
सफलता का संदेश : सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। अपनी मेहनत पर विश्वास रखें, अनुशासन अपनाएं और जब आप अपनी पूरी लगन से काम करते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।