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मौसम मेहरबान, आलू किसानों की बल्ले बल्ले
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 May 2018 01:32 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश में तीन साल से मंदी की मार झेल रहे आलू किसानों के लिए यह सीजन राहत भरा है। शुरुआत में ही आलू के दाम अच्छे होने से किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। आलू के दाम 700 रुपये प्रति 50 किलो तक पहुंचने से किसानों की बल्ले बल्ले हो गई है। वहीं, कृषि जानकारों की मानें तो आने वाले समय में आलू के दाम और भी बढ़ सकते हैं।
दरअसल वेस्ट यूपी के किसान गन्ना और धान के साथ-साथ बड़े स्तर पर आलू की खेती भी करते हैं। आलू की खेती में जिस साल दाम अच्छे रहते हैं तो सीजन हिट हो जाता है जबकि पिछले करीब तीन साल आलू के दाम लगातार पिटने से किसान परेशानी की हालत में पहुंच गया। आलम यह कि किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही थी। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही थी।
यह रहते थे रेट
सीजन की शुरुआत में आलू के रेट अमूमन 200-300 प्रति 50 किलो तक रहते थे। लेकिन इस सीजन की शुरुआत में ही यह रेट दोगुना से भी ज्यादा पहुंच गए है। आलू की बाजार में सही कीमत मिलने से आलू किसान और व्यापारी भी खुश हैं। हालांकि अभी तक कोल्ड स्टोरेज नहीं खुले हैं। इनके खुलने पर भी आलू के दाम बढने के आसार हैं। आलू की कुछ प्रजातियों के दाम तो अभी से ही 800 रुपये तक पहुंच रहे हैं।
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इन कारणों से बढ़े दाम
- पिछले तीन साल से आलू के दामों में गिरावट रही
- लगातार गिरावट के चलते दूसरे साल में लघु किसान आलू से हट जाता है
- इस वजह से कई किसानों ने आलू की खेती से हाथ खींचे
- इस बार आलू का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा कम हुआ
- कृषि का क्षेत्रफल भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा
- मौसम मेहरबान रहा, कम उत्पादन के साथ बाजार में आवक भी कम है
इन जिलों में ज्यादा खेती
मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, संभल, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, कानपुर, बरेली, मुरादाबाद, एटा, इटावा, फतेहपुर, बदायूं, कौशांबी, कासगंज, पीलीभीत, सीतापुर, रामपुर।
ये प्रजातियां अनुकूल
कुफरी बहार, कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याति, चिप्सोना वन, चिप्सोना टू, कुफरी फ्राइसोना, आदि प्रजाति यहां के मौसम के लिए काफी अनुकूल हैं।
इन प्रजाति की मांग
चिप्सोना वन, चिप्सोना टू, कुफरी सूर्य प्रजाति। यह प्रजाति जहां खाने में अच्छी है, वहीं इनमें शुगर की मात्रा भी बहुत कम है। लगातार बाजार में मांग बढ़ने के कारण साल भर इन के दाम अन्य प्रजातियों से 100 रुपये से 200 रुपये तक अधिक रहते है।
वर्तमान में आलू के दाम
कट्टा (50 किलो) 700 से 750
पिछले वर्ष 200 से 250
चिप्सोना वैरायटी 800 से 850 तक
आलू का क्षेत्रफल और उत्पादन जिलेवार
जनपद क्षेत्रफल उत्पादन
मेरठ - 6600 17000
बागपत - 500 13000
गाजियाबाद - 2400 23125
हापुड़ - 3600 98500
बुलंदशहर - 8100 22500
गौतमबुद्धनगर - 400 10500
(क्षेत्रफल हेक्टेयर में, उत्पादन मैट्रिक टन में है)
---------
अच्छे रहेंगे दाम
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू के दाम अच्छे रहेंगे। आलू की फसल में लागत भी अधिक आती है। किसान को अगर दाम अच्छे नहीं मिलेंगे तो उसकी आर्थिक स्थिति खराब रहेगी। आने वाले समय में भी उम्मीद है कि आलू के दाम अच्छे रहेंगे। -डॉ. मनोज कुमार, संयुक्त निदेशक, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम
किसानों को ऑक्सीजन
पिछले तीन साल में आलू की स्थिति ज्यादा खराब हो गई थी। कभी मौसम की मार तो कभी बाजार में भाव न मिलने के कारण किसान दुर्दशा झेल रहे हैं। यह बेल्ट गन्ने के साथ आलू की भी है। इस बार आलू के दाम अच्छे रहेेंगे तो किसानों को थोड़ी ऑक्सीजन मिलेगी। -भोपाल सिंह, किसान फफूंडा
फसल बचा लेते हैं
मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद किसान वैज्ञानिकों की सलाह से आलू की फसल को बचा लेते हैं। किसान को अगर सही दाम न मिले तो उसे काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस बार शुरुआत से ही ऐसा लग रहा है कि किसानों को अच्छे दाम मिलेेंगे, जिससे किसानों को फिर से राहत मिलेगी। -अशोक चौहान, तकनीकी अधिकारी, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम
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दरअसल वेस्ट यूपी के किसान गन्ना और धान के साथ-साथ बड़े स्तर पर आलू की खेती भी करते हैं। आलू की खेती में जिस साल दाम अच्छे रहते हैं तो सीजन हिट हो जाता है जबकि पिछले करीब तीन साल आलू के दाम लगातार पिटने से किसान परेशानी की हालत में पहुंच गया। आलम यह कि किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही थी। जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो रही थी।
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यह रहते थे रेट
सीजन की शुरुआत में आलू के रेट अमूमन 200-300 प्रति 50 किलो तक रहते थे। लेकिन इस सीजन की शुरुआत में ही यह रेट दोगुना से भी ज्यादा पहुंच गए है। आलू की बाजार में सही कीमत मिलने से आलू किसान और व्यापारी भी खुश हैं। हालांकि अभी तक कोल्ड स्टोरेज नहीं खुले हैं। इनके खुलने पर भी आलू के दाम बढने के आसार हैं। आलू की कुछ प्रजातियों के दाम तो अभी से ही 800 रुपये तक पहुंच रहे हैं।
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इन कारणों से बढ़े दाम
- पिछले तीन साल से आलू के दामों में गिरावट रही
- लगातार गिरावट के चलते दूसरे साल में लघु किसान आलू से हट जाता है
- इस वजह से कई किसानों ने आलू की खेती से हाथ खींचे
- इस बार आलू का उत्पादन पिछले वर्ष की अपेक्षा कम हुआ
- कृषि का क्षेत्रफल भी पिछले वर्ष की तुलना में कम रहा
- मौसम मेहरबान रहा, कम उत्पादन के साथ बाजार में आवक भी कम है
इन जिलों में ज्यादा खेती
मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बिजनौर, बागपत, हापुड़, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंदशहर, संभल, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद, कानपुर, बरेली, मुरादाबाद, एटा, इटावा, फतेहपुर, बदायूं, कौशांबी, कासगंज, पीलीभीत, सीतापुर, रामपुर।
ये प्रजातियां अनुकूल
कुफरी बहार, कुफरी पुखराज, कुफरी ख्याति, चिप्सोना वन, चिप्सोना टू, कुफरी फ्राइसोना, आदि प्रजाति यहां के मौसम के लिए काफी अनुकूल हैं।
इन प्रजाति की मांग
चिप्सोना वन, चिप्सोना टू, कुफरी सूर्य प्रजाति। यह प्रजाति जहां खाने में अच्छी है, वहीं इनमें शुगर की मात्रा भी बहुत कम है। लगातार बाजार में मांग बढ़ने के कारण साल भर इन के दाम अन्य प्रजातियों से 100 रुपये से 200 रुपये तक अधिक रहते है।
वर्तमान में आलू के दाम
कट्टा (50 किलो) 700 से 750
पिछले वर्ष 200 से 250
चिप्सोना वैरायटी 800 से 850 तक
आलू का क्षेत्रफल और उत्पादन जिलेवार
जनपद क्षेत्रफल उत्पादन
मेरठ - 6600 17000
बागपत - 500 13000
गाजियाबाद - 2400 23125
हापुड़ - 3600 98500
बुलंदशहर - 8100 22500
गौतमबुद्धनगर - 400 10500
(क्षेत्रफल हेक्टेयर में, उत्पादन मैट्रिक टन में है)
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अच्छे रहेंगे दाम
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार आलू के दाम अच्छे रहेंगे। आलू की फसल में लागत भी अधिक आती है। किसान को अगर दाम अच्छे नहीं मिलेंगे तो उसकी आर्थिक स्थिति खराब रहेगी। आने वाले समय में भी उम्मीद है कि आलू के दाम अच्छे रहेंगे। -डॉ. मनोज कुमार, संयुक्त निदेशक, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम
किसानों को ऑक्सीजन
पिछले तीन साल में आलू की स्थिति ज्यादा खराब हो गई थी। कभी मौसम की मार तो कभी बाजार में भाव न मिलने के कारण किसान दुर्दशा झेल रहे हैं। यह बेल्ट गन्ने के साथ आलू की भी है। इस बार आलू के दाम अच्छे रहेेंगे तो किसानों को थोड़ी ऑक्सीजन मिलेगी। -भोपाल सिंह, किसान फफूंडा
फसल बचा लेते हैं
मौसम प्रतिकूल होने के बावजूद किसान वैज्ञानिकों की सलाह से आलू की फसल को बचा लेते हैं। किसान को अगर सही दाम न मिले तो उसे काफी परेशानी उठानी पड़ती है। इस बार शुरुआत से ही ऐसा लग रहा है कि किसानों को अच्छे दाम मिलेेंगे, जिससे किसानों को फिर से राहत मिलेगी। -अशोक चौहान, तकनीकी अधिकारी, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम