Meerut: शहर से प्रतिदिन 1200 मिट्रिक टन निकल रहा कूड़ा, खतरे में 50 हजार जिंदगियां, NGT ने निगम को लगाई फटकार
महानगर से रोजाना 1200 मैट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। वैज्ञानिक पद्धति से कूड़ा निस्तारण करने में नगर निगम फेल साबित हो रहा है।
विस्तार
महानगर से रोजाना 1200 मैट्रिक टन कूड़ा निकल रहा है। वैज्ञानिक पद्धति से कूड़ा निस्तारण करने में नगर निगम फेल साबित हो रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना की शिकायत पर करीब 11 महीने पहले एनजीटी ने लोहियानगर में निरीक्षण किया था। पर्यावरण और भूगर्भ दूषित होने पर एनजीटी ने नगर आयुक्त को फटकार लगाते हुए सुधारने की हिदायत दी।
समय अवधि पूरी होने पर नगर निगम ने कूड़ा निस्तारण करने की आख्या एनजीटी कोर्ट में प्रस्तुत की, जिस पर शिकायतकर्ता ने आपत्ति लगा दी। सात बिंदु पर जांच करने के लिए एनजीटी ने केंद्र के अधिकारियों को नामित करते हुए एक टीम गठित की। इसमें भारतीय संधारणीय विकास संस्थान नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. श्रीकांत के पाणिग्राही, वैज्ञानिक डॉ. सत्या और वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार सहित 6 सदस्यों की टीम बुधवार देर रात मेरठ पहुंची।
सुबह 11 बजे एनजीटी की टीम और अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह सहित निगम के अधिकारी लोहियानगर में पहुंची। कूड़ा निस्तारण का प्लांट देखने के साथ-साथ कूड़े के पहाड़ लगने का कारण भी एनजीटी के अधिकारियों ने नगर निगम से पूछा।
निगम अधिकारियों ने रोजाना 450 मैटिक टन कूड़ा निस्तारण होना बताकर भूड़बराल में जैविक खाद्य और बिजली बनाने की बात कही। इसके बाद एनजीटी की टीम नौचंदी मैदान में पहुंची, जहां उन्होंने ट्रांसफर स्टेशन देखा।भारतीय संधारणीय विकास संस्थान, नई दिल्ली के महानिदेशक डॉ. श्रीकांत के पाणिग्राही का कहना है कि अभी जांच कर रहे हैं।
50 हजार से ज्यादा जिंदगियों को खतरा
लोहियानगर, गांवड़ी व मंगतपुरम के आसपास रहने वाले करीब 50 हजार की आबादी पर कैंसर और अन्य बीमारी का खतरा बना हुआ है। कई बार लोग शिकायत कर चुके हैं। लोहियानगर में 2011 से कूड़ा डाला जा रहा है। कूड़े में आग लगाने की तस्वीर अक्सर सामने आती है। लोहियानगर में आउटर रिंग रोड का सेंटर बनना था, जोकि कूड़े का पहाड़ होने के चलते एनएचएआई को नक्शे में भी परिवर्तन करना पड़ा। लोहियानगर में भूगर्भ और पर्यावरण दूषित हो रहा है।
स्थानीय लोगों की शिकायत पर उत्तर प्रदेश प्रदूषण बोर्ड ने दो बार नगर निगम पर जुर्माना लगाया। गांवड़ी में निगम का आर्गेनिक रिसाइकिलिंग कंपनी के साथ कूड़ा निस्तारण के लिए अनुबंध हुआ था। कंपनी और निगम के बीच अनबन होने के चलते मामला कोर्ट चला गया। अभी मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
शिकायतकर्ता ने कूड़े के निस्तारण का आईना दिखा दिया
एनजीटी द्वारा निरीक्षण करने की जानकारी लगने पर सामाजिक कार्यकर्ता लोकेश खुराना का प्रतिनिधि के रूप में हरीश रघुवंशी भी लोहियानगर पहुंच गए। हरीश रघुवंशी ने एनजीटी की टीम के अधिकारियों को मोबाइल में वीडियो और फोटो दिखाए। कूड़े के साथ पशुओं के अवशेष और भूगर्भ की तस्वीर थी। अधिकारियों ने हरीश से भी दस्तावेज और तस्वीरें लीं।
इन सात बिंदु पर की जांच
-शहर से निकलने वाले कूड़े से सूखा-गीला कचरे का निस्तारित किया जा रहा है या नहीं।
-निगम की रिपोर्ट अनुसार 700 मीट्रिक टन गीला-सूखा शहर से निकलता है। 420 मीट्रिक टन प्रतिदिन जैविक खाद्य निकलता है और 280 मीटिक टन रोड़े, प्लास्टिक अन्य वस्तु निकलती है। इसको स्पष्ट नहीं किया।
-निगम द्वारा बताया गया कि 8700 मीट्रिक टन कचरे को गड्ढा खोदकर डाला और उससे जैविक खाद्य बनाया है। यह मानकों के अनुरूप है या नहीं।
-नगर निगम स्पष्ट करें कि नियमानुसार जैविक खाद्य बनाया जा रहा है या नहीं।
-लोहिया नगर में 600 मैट्रिक टन प्रतिदिन पुराने कचरे की छंटनी कर रहे है, उसका जैविक खाद, आरडीएफ और अन्य अवशेष प्रथककरण कितना किया है।
-सूखे कचरे से निकलने वाले अवशेष प्लास्टिक, लकड़ी, कपड़ा, रबड़ और अन्य को छह कंपनियों को बिक्री करता है। निगम ने उसका खुलासा नहीं किया।
-कचरे से निकलने वाली ईंट, रोडे और अन्य सामग्री को कहां पर इस्तेमाल किया है, इसको स्पष्ट नहीं किया।
डोर-टू-डोर कूड़ा उठने की व्यवस्था देखी
एनजीटी ने नगर निगम द्वारा डोर-टू-डोर कूड़ा उठने की व्यवस्था देखी। नगर निगम ने 90 वार्डों में से 73 वार्डों से डोर-टू-डोर कूड़ा उठने का बीवीजी कंपनी को अनुबंध होना बताया। शहर के एक वार्ड में निरीक्षण करने की बात कही है। शहर में 23 वार्डों में निगम द्वारा खुद कूड़ा उठाने की बात कही।
बिजेंद्र एनर्जी का प्लांट दिखाया
नगर निगम ने एनजीटी को भूड़बराल में बिजेंद्र एनर्जी प्लांट दिखाया है। कूड़े से बिजली बनाई जा रही है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि इस प्लांट में सूखे कचरे प्लास्टिक और अन्य सामान निकालकर बिजेंद्र एनर्जी के प्लांट पर भेजा जाता है।
बिजेंद्र एनर्जी प्लांट को नगर निगम के अधिकारियों ने अपना बताया है। प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. हरपाल सिंह ने बताया कि लोहियानगर प्लांट में कचरे की छंटनी होती है। प्लास्टिक और अन्य सामग्री बिजेंद्र एनर्जी प्लांट में भेजते हैं। जहां बिजली बनती है।