रंग लाया अभियान: प्राचीन रूप में लौटने लगी मालन, अतिक्रमण हटाकर बनाए जाने लगे तटबंध
मालन और प्राचीन काल में मालिनी कहलाने वाली नदी का उद्गम पौड़ी जिले की चंडा पहाड़ियों से माना जाता है। पहाड़ से नदी के रूप में निकली मालन मैदान में पहुंचते ही नाला बन गई। अब मालन नदी के पुनरुद्धार कार्य को इसके मूल रूप में वापस लाने तक जारी रखा जाएगा।
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बिजनौर में मालन को बचाने का अभियान धरातल पर जोर पकड़ता जा रहा है। अतिक्रमण हटाकर मालन के तटबंध बनाए जा रहे हैं, जिससे पास के खेत वाले फिर से अतिक्रमण न करने पाए। राजस्व अभिलेखों के अनुसार 60 से 70 मीटर तक मालन की खोदाई करते हुए चौड़ा किया जा रहा है।
बुधवार को मालन के उद्धार अभियान का दूसरा दिन रहा। मालन को गहरा ही नहीं बल्कि चौड़ा भी किया जा रहा है। वहीं मिट्टी उठाकर तटों पर डाली जा रही है, जिससे तटबंध भी हाथोंहाथ ही बन रहे हैं।
बता दें कि अमर उजाला के अभियान मालन मांगे अविरल धारा में प्रशासन ने कदमताल मिलाया है। मंगलवार को पूजा-अर्चना करने के साथ ही डीएम उमेश मिश्रा ने पहला फावड़ा चलाकर मालन के पुराने स्वरूप में लाने का प्रयास शुरू किया। हजारों मजदूरों ने फावड़ा चलाकर मालन के किनारों को साफ किया। अब दूसरे दिन मजदूरों के साथ-साथ जेसीबी भी पहुंच गई। तीन गांव के प्रधानों की मौजूदगी में अतिक्रमण हटाया गया। साथ ही तटबंध बनाने काम चल रहा है।
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200 मीटर भी है कई जगहों पर चौड़ाई
नाले में तब्दील हो चुकी मालन की चौड़ाई कई जगहों पर 200 मीटर भी है। राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करने पर असल चौड़ाई का पता लगा। सरकारी नक्शे के अनुसार निशान लगाकर अतिक्रमण को साफ किया जाने लगा है। किसानों ने अतिक्रमण करते हुए फसल बो रखी थी। लोगों को यह भी जानकारी नहीं थी कि मालन सरकारी कागजों में काफी चौड़ी है।
लगातार चलता रहेगा अभियान, लेंगे और जनसहयोग: डीएम
डीएम उमेश मिश्रा ने कहा कि मालन पर अभियान चलता रहेगा, जब तक पूरी मालन अपने मूल स्वरूप में नहीं आ जाती। इसके लिए लगातार जनसहयोग लिया जाएगा। साथ ही आसपास के गांवों के लोगों से भी मालन में श्रमदान करने की अपील की जा रही है। हमारा प्रयास है कि मालन को उसका मूल स्वरूप दिया जाए। अतिक्रमण हटाया जा रहा है।