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हाल-बेहाल: यूपी में करोड़ों की परियोजनाएं हो रहीं खंडहर, सुध लेने वाला कोई नहीं
Wed, 02 Sep 2020 02:12 PM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Wed, 02 Sep 2020 02:12 PM IST
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लोहिया नगर में खंडहर हुए एमडीए फ्लैट
- फोटो : अमर उजाला
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सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी के आंकड़ों ने लोगों की चिंता को बढ़ाया है। सबसे अधिक चिंता निर्माण क्षेत्र से है। जीडीपी का सबसे प्रमुख सेक्टर निर्माण है। इसमें माइनस 50 प्रतिशत की कमी आई है। भवन निर्माण और उनकी बिक्री करने के लिए सबसे बुरा वक्त है। मेरठ में भी ऐसे कई सरकारी योजनाओं के फ्लैट हैं जो अधर में लटके हैं या खंडहर होते जा रहे हैं। ऐसे में सरकार को इन फ्लैट और आवासों को बेचने के लिए नई नीति पर कार्य करना होगा।
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आवास विकास और एमडीए ने अपनी योजनाओं में ऐसे प्रोजेक्टों पर करोड़ों रुपये फूंक दिए, लेकिन इनका निस्तारण करने के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है। ऐसे में भवनों को बनाने से पहले इन्हें बेचने के लिए कार्य करना होगा। हर वर्ष नई योजनाओं को लाने के लिए ड्राफ्ट तैयार किए जाते हैं, लेकिन पहले से बने प्रोजेक्टों पर चर्चा नहीं हो रही है।
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जागृति विहार एक्सटेंशन
जागृति विहार एक्सटेंशन आवास विकास की योजना है। वर्ष-2016 में दस मंजिला इमारत बनाकर फ्लैट तैयार किए गए थे। लेकिन ये फ्लैट भी आवास-विकास बेच नहीं सका है। चार वर्ष बाद भी यहां रहने के लिए कोई तैयार नहीं है।
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लोहिया नगर
इनर रिंग रोड और मेरठ-बुलंदशहर हाइवे के पास होने के बाद भी यहां फ्लैट नहीं बिक नहीं रहे हैं। के-ब्लॉक में 300 फ्लैटों का ढांचा तो खड़ा हो गया। लेकिन चार साल में भी काम पूरा नहीं हुआ। इनकी कीमत 16-28 लाख रुपये तक है।
प्राइवेट बिल्डर भी परेशान
वहीं, सरकारी विभागों के बाद यही हाल प्राइवेट बिल्डर का भी है। बिजली बंबा बाईपास पर कई ऐसे प्रोजेक्ट है जो अधूरे पड़े हैं। इसके अलावा एनएच-58 पर भी इमारतें बनकर खड़ी हो गईं, लेकिन उनमें रहने के लिए कोई तैयार नहीं है। ऐसे में सरकार को भवन निर्माण नीति को बदलने के लिए सोचना होगा।
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