एसी रूम बनकर रह गया आधुनिक ट्रैफिक कंट्रोल रूम, एडीजी ने किया था उद्घाटन
यूपी के मेरठ शहर में लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया ट्रैफिक पुलिस का आधुनिक कंट्रोल रूम इस समय एसी रूम बनकर रह गया है। अफसरों ने बड़े-बड़े दावे किए थे कि इस आधुनिक कंट्रोल रूम से यातायात व्यवस्था में सुधार लाने में मदद मिलेगी। यही नहीं शहर और हाईवे पर आपराधिक घटनाओं की रोकथाम होगी। लेकिन न तो यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही कोई अपराधी शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हुआ।
20 अप्रैल 2018 को एडीजी मेरठ जोन प्रशांत कुमार व आईजी रेंज रामकुमार ने ट्रैफिक कंट्रोल रूम का उद्घाटन किया था। शहर में लगे 141 कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़कर गूगल मैप से कनेक्ट किया गया। पुलिस अफसरों के अनुसार लखनऊ के बाद मेरठ में यह दूसरा ट्रैफिक कंट्रोल रूम है जिसे गूगल मैप से कनेक्ट किया गया।
जाम तो देखा जा रहा, पर कैसे खुले
शहर में 41 स्थानों पर उच्च क्वालिटी के सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। जबकि अन्य स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे पहले से लगे हुए थे। सभी कैमरों को कंट्रोल रूम से जोड़ा गया। दिल्ली रोड, मेरठ-दिल्ली हाईवे, कंकरखेड़ा, मोदीपुरम, कमिश्नरी आवास चौराहा, परतापुर, रिठानी, शास्त्रीनगर, मंगलपांडे नगर, गढ़ रोड, तेजगढ़ी, हापुड़ अड्डा समेत अन्य स्थानों पर जाम लगता है तो कंट्रोल रूम में बैठे पुलिसकर्मी ट्रैफिक पुलिस को मौके पर भेजते हैं। लेकिन एक स्थान पर जाम खुलने से पहले दूसरे स्थान पर जाम लगने लगता है।
चौराहों का भी बुरा हाल
शहर में मुख्य चौराहों का भी जाम को लेकर बुरा हाल है। ट्रैफिक पुलिस में एसपी ट्रैफिक, सीओ ट्रैफिक, तीन टीआई, एक टीएसआई, 25 एचसीपी, 125 कांस्टेबल, 35 महिला कांस्टेबल और 100 होमगार्ड हैं उसके बाद भी व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा। प्रमुख चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के एचसीपी, सिपाही तैनात हैं।
व्यवस्था में सुधार हुआ
कंट्रोल रूम बनने के बाद कुछ स्थानों पर यातायात व्यवस्था में सुधार हुआ है। जाम के लिए कंट्रोल रूम पर सूचना आने के साथ ही पांच मिनट में पुलिस पहुंच जाती है। अपराधी कैमरों में कैद नहीं हुए। आने वाले समय में कैमरे अन्य स्थानों पर भी लगाए जाएंगे। -संजीव वाजपेयी, एसपी ट्रैफिक
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