{"_id":"64e7612addc515010f032235","slug":"medical-na-news-c-14-1-mrt1001-312183-2023-08-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: मेडिकल में पहली बार बैलून विधि से किया जन्मजात हृदय रोगी का इलाज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: मेडिकल में पहली बार बैलून विधि से किया जन्मजात हृदय रोगी का इलाज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फोटो
मेडिकल में पहली बार बैलून विधि से किया जन्मजात हृदय रोगी का इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में महाधमनी के संकुचन (कोआर्कटेशन ऑफ एओरटा) का पहली बार बिना चीरा लगाए बैलून डाइलेशन और स्टेंटिंग विधि द्वारा सफल इलाज किया गया।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ शशांक पांडे ने बताया कि 46 वर्षीय कुसुम एक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थीं। इसमें हृदय से शरीर में रक्त ले जाने वाली महाधमनी (एओरटा) की सिकुड़न होती है। ऐसे में शरीर के निचले भाग जैसे पैरों और उदर में रक्तप्रवाह बहुत कम होता है। ऐसे मरीजों में रक्तचाप बहुत अधिक होने और दिल की दीवार मोटी होने के कारण सांस का फूलना आम बात है। बीमारी जटिल थी और इसमें ओपन हार्ट बाई पास सर्जरी की आवश्यकता थी, परंतु मरीज की हालत गंभीर थी और ओपन हार्ट के लिए प्रतीक्षा करने का समय नहीं था। लिहाजा मरीज के एक हाथ और एक पैर की कुल दो नसों से कैथेटर को मरीज के हृदय तक ले जा कर पहली बार बैलून डाइलेशन एवं स्टेंटिग विधि द्वारा कोआर्कटेशन ऑफ एओरटा का बीना चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया गया।ऑपरेशन में कार्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ धीरज सोनी, डॉ सीबी पांडे और उनकी टीम का सहयोग रहा।
विज्ञापन
मेडिकल में पहली बार बैलून विधि से किया जन्मजात हृदय रोगी का इलाज
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज के हृदय रोग विभाग में महाधमनी के संकुचन (कोआर्कटेशन ऑफ एओरटा) का पहली बार बिना चीरा लगाए बैलून डाइलेशन और स्टेंटिंग विधि द्वारा सफल इलाज किया गया।
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ शशांक पांडे ने बताया कि 46 वर्षीय कुसुम एक जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित थीं। इसमें हृदय से शरीर में रक्त ले जाने वाली महाधमनी (एओरटा) की सिकुड़न होती है। ऐसे में शरीर के निचले भाग जैसे पैरों और उदर में रक्तप्रवाह बहुत कम होता है। ऐसे मरीजों में रक्तचाप बहुत अधिक होने और दिल की दीवार मोटी होने के कारण सांस का फूलना आम बात है। बीमारी जटिल थी और इसमें ओपन हार्ट बाई पास सर्जरी की आवश्यकता थी, परंतु मरीज की हालत गंभीर थी और ओपन हार्ट के लिए प्रतीक्षा करने का समय नहीं था। लिहाजा मरीज के एक हाथ और एक पैर की कुल दो नसों से कैथेटर को मरीज के हृदय तक ले जा कर पहली बार बैलून डाइलेशन एवं स्टेंटिग विधि द्वारा कोआर्कटेशन ऑफ एओरटा का बीना चीरा लगाए सफल ऑपरेशन किया गया।ऑपरेशन में कार्डियोलॉजी के विभागाध्यक्ष डॉ धीरज सोनी, डॉ सीबी पांडे और उनकी टीम का सहयोग रहा।
विज्ञापन