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MEERUT: निगम की चारों डिस्पेंसरी बंद, एलोपैथी, आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक की दी जाती थीं दवाइयां

Sun, 18 Dec 2022 03:56 PM IST
Dimple Sirohi राजकुमार सैनी , अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी , अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 18 Dec 2022 03:56 PM IST
सार

मरीज बढ़ने पर शहर में ब्लीचिंग पाउडर और फॉगिंग जैसे कार्य किए जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। मेरठ में चारों डिस्पेंसरी बंद हो चुकी हैं। कोरोना में लोगों को इनकी बहुत याद आई। 

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MEERUT: All the four dispensaries of the corporation closed in Meerut
मेरठ डिस्पेंसरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक समय था जब जनता को संक्रामक रोगों से बचाने में नगर पालिका की चार डिस्पेंसरी बड़ी भूमिका निभाती थीं। मरीज बढ़ने पर शहर में ब्लीचिंग पाउडर और फॉगिंग जैसे कार्य किए जाते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। चारों डिस्पेंसरी बंद हो चुकी हैं। कोरोना में लोगों को इनकी बहुत याद आई। 

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साल 1958 में नगर पालिका ने सूरजकुंड और पुरानी तहसील यानी कोतवाली के बराबर में एलोपैथिक, शारदा रोड पर आयुर्वेदिक और सिविल लाइन क्षेत्र के साकेत में होम्योपैथिक डिस्पेंसरी खोली थीं, जहां दिन निकलते ही मरीजों की कतारें लग जाती थीं।
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सूरजकुंड निवासी कैलाश चंदोला बताते हैं कि डिस्पेंसरी पर शहर ही नहीं आसपास के गांवों के लोग भी हैजा, टिटनेस और मलेरिया जैसी बीमारियों के इलाज के लिए पहुंचते थे। आखिरी चिकित्सक डॉ. वीके शर्मा रहे। इनके रिटायर होने के बाद अस्पताल बंद हो गया। नगर महापालिका ही नहीं बल्कि पूर्व महापौर हरिकांत अहलुवालिया के कार्यकाल तक डिस्पेंसरी में मरीजों को दवाइयां मिलती रहीं। अब डिस्पेंसरी बंद होने से मरीज भटकते हैं। 

शारदा रोड पर सरदार पटेल स्कूल के निकट आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में नगर महापालिका की तरफ से आयुर्वेदाचार्य डॉ. ताराचंद गोयल तैनात रहे। यह डिस्पेंसरी पूरे शहर में मशहूर थी। पुरानी तहसील के निकट अभी भी एलोपैथी डिस्पेंसरी बनी है, लेकिन अब यहां महिलाओं का टीकाकरण किया जाता है। इस डिस्पेंसरी में डॉ. जीएस गुप्ता और डॉ. एसएस मित्तल आदि चिकित्सकों ने सेवाएं दी थीं।

1994 में सरकार ने सेवा कर दी बंद 
साल 1994 में नगर विकास विभाग ने नगर पालिका के समय संचालित की गई चारों डिस्पेंसरी को अयोग्य घोषित कर दिया। चिकित्सकों और अन्य स्टाफ की तैनाती पर रोक लगा दी। पूर्व महापौर हरिकांत अहलुवालिया के बोर्ड में तो कई बार अस्पताल संचालन के लिए दवाइयों का बजट पास किया गया और चिकित्सकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र भेजे गए, लेकिन कोई पहल नहीं हुई।  

बोर्ड में उठा मामला 
निगम की डिस्पेंसरी चलाने का मामला कई बार बोर्ड में उठा है। हमने निजी स्तर पर भी नगरायुक्तों से बात की। अधिकारी शासन के आदेश का हवाला देकर जनता को मिलने वाली सुविधाएं देने से पल्ला झाड़ते रहे, जबकि निगम अपने खजाने से डिस्पेंसरी चला सकती है।  - सुनीता वर्मा, महापौर 

डिस्पेंसरी चालू करने पर करना चाहिए विचार 
स्वास्थ्य के क्षेत्र में जितनी सुविधाएं हो जाएं कम हैं। कोरोना के दौरान इन सुविधाओं का अहसास हुआ। शासन और नगर निगम को डिस्पेंसरी चालू करने पर विचार करना चाहिए। - डॉ. गजेंद्र सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी 

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