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मनुष्य को धन कमाने के सिवाय कुछ नहीं दिख रहा
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सरधना। आदर्शनगर स्थित श्री चंद्रप्रभु जैन पंचायती मंदिर में शुक्रवार को धार्मिक कार्यक्रम हुआ। इसमें मुनि श्री 108 धवल सागर जी महाराज ने जाप अनुष्ठान कराया। इसके बाद शांतिधारा कराई। इसके बाद मंगल प्रवचन दिये।
श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में जाप अनुष्ठान एवं शांतिधारा का लाभ अंकुश जैन व तुषार जैन परिवार को मिला। यहां धर्म सभा में मुनिश्री 108 वीर सागर जी महाराज ने कहा कि आज इंसान की इच्छाएं बहुत अधिक हो चुकी हैं। वह भगवान के दर्शन व गुरु के उपदेश सुनने के लिए मंदिर या धार्मिक कार्यक्रम में जाता जरूर है परंतु भाव को समझ नहीं पाता है। प्रत्येक मनुष्य घर गृहस्थी में फंसा है। उसे परिजनों की इच्छापूर्ति के लिए धन कमाने के सिवाय कुछ नहीं दिख रहा है।
महाराज श्री ने बताया कि हमें भगवान के दर्शन करते समय केवल मूर्ति नहीं मूर्तिमान को देखना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य सेवाभावी आकांक्षा रहित होने पर संतों की श्रेणी में आ जाता है। मुनष्य को संतों के गुणों में झांककर उनके जैसा बनने पर विचार करना चाहिए। यहां डॉ. अमरीश जैन, नरेश जैन, आलोक जैन, डॉ. सुशील जैन, नवीन जैन, योगेश जैन, विकास जैन, लोकेश जैन, अंकुर, सौरभ, विजेंद्र, सुखमाल चंद जैन आदि उपस्थित रहे।
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श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन पंचायती मंदिर में जाप अनुष्ठान एवं शांतिधारा का लाभ अंकुश जैन व तुषार जैन परिवार को मिला। यहां धर्म सभा में मुनिश्री 108 वीर सागर जी महाराज ने कहा कि आज इंसान की इच्छाएं बहुत अधिक हो चुकी हैं। वह भगवान के दर्शन व गुरु के उपदेश सुनने के लिए मंदिर या धार्मिक कार्यक्रम में जाता जरूर है परंतु भाव को समझ नहीं पाता है। प्रत्येक मनुष्य घर गृहस्थी में फंसा है। उसे परिजनों की इच्छापूर्ति के लिए धन कमाने के सिवाय कुछ नहीं दिख रहा है।
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महाराज श्री ने बताया कि हमें भगवान के दर्शन करते समय केवल मूर्ति नहीं मूर्तिमान को देखना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य सेवाभावी आकांक्षा रहित होने पर संतों की श्रेणी में आ जाता है। मुनष्य को संतों के गुणों में झांककर उनके जैसा बनने पर विचार करना चाहिए। यहां डॉ. अमरीश जैन, नरेश जैन, आलोक जैन, डॉ. सुशील जैन, नवीन जैन, योगेश जैन, विकास जैन, लोकेश जैन, अंकुर, सौरभ, विजेंद्र, सुखमाल चंद जैन आदि उपस्थित रहे।
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