{"_id":"5b7b23ac42c792463f793b19","slug":"medical-me-junior-doctors-rahe-hartaal-par","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेडिकल के जूनियर डॉक्टर रहे हड़ताल पर, मरीज बेहाल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेडिकल के जूनियर डॉक्टर रहे हड़ताल पर, मरीज बेहाल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Aug 2018 01:55 AM IST
विज्ञापन
फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मेडिकल कॉलेज में हुए बवाल का साइड इफेक्ट मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। सोमवार को जूनियर डॉक्टरों ने कार्य बहिष्कार करते हुए ओपीडी बंद करा दी। एक दिन की हड़ताल करते हुए गेट पर नारेबाजी और विरोध प्रदर्शन किया। चेतावनी दी है कि जब तक सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी के हमलावरों पर कार्रवाई नहीं होगी, वह ओपीडी नहीं चलने देंगे। हालांकि मरीजों के लिए इमरजेंसी सुविधा ही खुली रहेगी। वहीं, आज मंगलवार को ओपीडी चलेगी या नहीं, इसका फैसला सुबह होगा।
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुए इस बखेड़े के चलते ओपीडी बंद होने से सैकड़ों मरीज परेशान रहे। इनमें काफी तादाद में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी रहे। परेशान मरीज पर्चा काउंटर और ओपीडी के बाहर घंटों बैठे रहे। उनका कहना था कि जिला अस्पताल यहां से काफी दूर होने के चलते वह वहां जाने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में कहां जाएं? दूसरी तरफ जूनियर चिकित्सकों का कहना था कि वह मरीजों की परेशानी समझते हैं, इसलिए पिछले 10 दिन से विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहे थे। लेकिन अब पानी सिर से निकल चुका है। मेडिकल कॉलेज में सीएमएस के साथ मारपीट कर दी गई और पुलिस-प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अब वह खामोश नहीं बैठेंगे। जब तक गिरफ्तारी नहीं होगी आंदोलन जारी रहेगा।
इसके बाद जूनियर चिकित्सकों ने प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता से मिलकर कार्रवाई कराने की मांग की। प्राचार्य ने उन्हें आश्वासन दिया। आगे की रणनीति केलिए और विरोध स्वरूप जूनियर डॉक्टर देर शाम तक लेक्चर रूम में बैठे रहे। गौरतलब है कि इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी, मगर प्राचार्य के समझाने पर तब वह मान गए थे।
विज्ञापन
10 अगस्त को हुआ था बखेड़ा
मेडिकल कॉलेज में 10 अगस्त को कर्मचारियों के दो गुटों में मारपीट हुई थी। इस दौरान सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी से भी मारपीट की गई थी। दोनों तरफ से मेडिकल थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, इसे लेकर ही विरोध चल रहा है।
आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू की कार्रवाई
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने कमिश्नर को फोन कॉल कर पूरे मामले की जानकारी दी। प्राचार्य ने बताया कि कमिश्नर ने उनसे कहा कि वह इस संबंध में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से बात करेंगी। उनके बात करने के बाद एसपी सिटी मेडिकल कॉलेज आए थे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) की कार्रवाई की जा रही है।
काली पट्टी बांधकर देखेंगे मरीज
आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अलावा कुछ सरकारी चिकित्सक मंगलवार को काली पट्टी बांधकर मरीज देखेंगे। आईएमए मेरठ शाखा अध्यक्ष डॉ. मेधावी तोमर ने बताया कि चिकित्सक डॉ. अजीत चौधरी के समर्थन में हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। विरोध स्वरूप अब काली पट्टी बांधकर मरीज देखने का निर्णय लिया गया है।
विज्ञापन
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुए इस बखेड़े के चलते ओपीडी बंद होने से सैकड़ों मरीज परेशान रहे। इनमें काफी तादाद में बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भी रहे। परेशान मरीज पर्चा काउंटर और ओपीडी के बाहर घंटों बैठे रहे। उनका कहना था कि जिला अस्पताल यहां से काफी दूर होने के चलते वह वहां जाने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे में कहां जाएं? दूसरी तरफ जूनियर चिकित्सकों का कहना था कि वह मरीजों की परेशानी समझते हैं, इसलिए पिछले 10 दिन से विरोध प्रदर्शन नहीं कर रहे थे। लेकिन अब पानी सिर से निकल चुका है। मेडिकल कॉलेज में सीएमएस के साथ मारपीट कर दी गई और पुलिस-प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। अब वह खामोश नहीं बैठेंगे। जब तक गिरफ्तारी नहीं होगी आंदोलन जारी रहेगा।
विज्ञापन
इसके बाद जूनियर चिकित्सकों ने प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता से मिलकर कार्रवाई कराने की मांग की। प्राचार्य ने उन्हें आश्वासन दिया। आगे की रणनीति केलिए और विरोध स्वरूप जूनियर डॉक्टर देर शाम तक लेक्चर रूम में बैठे रहे। गौरतलब है कि इससे पहले भी जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी थी, मगर प्राचार्य के समझाने पर तब वह मान गए थे।
विज्ञापन
10 अगस्त को हुआ था बखेड़ा
मेडिकल कॉलेज में 10 अगस्त को कर्मचारियों के दो गुटों में मारपीट हुई थी। इस दौरान सीएमएस डॉ. अजीत चौधरी से भी मारपीट की गई थी। दोनों तरफ से मेडिकल थाने में नामजद मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, इसे लेकर ही विरोध चल रहा है।
आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू की कार्रवाई
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने कमिश्नर को फोन कॉल कर पूरे मामले की जानकारी दी। प्राचार्य ने बताया कि कमिश्नर ने उनसे कहा कि वह इस संबंध में पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से बात करेंगी। उनके बात करने के बाद एसपी सिटी मेडिकल कॉलेज आए थे। उन्होंने आश्वासन दिया है कि कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में आरोपियों के खिलाफ एनबीडब्ल्यू (गैर जमानती वारंट) की कार्रवाई की जा रही है।
काली पट्टी बांधकर देखेंगे मरीज
आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के अलावा कुछ सरकारी चिकित्सक मंगलवार को काली पट्टी बांधकर मरीज देखेंगे। आईएमए मेरठ शाखा अध्यक्ष डॉ. मेधावी तोमर ने बताया कि चिकित्सक डॉ. अजीत चौधरी के समर्थन में हैं और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। विरोध स्वरूप अब काली पट्टी बांधकर मरीज देखने का निर्णय लिया गया है।