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एमडीए में कमाई की फाइलें गायब करने का खेल

Fri, 16 Sep 2016 02:38 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
अमर उजाला ब्यूरों Updated Fri, 16 Sep 2016 02:38 AM IST
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mda me kamaai ki file
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
एमडीए की आय बढ़ाने की तैयारियों में जुटे अधिकारियों की मुहिम को तगड़ा झटका लगा है। शमन शुल्क से जुड़ी ये फाइलें गायब होने लगी हैं। यही नहीं, खैरनगर के एक चर्चित कॉम्प्लेक्स की भी फाइल का कोई अता-पता नहीं है। यह कॉम्प्लेक्स अनधिकृत रूप से बनाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह वक्फ की जमीन पर बन रहा है। इसके अलावा भी अन्य कई प्रकरणों से जुड़ी फाइलें खेल कर गायब कर दी गई हैं।
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दरअसल, शहर में ताबड़तोड़ ढंग से अनधिकृत निर्माण हो रहे हैं। लेकिन, एमडीए शमन शुल्क नहीं वसूल पा रहा है। अपनी आर्थिक तंगी दूर करने के लिए एमडीए ने वसूली की मुहिम शुरू भी की तो अधिकारी ही सेटिंग के खेल में उतर आए। यही वजह है कि एमडीए के पास धन का अभाव हो गया है। आलम यह है कि कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है।
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ओवर ड्राफ्ट ने तोड़ी कमर
इन हालात में ओवर ड्राफ्ट ने एमडीए की कमर तोड़ दी। खाते में पैसा न होने के बाद भी विभिन्न भुगतान ओवर ड्राफ्ट किए गए। इसमें भी खेल हुआ। एसटीपी समेत तमाम ऐसे कामों का भुगतान कराया गया, जहां गड़बड़झाला हुआ है। ऐसे में अब एमडीए को हो रही आय ओवर ड्राफ्ट में ही जा रही है।
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अब फिक्स किया टारगेट
आय बढ़ाने के लिए एमडीए में अब प्रयास शुरू हुए हैं। एमडीए वीसी ने चारों जोन प्रभारियों के लिए लक्ष्य निर्धारित कर दिया है। एक माह में जोन सी से डेढ़ करोड़ रुपये शमन शुल्क जमा कराना होगा। बाकी तीनों जोन को एक-एक करोड़ रुपये की वसूली का टारगेट दिया गया है। साथ ही चेतावनी दी है कि जिसका लक्ष्य पूरा नहीं होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। हकीकत तो यही है कि शमन शुल्क वसूली में सख्ती बरती जाए तो एमडीए को प्रतिमाह छह से 10 करोड़ रुपये की आय हो सकती है।

...तो फाइलें होने लगीं गुम
भवनों पर शमन शुल्क तय कर वसूली के लिए सख्ती होते ही खेल शुरू हो गया। अवैध निर्माण की फाइलें ही गायब होने लगीं। खैरनगर में एक कॉम्प्लेक्स के भूतल (ग्राउंड फ्लोर) की फाइल का पता ही नहीं चल पा रहा है। जोन प्रभारी और संबंधित लिपिक एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। यह वही निर्माण है, जिसमें लगभग 60 दुकानें बनाई गई हैं। बताया जा रह है कि यह वक्फ की जमीन पर बना दिया गया और इसकी जांच सर्वे सहायक आयुक्त वक्फ बोर्ड कर रहे हैं।

इसका मानचित्र भी एमडीए से पास नहीं है। जब भूतल का निर्माण हुआ था तो एमडीए ने इसका चालान काटा था पर कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद ऊपर का भी निर्माण कर लिया गया। साथ ही अब इसकी फाइल गायब कर दी गई। इसके अलावा पीएल शर्मा रोड के एक निर्माण की फाइल गायब है। बाईपास के कई निर्माण कार्यों की भी फाइलों का पता नहीं चल रहा है। इस संबंध में एमडीए वीसी योगेंद्र यादव का कहना है कि फाइलें तलाश ली जाएंगी। नहीं मिलीं तो संबंधित कर्मचारियों पर कार्रवाई की जाएगी। शमन शुल्क तो हर हाल में वसूला जाएगा।
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