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जेल से रिहा हुआ 1993 पीएसी बम कांड का मास्टरमाइंड सलीम

Mon, 22 Jan 2018 05:52 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 22 Jan 2018 05:52 PM IST
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Mastermind Salim of 1993 PAC bomb blast released from prison
जेल से रिहा हुआ सलीम पतला - फोटो : अमर उजाला

पीएसी बम कांड के मुख्य आरोपी सलीम पतला को जिला जेल से रिहा कर दिया गया। वरिष्ठ जेल अधीक्षक बीडी पांडे ने सलीम पतला को रिहा करने की पुष्टि करते हुए बताया कि उसे कोर्ट के आदेश पर रिहा गया है। सलीम पतला को 31 अक्तूबर 2014 को एटीएस मेरठ की टीम ने खतौली से गिरफ्तार किया था।

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वर्ष 1992-93 में हाशिमपुरा दंगे के बाद हापुड़ अड्डे के पास इमलियान के सामने पीएसी की 41 वीं वाहिनी का कैंप लगा था। 26 जनवरी 1993 को कैंप पर बम से हमला हुआ था। जिसमें गाजियाबाद के हवलदार समेत दो जवान शहीद हो गए थे। जबकि दो अन्य जवान घायल हुए थे। इस मामले में पुलिस की जांच में मास्टरमाइंड सलीम पतला और दो अन्य के नाम सामने आए थे। शासन ने सलीम पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। सलीम के दोनों साथियों को उम्र कैद की सजा हुई थी। जेल प्रशासन के अनुसार एक नवंबर 2014 को सलीम मेरठ जेल में लाया गया था। तभी से वह जिला जेल में बंद था। उसके खिलाफ हत्या और कई अन्य संगीन धाराओं में केस था। हाईकोर्ट के आदेश पर उसे जमानत मिली है। जेल प्रशासन के अनुसार मेरठ के एडीजे-12 की कोर्ट से सलीम पतला को जमानत पर रिहा करने का आदेश जिला जेल में पहुंचा। जेल प्रशासन के अनुसार सलीम पतला के जिला जेल में दो पते दर्ज हैं। उनमें एकता विहार कॉलोनी थाना कटघर जिला मुरादाबाद और मोहल्ला इस्लामाबाद थाना लिसाड़ी गेट मेरठ का पता दर्ज था।वर्तमान में एसटीएफ मेरठ में तैनात इंस्पेक्टर विनोद काकड़ा ने बताया कि उस समय मैं एटीएस में तैनात था। कई वर्षो तक सलीम की गिरफ्तारी के लिए खाक छानी। एटीएस ने खतौली में घेराबंदी उसे गिरफ्तार किया था।
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दावों को ठोस सुबूतों में नहीं बदल सकी पुलिस

Mastermind Salim of 1993 PAC bomb blast released from prison
घर पर बैठे सलीम पतला के भाई - फोटो : अमर उजाला

पीएसी कैंप पर बम फेंकने के आरोपी सलीम पतला की तीन साल पहले गिरफ्तारी के दौरान पुलिस अफसरों ने लंबे-चौड़े दावे किए थे। उसे इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य तक बताते हुए आतंकी संगठनों की मदद करने में उसकी अहम भूमिका बताई। लेकिन कोर्ट में इन सब आरोपों को पुख्ता सुबूतों में नहीं बदल पाए। यही कारण रहा कि सलीम जमानत पर छूट गया। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार सन 1992 में पीएसी कैंप पर पहला धमाका हुआ, जिसमें कई जवान घायल हुए थे। उसके बाद 26 जनवरी 1993 में सिविल लाइन क्षेत्र में पीएसी कैंप पर बम से हमला हुआ था। जिसमें दो जवान शहीद हुए थे। ये मामला टाडा अदालत में चला। इसमें दो आरोपियों अब्दुल जब्बार और मो. अय्यूब को उम्रकैद हुई। लेकिन मास्टर माइंड माने जाने वाला सलीम तक पहुंचने में पुलिस को करीब 22 साल लग गए।  अक्तूबर 2014 में गिरफ्तारी के दौरान प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस अफसरों ने दावे किए कि सलीम को बम बनाने की ट्रेनिंग पिलखुवा निवासी आतंकवादी अब्दुल करीम उर्फ टुंडा ने दी थी। इसके बाद सलीम ने मेरठ समेत देशभर में कई धमाकों को अंजाम दिया। लेकिन पुलिस ने जो दावे प्रेस कांफ्रेंस में किए थे, उन्हें वो अपनी चार्जशीट में पुख्ता तरीके से साबित नहीं कर सकी। 

मेरे भाई सलीम को साजिशन फंसाया 
सलीम उर्फ पतला रविवार को इस्लामाबाद में अपने घर नहीं पहुंचा। पैंठ बाजार में कपड़ों का काम करने वाले सलीम के छोटे भाई सरफराज ने दावा किया कि सलीम ने पीएसी कैंप पर बम नहीं फेंके थे। कुछ पड़ोसियों ने साजिशन पुलिस से नाम ले दिया था। सलीम परिवार के साथ मुरादाबाद में रहता था। जिस आरोपी को उम्रकैद हुई थी, वह सलीम के घर पर नहीं रहता था, बल्कि पड़ोसी था। कोर्ट से एक दिन उन्हें भी इंसाफ मिलेगा।

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